अधिक मास में आज यमुना छठ का पावन उत्सव: पुष्टिमार्गीय वैष्णव परंपरा में श्री यमुना जी का दिव्य महात्म्य, कृष्ण-प्रेम और आध्यात्मिक महत्व
आगरा। अधिक मास उत्सवों की श्रृंखला में शुक्रवार को यमुना छठ का पावन उत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। वैष्णव परंपरा, विशेष रूप से पुष्टिमार्गीय संप्रदाय में श्री यमुना जी को भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय सखी, प्रेम की मूर्त स्वरूप और महारानी के रूप में पूजा जाता है। मंदिरों में सुबह से ही विशेष मनोरथ, आरती, भोग-प्रसाद और भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। भक्तों ने यमुना मैया के समक्ष प्रेम, शुद्धि और कृपा की प्रार्थना की।
पुष्टिमार्ग में यमुना जी बिना अधूरी मानी जाती है ठाकुरजी की सेवा
यमुना सेवक एवं वरिष्ठ पत्रकार बृज खंडेलवाल बताते हैं कि पुष्टिमार्गीय मान्यता के अनुसार श्रीठाकुरजी की सेवा प्रारंभ करने से पहले यमुनाजी की कृपा अनिवार्य मानी जाती है। वैष्णव आचार्यों के अनुसार यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि श्रीकृष्ण प्रेम की जीवंत धारा हैं। उन्हें व्रज की लीलाओं, रास और भक्ति की आधारस्वरूप माना गया है। पुष्टिमार्ग में यमुना स्तोत्र के 41 पद अत्यंत प्रसिद्ध हैं, जिनमें यमुनाजी की महिमा का गुणगान किया गया है। इन पदों में उन्हें पापों का उद्धार करने वाली, प्रेम की पूंज और ठाकुरानी बताया गया है।
सूर्य पुत्री से व्रज की अधिष्ठात्री तक, यमुना की महिमा अपार
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यमुना सूर्य देव की पुत्री और यमराज की बहन हैं, लेकिन व्रजभूमि में उनका स्वरूप श्रीकृष्ण की प्रेमिका और अनन्य संगिनी के रूप में प्रतिष्ठित है। गर्ग संहिता सहित अनेक ग्रंथों में व्रज की पवित्रता को यमुना और गोवर्धन से जोड़ा गया है। मथुरा, वृंदावन और नाथद्वारा जैसे प्रमुख पुष्टिमार्गीय तीर्थों में यमुना मैया की विशेष सेवा और सम्मान होता है।
यमुना छठ पर मंदिरों में उमड़ी श्रद्धा
चैत्र शुक्ल षष्ठी को मनाई जाने वाली यमुना छठ को यमुना जयंती भी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन यमुना का अवतरण हुआ था। अधिक मास जैसे पुण्यकाल में यह उत्सव और अधिक फलदायी माना जाता है। मंदिरों में विशेष श्रृंगार, मनोरथ, संकीर्तन और प्रसादी वितरण जैसे कार्यक्रम रखे गये हैं। सुबह से ही श्रद्धालुओं ने यमुना तटों पर दीपदान कर यमुना मैया का आशीर्वाद प्राप्त किया।
आस्था अटूट, लेकिन प्रदूषण ने बढ़ाई चिंता
एक ओर जहां भक्तों के हृदय में यमुना मैया के प्रति अपार श्रद्धा है, वहीं दूसरी ओर यमुना नदी की वर्तमान स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में फीकल कोलीफॉर्म, बढ़ता बीओडी स्तर और जहरीले झाग की समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है। अपर्याप्त सीवेज ट्रीटमेंट, औद्योगिक कचरा और नालों का गंदा पानी लगातार यमुना को बीमार बना रहा है।
मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में भी प्रदूषण का असर साफ दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था कम नहीं हुई है। अनेक संत, सामाजिक संगठन और वैष्णव समुदाय यमुना रक्षा अभियान चलाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
यमुना रक्षा भी भक्ति का हिस्सा
वैष्णव समाज और संतों ने संदेश दिया कि केवल पूजा-अर्चना ही नहीं, बल्कि यमुना की स्वच्छता और संरक्षण भी सच्ची भक्ति का हिस्सा है। लोगों से प्लास्टिक का उपयोग कम करने, जल संरक्षण करने और यमुना स्वच्छता के लिए जागरूकता फैलाने की अपील की गई। वक्ताओं ने कहा कि जब तक यमुना मैया निर्मल नहीं होंगी, तब तक उनकी पूर्ण कृपा का अनुभव संभव नहीं है।