हरित क्रांति की ओर कदम — बलवंत विद्यापीठ रूरल इंस्टीट्यूट में सोलर ऊर्जा परियोजना शुरू, बिचपुरी बनेगा ग्रीन कैंपस

आगरा। बिचपुरी स्थित बलवंत विद्यापीठ रूरल इंस्टीट्यूट में आज ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए RESCO मॉडल के अंतर्गत आधुनिक सोलर पैनल स्थापना कार्य की औपचारिक शुरुआत की गई। यह परियोजना संस्थान को ग्रीन कैंपस के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

May 25, 2026 - 20:14
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हरित क्रांति की ओर कदम — बलवंत विद्यापीठ रूरल इंस्टीट्यूट में सोलर ऊर्जा परियोजना शुरू, बिचपुरी बनेगा ग्रीन कैंपस
बलवंत विद्यापीठ रूरल इंस्टीट्यूट बिचपुरी में स्थापित किये जा रहे आधुनिक सोलर पैनल।

संस्थान की प्राचार्या प्रोफेसर सीमा भदौरिया ने बताया कि इस परियोजना को सफल बनाने में बलवंत एजुकेशन सोसाइटी, उत्तर प्रदेश न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी तथा Top of Formइंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी का मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त हुआ है।

सोलर ऊर्जा से आत्मनिर्भरता की दिशा

परियोजना पूर्ण होने के बाद संस्थान में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा, जिससे बिजली व्यय में उल्लेखनीय कमी आएगी। साथ ही विद्यार्थियों को रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण और शोध के नए अवसर प्राप्त होंगे।

संस्थान प्रशासन के अनुसार RESCO मॉडल के तहत सोलर कंपनी स्वयं स्थापना, संचालन और रखरखाव करेगी, जिससे संस्थान को बिना किसी प्रारंभिक बड़े निवेश के आधुनिक सौर ऊर्जा सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

RESCO मॉडल क्या है

RESCO मॉडल (रिन्यूएबल एनर्जी सर्विस कंपनी मॉडल) में सोलर कंपनी पूरी प्रणाली का निवेश, स्थापना और संचालन करती है। संस्थान केवल उपयोग की गई बिजली का भुगतान करता है।

इस मॉडल के तहत शून्य प्रारंभिक निवेश होता है। प्रति यूनिट सस्ती बिजली दर, लंबी अवधि का पावर परचेज एग्रीमेंट (15–25 वर्ष), संचालन और रखरखाव पूरी तरह कंपनी द्वारा किया जाता है।

ग्रामीण शिक्षा और ग्रीन तकनीक का संगम

बलवंत विद्यापीठ रूरल इंस्टीट्यूट लंबे समय से ग्रामीण शिक्षा, कौशल विकास और सहकारिता के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। अब यह सोलर परियोजना संस्थान को स्मार्ट और सस्टेनेबल ग्रामीण शिक्षा मॉडल के रूप में नई पहचान देगी।

बलवंत एजुकेशन सोसाइटी के सचिव युवराज अम्बरीश पाल ने इसे आत्मनिर्भर भारत, ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायक पहल बताया। संस्थागत सामाजिक दायित्व के इंचार्ज प्रोफेसर पी. के. सिंह ने बताया कि इस मॉडल से बिजली लागत में 30 से 60 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना है, साथ ही कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय गिरावट होगी।

गांवों तक पहुंचेगा सौर ज्ञान

उन्नत भारत अभियान के समन्वयक प्रोफेसर आशुतोष भंडारी ने बताया कि संस्थान द्वारा गोद लिए गए पांच गांवों में भी इस सौर ऊर्जा तकनीक की जानकारी और प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे ग्रामीण स्तर पर भी जागरूकता और कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा।

इस अवसर पर प्रोफेसर सूरजमुखी, डॉ. शिखा गर्ग, संजय, महेंद्र सिंह, लक्ष्मी सिंह सहित समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।

SP_Singh AURGURU Editor