दयालबाग में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा, 14 हस्तशिल्प इकाइयां और सिलाई विद्यालय बन रहे आत्मनिर्भरता का आधार
आगरा। दयालबाग में रानी साहिबा के संरक्षण और मार्गदर्शन में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 14 हस्तशिल्प इकाइयों, सिलाई विद्यालय और महिला एसोसिएशन के माध्यम से विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। महिलाओं को कौशल विकास के साथ कृषि, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सेवा में भी भागीदारी के अवसर मिल रहे हैं। रानी साहिबा के जन्मदिवस पर इन प्रयासों का उल्लेख किया जा रहा है।
दयालबाग में महिला शिक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की परंपरा कई दशकों पुरानी है। समय के साथ महिलाओं के लिए शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगारपरक कौशल विकसित करने के अवसरों का विस्तार हुआ है। विभिन्न शैक्षणिक, प्रशिक्षण और सामुदायिक गतिविधियों के माध्यम से महिलाओं को अपनी रुचि और योग्यता के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
14 हस्तशिल्प इकाइयों से कौशल विकास
दयालबाग में संचालित 14 हस्तशिल्प इकाइयां, सिलाई विद्यालय और महिला एसोसिएशन महिलाओं के कौशल विकास में भूमिका निभा रहे हैं। इन गतिविधियों में सिलाई, बुनाई, कढ़ाई और हस्तनिर्मित वस्तुओं का निर्माण शामिल है। इनके माध्यम से महिलाएं नए कौशल सीखने और अपनी कार्यक्षमता विकसित करने के अवसर प्राप्त करती हैं।
रानी साहिबा के मार्गदर्शन में इन गतिविधियों के जरिए महिलाओं में आत्मविश्वास, जिम्मेदारी की भावना और स्वावलंबन को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कृषि और सामाजिक गतिविधियों में भी भागीदारी
दयालबाग की सामूहिक कार्य संस्कृति में महिलाएं कृषि कार्यों, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और सामुदायिक सेवा में पुरुषों के साथ सक्रिय भूमिका निभाती हैं। विभिन्न सामूहिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी से नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी के विकास के अवसर मिलते हैं।
विशेष प्रशिक्षण पर भी जोर
महिलाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सशस्त्र बलों से संबंधित प्रशिक्षण जैसी पहल के माध्यम से आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इन गतिविधियों का उद्देश्य महिलाओं को नए अनुभवों और विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है।
आदरणीय रानी साहिबा के जन्मदिवस के अवसर पर महिला शिक्षा, कौशल विकास, सेवा और स्वावलंबन के लिए संचालित इन गतिविधियों का उल्लेख किया गया। महिला एसोसिएशन, हस्तशिल्प इकाइयों, सिलाई विद्यालयों और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं की प्रतिभा विकसित करने और सामाजिक भागीदारी बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।