खाकी के साये में हरियाली की हत्या: न्यू आगरा थाने में रातोंरात काट डाला गया विशाल पाकड़ वृक्ष, रात में ही ट्रैक्टर ट्रालियों से लकड़ी भी उठवा दी गई, कानून के रखवालों ने ही दिखाया सुप्रीम कोर्ट के नियमों को ठेंगा
आगरा। जब कानून के रखवाले ही कानून को तार-तार करने लगें, तो सवाल सिर्फ एक पेड़ का नहीं, पूरी व्यवस्था की नीयत पर उठता है। ताज नगरी आगरा के न्यू आगरा थाने में खाकी के संरक्षण में एक हरे-भरे, वर्षों पुराने पाकड़ के विशाल वृक्ष की बेरहमी से हत्या कर दी गई। वह भी चुपके से, अंधेरे की आड़ में, ताकि किसी को भनक तक न लगे।
यह घटना उस आगरा शहर में हुई है जो ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) के अंतर्गत आता है, जहां सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश हैं कि बिना अनुमति पेड़ों की टहनियां तक नहीं काटी जा सकतीं। लेकिन यहां तो पूरा का पूरा वृक्ष ही जड़ से खत्म कर दिया गया।

पेड़ को काटे जाने के निशान, जिसमें टूटे पत्ते दिखाई पड़ रहे हैं।
एक हफ्ते पहले लिख दी गई थी ‘हरियाली की मौत’ की पटकथा
सूत्रों के अनुसार, इस अवैध कृत्य की तैयारी करीब एक सप्ताह पहले ही कर ली गई थी। पहले पेड़ की बड़ी-बड़ी शाखाएं कटवाई गईं और फिर बीती रात छह मजदूरों को बुलाकर पूरे वृक्ष को जड़ से खत्म कर दिया गया।
रात के अंधेरे में छह मजदूरों की टीम पेड़ को टुकड़ों में काटती रही, जबकि पहले से मंगाई गई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में लकड़ी को तत्काल भरकर हटाया जाता रहा। सुबह होने तक न पेड़ बचा, न कोई निशान, जैसे वहां कभी कुछ था ही नहीं।
थाने से भी पुराना था यह दरख्त, देता था शीतल छाया
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह पाकड़ का वृक्ष थाना बनने से भी पहले का था। समय के साथ यह एक विशालकाय दरख्त बन चुका था, जो पूरे परिसर को ठंडी छाया देता था। लेकिन खाकी को यह ‘जगह घेरने वाला अवरोध’ नजर आया और उसे जड़ से मिटा दिया गया।
कानून तोड़ा, अब कौन करेगा कार्रवाई?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पुलिस ही अपराधी बन जाए, तो कार्रवाई कौन करेगा? इस पूरे मामले में वन विभाग की भूमिका अब कठघरे में है। क्या विभाग इस गंभीर पर्यावरणीय अपराध पर संज्ञान लेगा या खाकी के दबाव में आंखें मूंद लेगा?
यह सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के कानूनों और न्यायपालिका के आदेशों की खुलेआम हत्या है। जाहिर है कि देर सवेर ये मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी, एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचेगा। एक सवाल यह भी है कि वन विभाग पेड़ काटने के अपराध का केस पुलिस में ही दर्ज कराता है। यह मामला चूंकि थाने के अंदर का है, इसलिए इस अपराध का केस अगर दर्ज भी हुआ तो न्यू आगरा थाने में ही दर्ज होगा, ऐसे में सवाल उठता है कि न्यू आगरा पुलिस उस अपराध की निष्पक्ष जांच करेगी जो उसने खुद ही किया है।