शाहजहांपुर में कथित पत्रकार ने युवक को दी टावर पर चढ़कर कूदने की सलाह, पिता के खुलासे पर पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज किया
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में एक कथित मीडिया कर्मी की गैरजिम्मेदार और खतरनाक हरकत ने सनसनी फैला दी है। एक युवक को कथित पुलिस प्रताड़ना से बचने के लिए मोबाइल टावर पर चढ़ने और मांगें न माने जाने पर कूदकर जान देने की सलाह देने के आरोप में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
-राजीव शर्मा-
शाहजहांपुर। थाना अल्लाहगंज क्षेत्र के रामनगर गांव निवासी सत्यम शनिवार को अचानक एक मोबाइल टावर पर चढ़ गया। उसने आरोप लगाया कि पुलिस उसे प्रताड़ित कर रही है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद समझा-बुझाकर उसे सुरक्षित नीचे उतार लिया गया।
पिता का खुलासा: ‘पत्रकार’ ने दी खतरनाक स्क्रिप्ट
मामले ने उस वक्त गंभीर मोड़ लिया जब पूछताछ में सत्यम के पिता रामनरेश ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उनका छोटा बेटा सुंदरम एक लड़की को भगा ले गया था, जिसके चलते पुलिस परिवार से पूछताछ कर रही थी। इसी बीच ब्रह्मगोटिया गांव निवासी अनुज अग्निहोत्री सत्यम से मिला और खुद को एक प्रमुख अखबार का पत्रकार बताते हुए उसे उकसाया।
आरोप है कि अनुज ने सत्यम को सलाह दी कि टावर पर चढ़ जाओ, पुलिस पर प्रताड़ना का आरोप लगाओ और अगर बात न माने तो कूद जाना।
पुलिस कार्रवाई: आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज
अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) दिक्षा भवरे ने बताया कि आरोपी अनुज अग्निहोत्री के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है।
पुराना मामला भी चर्चा में: ‘आग कांड’ की याद ताजा
इस घटना ने वर्ष 2024 के उस सनसनीखेज मामले की भी याद ताजा कर दी, जब पुलिस अधीक्षक कार्यालय में घुसकर ताहिर नामक व्यक्ति ने पेट्रोल छिड़ककर खुद को आग लगा ली थी।
उस समय तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गहन जांच कराई थी, जिसमें कई कथित पत्रकारों की भूमिका सामने आने पर उन्हें जेल भेजा गया था, हालांकि मुख्य आरोपी सिफारिश के चलते बच निकला था।
गंभीर सवाल: ये कैसी पत्रकारिता?
ताजा घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कुछ लोग ‘पत्रकार’ की आड़ में खतरनाक खेल खेल रहे हैं? एक युवक को आत्महत्या जैसे कदम के लिए उकसाना न केवल आपराधिक है, बल्कि समाज और मीडिया की साख पर भी गहरा दाग है।