उग्रं वीरं महाविष्णुं...मंत्र से गूंजा समाधि पार्क: नृसिंह हवन और भंडारे संग सम्पन्न हुआ श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव
आगरा। सूर्य नगर स्थित समाधि पार्क मंदिर रविवार को वैदिक मंत्रोच्चार, हरे कृष्ण महामंत्र और नृसिंह देव के जयकारों से भक्तिमय हो उठा, जब इस्कॉन आगरा और राधा सखी ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का समापन दिव्य नृसिंह हवन, पूर्णाहुति और भंडारे के साथ सम्पन्न हुआ। “उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युर्मृत्युं नमाम्यहम्॥” मंत्र के गूंजते स्वर के बीच श्रद्धालुओं ने आहुति अर्पित कर भगवान नृसिंहदेव से धर्म रक्षा, सुख और शांति की कामना की।
अरविंद स्वरूप प्रभु के सानिध्य में सम्पन्न हुए नृसिंह हवन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। वैदिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत दिखाई दिया। श्रद्धालु हरे कृष्ण महामंत्र के संकीर्तन और जयघोष के साथ भक्ति में लीन नजर आए।
कथा व्यास सार्वभौम प्रभु ने कथा विश्राम अवसर पर कहा कि भगवान नृसिंहदेव भक्तों की रक्षा और अधर्म के विनाश के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि आज समाज में धार्मिकता तो बढ़ रही है, लेकिन वास्तविक अध्यात्म और आत्मा का चिंतन लोगों के जीवन से दूर होता जा रहा है। धर्म केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का मार्ग है। जब तक मनुष्य आत्मा का अध्ययन नहीं करेगा, तब तक जीवन में वास्तविक शांति संभव नहीं।
अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए सार्वभौम प्रभु ने बताया कि उनका जन्म सिंध, पाकिस्तान के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ, जहां बचपन से ही राधा-कृष्ण भक्ति का वातावरण मिला। आगे चलकर उन्होंने विज्ञान की शिक्षा प्राप्त की और एमबीबीएस तथा एमडी की पढ़ाई की। मेडिकल शिक्षा के दौरान उनकी मुलाकात एक अमेरिकी वैष्णव संत से हुई, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी। श्रीकृष्ण भक्ति और वैष्णव दर्शन से प्रभावित होकर उन्होंने स्वयं को भक्ति मार्ग के लिए समर्पित कर दिया।
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में मेडिकल कॉलेज से शिक्षा के दौरान उन्होंने चिकित्सा अभ्यास से अधिक शिक्षण और धर्म सभाओं को महत्व दिया। उनकी सभाएं इतनी प्रभावशाली होने लगीं कि मुस्लिम समुदाय के लोग भी श्रीकृष्ण भक्ति की ओर आकर्षित होने लगे। इससे पाकिस्तान सरकार और एजेंसियों की निगाह उन पर पड़ गई। बाद में इस्कॉन के माध्यम से उन्हें भारत भेजा गया।
सार्वभौम प्रभु ने कहा कि पिछले लगभग 50 वर्षों से वे भारत सहित विभिन्न देशों में श्रीकृष्ण भक्ति और अध्यात्म का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। 75 वर्ष की आयु में व्हीलचेयर पर रहने के बावजूद उनका जीवन पूरी तरह श्रीकृष्ण सेवा को समर्पित है। उन्होंने कहा कि विदेशों में आध्यात्मिक जिज्ञासा अधिक दिखाई देती है, जबकि भारत में लोग धीरे-धीरे अपनी सनातन जड़ों से दूर होते जा रहे हैं।
उन्होंने आधुनिक शिक्षा और पाश्चात्य प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज हम बच्चों को अंग्रेजी शिक्षा तो दिला रहे हैं, लेकिन संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा से दूर कर रहे हैं। अंग्रेज भारत छोड़ गए, लेकिन मानसिक गुलामी आज भी हमारे भीतर मौजूद है। मुगल शासन समाप्त हो गया, किंतु उसका प्रभाव और भय मानसिकता में अब भी कहीं न कहीं दिखाई देता है।
समापन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम में राधा सखी ग्रुप की संस्थापिका अशु मित्तल, अदिति गौरंगी, मोनिका अग्रवाल, रीता खन्ना, लवली कथूरिया, संजीव मित्तल, रेनू भगत, मीनाक्षी मोहन, ज्योति, रेशमा मगन, रेनू लांबा, तनुजा मांगलिक, डॉ अपर्णा पोद्दार, डॉ परिणीता बंसल, शिखा सिंघल सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।