अबार्शन पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिपप्णी, महिला को उसकी मर्जी के बिना मां बनने के लिए मजबूर नहीं कर सकते

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके लिए भी अबॉर्शन की इजाजत देना बहुत मुश्किल है, लेकिन नाबालिग खुद ही गर्भावस्था को जारी नहीं रखना चाहती।

Feb 6, 2026 - 17:37
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अबार्शन पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिपप्णी, महिला को उसकी मर्जी के बिना मां बनने के लिए मजबूर नहीं कर सकते

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (6 फरवरी, 2026) को एक ऐतिहासिक फैसले में महिला के प्रजनन संबंधी अधिकारों और उसकी स्वायत्तता को सर्वोपरी माना है। कोर्ट ने एक नाबालिग को 30 हफ्तों की गर्भावस्था को चिकित्सीय रूप से समाप्त करने की इजाजत देते हुए कहा कि वह किसी महिला, खासकर नाबालिग को उसकी मर्जी के बिना उसे मां बनने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है। 

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जवल भुइंया की बेंच मामले पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि नाबालिग की प्रजनन स्वायत्तता को महत्व दिया जाना चाहिए। खासतौर पर तब जब वह गर्भावस्था को जारी रखने के लिए अनिच्छा जता चुकी है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस मसले पर विचार किया जाना चाहिए कि नाबालिग गर्भावस्था जारी रखना चाहती है या नहीं, वैसे भी यह अवैध है क्योंकि वह खुद नाबालिग है। रिलेशनशिप के दौरान वह प्रेग्नेंट हुई है। 

कोर्ट ने यह भी कहा कि मुद्दा ये नहीं है कि वह रेप की वजह से प्रेग्नेंट हुई है या सहमति से संबंध बनाने की वजह से, मुद्दा ये है कि वह क्या चाहती है। नाबालिग के वकील ने तर्क दिया कि अवैध बच्चे को जन्म देने से सामाजिक कलंक के कारण उसे गहरा मानसिक आघात पहुंचेगा। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर सहमति जताई और कहा कि दूसरा बच्चे की मां खुद उसको जन्म देना नहीं चाहती है। कोर्ट ने कहा कि वह किसी महिला को और विशेषरूप से एक नाबालिग को प्रेग्नेंसी को जारी रखने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है, अगर वह खुद ही नहीं चाहती है तो।

कोर्ट ने नाबालिग को चिकित्सीय रूप से गर्भ गिराने की इजाजत दे दी और मुंबई के जेजे हॉस्पिटल को यह जिम्मेदारी सौंपी है। कोर्ट ने हॉस्पिटल को निर्देश दिया कि वह ध्यान दे कि प्रक्रिया चिकित्सा उपायों के तहत हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि उनके लिए भी ऐसा आदेश देना बहुत मुश्किल है। 

जस्टिस नागरत्ना ने कहा, 'हमारे लिए भी यह मुश्किल है, लेकिन हम क्या करें? क्योंकि जो बच्चा जन्म लेगा, वो भी तो अंतत: एक जिंदगी है। फिर एक सवाल ये भी है कि अगर नाबालिग 24 हफ्ते में गर्भ गिरा सकती है तो 30 हफ्तों में क्यों नहीं लेकिन वह खुद ही प्रेग्नेंसी को जारी नहीं रखना चाहती है, असल बात ये है कि वो बच्चे को नहीं देना चाहती, यही समस्या है।'