एसएन में दूसरी बार सफल किडनी ट्रांसप्लांट, पिता ने बेटे को दिया जीवनदान, दोनों स्वस्थ
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में 10 अक्टूबर 2026 को दूसरा सफल किडनी प्रत्यारोपण किया गया। 24 वर्षीय दीपक को उनके पिता राजवीर ने किडनी दान की। प्रत्यारोपण के बाद पिता और पुत्र दोनों स्वस्थ हैं और नई किडनी बेहतर ढंग से काम कर रही है। प्राचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने इस उपलब्धि पर मेडिकल टीम को बधाई दी। सर्जरी में नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, एनेस्थीसिया और नर्सिंग विभाग की टीमों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
24 वर्षीय दीपक को पिता राजवीर ने दान की किडनी, डॉ. प्रशांत गुप्ता ने मेडिकल टीम को दी बधाई, नई किडनी सामान्य रूप से कर रही काम
आगरा, 11 अक्टूबर 2026। एसएन मेडिकल कॉलेज (SNMC), आगरा ने अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कॉलेज में 10 अक्टूबर को दूसरा सफल किडनी प्रत्यारोपण किया गया। इस जटिल सर्जरी में 24 वर्षीय दीपक को उनके पिता राजवीर ने अपनी किडनी दान की। प्रत्यारोपण के बाद पिता और पुत्र दोनों की स्थिति पूरी तरह स्वस्थ बताई गई है। चिकित्सकों के अनुसार, प्रत्यारोपित किडनी यानी ग्राफ्ट भी बेहतर ढंग से कार्य कर रही है।
एसएन मेडिकल कॉलेज की इस उपलब्धि को संस्थान में सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस सफल प्रत्यारोपण में नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, एनेस्थीसिया और नर्सिंग विभाग की टीमों ने समन्वय के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई। कॉलेज प्रशासन ने पूरी टीम के प्रयासों की सराहना की है।
प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने टीम को दी बधाई
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने दूसरे सफल किडनी प्रत्यारोपण पर पूरी मेडिकल टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि संस्थान के लिए यह अत्यंत गौरव का क्षण है। प्रत्यारोपण की सफलता में नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल के यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. हेमंत गोयल के मार्गदर्शन और एसएन मेडिकल कॉलेज की टीम के उत्कृष्ट प्रयासों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। डॉ. गुप्ता ने कहा कि एसएन मेडिकल कॉलेज आम जनता को सुलभ, किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली सुपर-स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। संस्थान का प्रयास है कि गंभीर बीमारियों के उपचार और जटिल चिकित्सा प्रक्रियाओं के लिए मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों और उन्हें इलाज के लिए अन्य बड़े शहरों पर निर्भरता कम करनी पड़े।
पिता ने किडनी दान कर बेटे को दिया जीवनदान
इस प्रत्यारोपण की सबसे महत्वपूर्ण बात पिता और पुत्र के बीच का भावनात्मक रिश्ता रहा। 24 वर्षीय दीपक को उनके पिता राजवीर ने स्वेच्छा से अपनी किडनी दान की। चिकित्सकीय जानकारी के अनुसार, दोनों के बीच ABO-compatible प्रत्यारोपण किया गया, यानी रक्त समूह की अनुकूलता के आधार पर किडनी प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी की गई।
सर्जरी के बाद डोनर राजवीर और किडनी प्राप्त करने वाले दीपक, दोनों की स्थिति स्वस्थ बताई गई है। प्रत्यारोपित किडनी के बेहतर ढंग से कार्य करने से उपचार से जुड़ी टीम को भी राहत मिली है। अंगदान के इस उदाहरण ने परिवार के सहयोग और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के महत्व को रेखांकित किया है।
चार प्रमुख टीमों ने मिलकर पूरा किया जटिल ऑपरेशन
किडनी प्रत्यारोपण जैसी जटिल प्रक्रिया में सर्जरी के साथ-साथ मरीज की किडनी की कार्यक्षमता, एनेस्थीसिया, ऑपरेशन के दौरान निगरानी और प्रत्यारोपण के बाद की देखभाल बेहद महत्वपूर्ण होती है। एसएन मेडिकल कॉलेज में इस प्रक्रिया को विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम ने सफलतापूर्वक पूरा किया।
ट्रांसप्लांट नेफ्रोलॉजी टीम: डॉ. अपूर्व जैन, डॉ. मुदित खुराना, डॉ. कैरवी भारद्वाज और नेफ्रोलॉजी विभाग के सभी सीनियर रेजिडेंट्स ने प्रत्यारोपण से संबंधित चिकित्सा प्रक्रिया में योगदान दिया।
ट्रांसप्लांट यूरोलॉजी टीम: डॉ. प्रशांत लवानिया, लीड ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. अभिषेक पाठक, डॉ. विजय त्यागी, डॉ. अंकुश गुप्ता, डॉ. प्रदीप देब और यूरोलॉजी विभाग के जूनियर रेजिडेंट्स ने सर्जिकल प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया टीम: प्रोफेसर डॉ. अपूर्व मित्तल, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमृता गुप्ता, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रवीण पांडे, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रभा और एनेस्थीसिया टीम के जूनियर रेजिडेंट्स ने ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया एवं मरीज की निगरानी से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं।
समन्वय और नर्सिंग टीम: ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर प्रदीप त्यागी, केटीयू (KTU) नर्सिंग टीम, ऑपरेशन थिएटर (OT) नर्सिंग इंचार्ज और उनकी पूरी टीम ने प्रत्यारोपण की प्रक्रिया में समन्वय और आवश्यक सहयोग प्रदान किया।
सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं के विस्तार की दिशा में कदम
एसएन मेडिकल कॉलेज में दूसरी बार सफल किडनी प्रत्यारोपण होना संस्थान की चिकित्सा क्षमताओं के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। किडनी प्रत्यारोपण के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता होती है। इस सफलता से कॉलेज में जटिल चिकित्सा प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने के प्रयासों को बल मिला है। संस्थान का लक्ष्य आम लोगों को किफायती और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है। पिता द्वारा बेटे को किडनी दान करने का यह मामला चिकित्सा उपलब्धि के साथ-साथ पारिवारिक सहयोग और अंगदान के महत्व को भी सामने लाता है।