संजय प्लेस में दुकानों के सामने खुलेआम दारूबाजी, गंदगी और अतिक्रमण से व्यापार करना दूभर; पुलिस चौकी के सामने ही बिगड़ रही कानून-व्यवस्था, व्यापारी किससे करें फरियाद?
आगरा। शहर के सबसे व्यस्त व्यावसायिक केंद्र संजय प्लेस में शाम ढलते ही अराजकता का माहौल बन जाता है। दुकानों के सामने खुलेआम शराब पीने वालों के जमावड़े, सड़कों और दुकानों के आसपास खुले में पेशाब करने, बेतरतीब पार्किंग तथा फुटपाथों पर अतिक्रमण ने व्यापारियों और यहां आने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। संजय प्लेस पुलिस चौकी के आसपास ही ऐसी गतिविधियां होने पर व्यापारी नेता विनय अग्रवाल ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि यदि शहर के इतने महत्वपूर्ण व्यावसायिक केंद्र में कोई वारदात हो जाती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

संजय प्लेस के एक मार्केट की दीवार, जिसे लोगों ने पेशाबघर बना रखा है।
व्यापारियों का कहना है कि दुकानों के सामने कुछ लोग झुंड बनाकर शराब पीते हैं। कई बार लोग दुकानों के सामने ही पेशाब करने लगते हैं। मना करने पर वे उलटे लड़ने पर आमादा हो जाते हैं। इससे दुकानदारों को ग्राहकों के सामने असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। शाम के समय संजय प्लेस का माहौल ऐसा हो जाता है कि परिवार के साथ आने वाले ग्राहक भी यहां आने से कतराने लगते हैं।
पुलिस चौकी, फिर भी नहीं सुधरी व्यवस्था
व्यापारी नेता विनय अग्रवाल का कहना है कि जब संजय प्लेस में पुलिस चौकी स्थापित की गई थी, तब व्यापारियों को उम्मीद थी कि इससे सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बेहतर होगी। व्यापारियों ने पुलिस चौकी के लिए भवन तक बनवाया, लेकिन अब उसी चौकी के आसपास अव्यवस्थाएं दिखाई दे रही हैं। दुकानों के सामने खुलेआम दारूबाजी और सार्वजनिक स्थानों पर अशोभनीय गतिविधियां हो रही हैं। सवाल यह है कि क्या पुलिस की इच्छा शक्ति हो तो ऐसी गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई जा सकती?

संजय प्लेस के एक ब्लॊक में अस्त-व्यस्त पार्किंग।
फुटपाथों पर कब्जा, पार्किंग की जगह भी घिरी
संजय प्लेस में अतिक्रमण की समस्या भी गंभीर है। फुटपाथों पर स्ट्रीट वेंडर्स का कब्जा है। कई स्थानों पर फुटपाथ के साथ-साथ पार्किंग की जगहों पर भी कब्जा करके ग्राहकों के बैठने की व्यवस्था कर ली गई है। इससे पैदल चलने वालों के लिए रास्ता नहीं बचता। वाहन चालकों को भी परेशानी होती है और बाजार में यातायात का दबाव बढ़ने पर जाम की स्थिति बन जाती है।
पार्किंग व्यवस्था को लेकर भी व्यापारियों और ग्राहकों की शिकायतें पुरानी हैं। निर्धारित पार्किंग स्थलों के बावजूद सड़कों पर बेतरतीब वाहन खड़े होने से आवागमन बाधित होता है। पार्किंग शुल्क और व्यवस्था को लेकर पहले भी व्यापारी विरोध जता चुके हैं। ऐसे में संजय प्लेस में सुव्यवस्थित पार्किंग की समस्या अब तक पूरी तरह हल नहीं हो सकी है।

शौचालयों पर ताले, खुले में पेशाब से दुर्गंध
सार्वजनिक शौचालयों पर ताले पड़े होने से भी बड़ी समस्या पैदा हो रही है। महिलाओं के लिए पर्याप्त सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध नहीं होने और पुरुष शौचालयों की खराब स्थिति की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। शौचालयों का उपयोग नहीं कर पाने के कारण लोग खुले में पेशाब करते हैं। इससे दुकानों के आसपास और रास्तों पर दुर्गंध फैलती है। व्यापारियों और ग्राहकों को इन स्थानों से गुजरना तक मुश्किल हो जाता है।
अंधेरे, जलभराव और बदहाल सड़कों की भी शिकायतें
संजय प्लेस की समस्याएं केवल दारूबाजी और अतिक्रमण तक सीमित नहीं हैं। बाजार के कुछ हिस्सों में खराब स्ट्रीट लाइट, सड़क और फुटपाथों की बदहाल स्थिति तथा जलभराव की शिकायतें भी पहले उठ चुकी हैं। कुछ भवनों की जर्जर हालत को लेकर भी हादसों की आशंका जताई जाती रही है। इन समस्याओं का सीधा असर बाजार की छवि, व्यापारियों के कारोबार और ग्राहकों की सुविधाओं पर पड़ता है।
दीवाली पर भी पुलिस की अनदेखी का आरोप
विनय अग्रवाल ने कहा कि दीवाली जैसे बड़े त्योहार पर भी संजय प्लेस चौकी के पुलिसकर्मी यहां की व्यवस्थाएं बिगाड़ने वालों के प्रति आंखें मूंदे हुए हैं। जब पुलिस ही इस तरह का रवैया अपनाएगी तो अराजकता बढ़ना स्वाभाविक है। संजय प्लेस शहर का प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है, जहां बड़ी संख्या में व्यापारी, कर्मचारी और ग्राहक रोजाना पहुंचते हैं। ऐसे स्थान पर सुरक्षा, सफाई, पार्किंग और सार्वजनिक सुविधाओं की जिम्मेदारी से पुलिस और नगर निगम दोनों बच नहीं सकते।
व्यापारियों का सवाल है कि संजय प्लेस की बदहाल होती छवि को सुधारने के लिए आखिर जिम्मेदार विभाग कब गंभीर होंगे? पुलिस को खुले में शराब पीने और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ नियमित कार्रवाई करनी चाहिए। नगर निगम को फुटपाथ और पार्किंग स्थलों से अतिक्रमण हटाकर सार्वजनिक शौचालयों को चालू कराना चाहिए। केवल अभियान चलाने और आश्वासन देने से समस्या हल नहीं होगी। संजय प्लेस को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए स्थायी कार्रवाई जरूरी है।