अब  राहुल गांधी बोले,   वोट चोरी से चुने सांसद बना रहे कानून,   ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें

एसआईआर  प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर राहुल गांधी ने हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात का उदाहरण देते हुए एंटी-इंकम्बेंसी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वोट की सुरक्षा चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है और मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठना संविधान, कानून और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

Sep 24, 2026 - 18:51
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अब  राहुल गांधी बोले,   वोट चोरी से चुने सांसद बना रहे कानून,   ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें

नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। एसआईआर  प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति से जुड़ी ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारतीय राजनीति में सत्ता-विरोधी लहर का मुद्दा उठाया।

राहुल गांधी ने कहा कि वह हाल में खबरों में आई कुछ बातों पर अपनी राय रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह एक राजनीतिक परिवार से आते हैं और अपनी जिंदगी के 50 से ज्यादा साल एक राजनीतिक परिवार के बीच बिताए हैं। उनके मुताबिक, भारत में ‘एंटी-इंकम्बेंसी’ एक बुनियादी राजनीतिक ताकत है, जो तेजी से किसी भी सरकार के खिलाफ माहौल बना सकती है और किसी को भी इससे छूट नहीं मिलती।

राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने बांग्लादेश युद्ध जीता था और उस समय वह अपनी लोकप्रियता के चरम पर थीं। इसके बावजूद एक-दो साल के भीतर उन्हें जबरदस्त सत्ता-विरोधी लहर और भारी राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति में ऐसा कई नेताओं के साथ लगातार होता रहा है। राहुल गांधी के अनुसार, कांग्रेस के नेताओं को भी इसका सामना करना पड़ा है और क्षेत्रीय दलों के नेता भी सत्ता-विरोधी लहर से प्रभावित होते रहे हैं।

राहुल गांधी ने आगे कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह और बीजेपी के मामले में ऐसा क्यों नहीं होता। उन्होंने इसी संदर्भ में SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति से जुड़ी रिपोर्ट का जिक्र किया। राहुल गांधी ने कहा कि भारतीय राजनीति में सत्ता-विरोधी लहर एक सामान्य और प्रभावशाली राजनीतिक ताकत रही है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में बीजेपी को लेकर यह सवाल अलग तरीके से सामने आता है।

राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग वोट का संस्थागत संरक्षक है और उन्होंने चुनावों में कथित गड़बड़ी से जुड़े सबूत पहले ही सामने रखे हैं। राहुल गांधी ने दावा किया कि लोकसभा चुनाव 2024 और विधानसभा चुनावों में धांधली होने की पुष्टि के लिए पर्याप्त जानकारी मौजूद है। उन्होंने कहा कि जिन सवालों को वह लगातार उठाते रहे, उन्हें नजरअंदाज किया गया, जबकि देश की जनता ने उन पर भरोसा किया।

‘ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दो चुनाव आयुक्त सवाल उठा रहे हैं’राहुल गांधी बोले,  
राहुल गांधी ने कहा कि अब दो चुनाव आयुक्त भी उस व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, जिसकी जिम्मेदारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पास है। उन्होंने दावा किया कि वोटिंग सिस्टम में हुई कथित अव्यवस्था और नुकसान के लिए ज्ञानेश कुमार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार का चयन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जुड़ी प्रक्रिया के जरिए हुआ। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की।

‘वोट चोरी से कानून चोरी और फिर संस्था चोरी’
राहुल गांधी ने अपने आरोपों को एक कड़ी से जोड़ते हुए कहा कि अगर वोट की चोरी होती है तो उससे कानून की चोरी होती है और कानून की चोरी के बाद संस्थाओं की चोरी होती है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा सिलसिला है जो लगातार आगे बढ़ता है। राहुल गांधी के मुताबिक, अगर संसद में कोई सांसद कथित तौर पर चोरी किए गए वोट के आधार पर पहुंचा है, तो उसके द्वारा बनाया गया कोई भी कानून गैर-कानूनी माना जाएगा और उसके जरिए किया गया संस्थागत बदलाव भी गैर-कानूनी होगा।

राहुल गांधी ने एंटी-इंकम्बेंसी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हरियाणा में पिछले 50 वर्षों से सत्ता एक पार्टी से दूसरी पार्टी के पास जाती रही है, लेकिन अचानक वहां एंटी-इंकम्बेंसी गायब हो जाती है।
राहुल गांधी ने महाराष्ट्र का भी उदाहरण दिया और कहा कि वहां भी ऐसा ही होता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए कहा कि वहां कभी समाजवादी पार्टी तो कभी BSP की सरकार रही है, लेकिन वहां भी एंटी-इंकम्बेंसी के गायब होने का सवाल उठता है।

राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि देश एक ऐसी स्थिति में पहुंच गया है, जिसका सामना भारतीय इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। राहुल गांधी ने दावा किया कि 2024 का लोकसभा चुनाव और उसके बाद हुए विधानसभा चुनाव ‘फेक’ थे। उन्होंने आगे कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान पारित किए गए कानून अवैध हैं और संस्थाओं को संचालित करने वाले लोग भी अवैध हैं। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के दो जूनियर चुनाव आयुक्तों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने ‘बहुत अच्छा काम’ किया है।

राहुल गांधी ने कहा कि यह उनके लिए एक बुनियादी सवाल रहा है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की लोकप्रियता और सरकार के कामकाज को समझा जा सकता है, लेकिन यह समझना मुश्किल है कि एंटी-इंकम्बेंसी अचानक कैसे गायब हो जाती है। उन्होंने मध्य प्रदेश और गुजरात का भी उदाहरण दिया। राहुल गांधी ने कहा कि दुनिया में ऐसी कोई लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं है, जहां सत्ता-विरोधी भावना बिल्कुल मौजूद न हो। उन्होंने इस संदर्भ में इराक और उत्तर कोरिया का भी जिक्र किया।

राहुल गांधी ने कहा कि भारतीय संविधान को अपनी ताकत उस वोट से मिलती है, जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है। उन्होंने संविधान, कानून और संस्थाओं के बीच संबंध को एक कड़ी के तौर पर समझाते हुए कहा कि संविधान से कानून बनते हैं और कानूनों से संस्थाएं बनती हैं। उनके मुताबिक, अगर वोट ही खत्म हो गया तो संविधान की ताकत भी खत्म हो जाएगी और संविधान के कमजोर होने पर कानूनों और संस्थाओं की भूमिका पर भी असर पड़ेगा।

राहुल गांधी ने कहा कि उनके मुताबिक मौजूदा विवाद को सिर्फ वोट तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इसे हर भारतीय नागरिक के विचार, बुनियादी ढांचे और अभिव्यक्ति से जुड़ा मुद्दा बताया। राहुल गांधी ने दोहराया कि विपक्ष लगातार मतदान प्रक्रिया में समस्या होने की बात उठा रहा है और इसी वजह से SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर सवाल किए जा रहे हैं।