....तो क्या नगर निगम सदन में उस दिन उपद्रव की तैयारी थी, वे युवक कौन थे और उन्हें कौन लाया, जो सदन के अंदर घुसे और बैठे भी, सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गये इन बाहरी युवाओं के चेहरे, नगर निगम प्रशासन ने थाना हरीपर्वत में दर्ज कराई एफआईआर
आगरा। नगर निगम आगरा की 23 मार्च को हुई सदन बैठक को लेकर अब एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। बैठक के दौरान 10 से 15 संदिग्ध युवकों ने केवल सदन के अंदर एंट्री बल्कि वे सदन के अंदर बैठे भी। इन अज्ञात चेहरों की सदन में एंट्री को लेकर नगर निगम का प्रशासनिक तंत्र अलर्ट हो गया है। शुरुआती तौर पर यह आशंका जताई जा रही है कि इन लोगों को सुनियोजित तरीके से सदन में उपद्रव फैलाने के इरादे से लाया गया था। इस मामले में नगर निगम की ओर से थाना हरीपर्वत में रिपोर्ट भी दर्ज करा दी गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

ज्ञातव्य है कि मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाह ने दो दिन पहले नगर निगम सदन की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में कोई भी अधिकारी मौजूद नहीं था। अब दो दिन सदन के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों से यह बात सामने आई है कि सदन में उस दिन बाहरी लोग मौजूद थे। सदन की बैठक के दौरान मौजूद ये संदिग्ध लोग किसी भी अधिकृत सूची में शामिल नहीं थे। इनकी गतिविधियां भी सामान्य नहीं थीं, जिससे यह संदेह गहरा रहा है कि ये लोग किसी बड़े हंगामे की तैयारी के तहत वहां पहुंचे थे।
सीसीटीवी फुटेज में कैद हुए कई चेहरे
घटना के बाद नगर निगम प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए बैठक स्थल और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि कई संदिग्ध चेहरों को चिह्नित कर लिया गया है और उनकी पहचान की प्रक्रिया जारी है।
सूत्रों के मुताबिक, इन संदिग्धों के पास हथियार होने की भी आशंका जताई जा रही है। हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस इस पहलू को भी गंभीरता से जांच के दायरे में ले रही हैं। सूत्रों का कहना है कि यदि उस दिन सदन में अधिकारी रहे होते, तो संभवतः उनके साथ किसी प्रकार की अप्रिय घटना भी हो सकती थी। अधिकारिक सूत्रों ने इस बात से इंकार नहीं किया है कि उस दिन सदन में अधिकारियों की मौजूदगी रहने पर उन पर स्याही फेंकने अथवा धक्का-मुक्की जैसी घटना हो सकती थी।
थाना हरी पर्वत में तहरीर, पुलिस जांच में जुटी
इस मामले में सहायक अभियंता जीवेक की ओर से थाना हरीपर्वत में तहरीर दी गई है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर जांच शुरू कर दी है और संदिग्धों की भूमिका को लेकर पड़ताल जारी है।
यह पहली मर्तबा नहीं है। इससे पहले नगर निगम परिसर से एक सहायक अभियंता को बलात उठाकर ले जाया गया था। यही नहीं, पिछले दिनों एक सहायक नगर आयुक्त को सार्वजनिक स्थान पर थप्पड़ मार दिया गया था। उस घटना को लेकर नगर निगम के कर्मचारियों ने हड़ताल भी शुरू कर दी थी, लेकिन बाद में किसी तरह कर्मचारियों को समझा बुझाकर काम पर लौटाया गया था। यही नहीं, नगर निगम के वाहन प्रभारी को भी हथियार की नोक पर धमकाया जा चुका है।
घटना के बाद नगर निगम प्रशासन सतर्क हो गया है और नगर निगम की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े इंतजाम करने की तैयारी है। फिलहाल पूरे मामले की जांच तेज कर दी गई है और जल्द ही इस साजिश से जुड़े कई अहम खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
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