सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी: ऑनलाइन टिकट लेने वालों को बीमा और काउंटर टिकट लेने वालों को नहीं- यात्रियों के बीच ऐसा भेदभाव अस्वीकार्य, रेलवे की धीमी कार्यप्रणाली पर भी जताई कड़ी नाराज़गी

रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों को बीमा सुविधा देना और काउंटर से टिकट लेने वालों को उससे वंचित रखना भेदभावपूर्ण है। अदालत ने कहा कि टिकट खरीदने के तरीके के आधार पर यात्रियों के बीच ऐसा अंतर स्वीकार्य नहीं हो सकता। साथ ही अदालत ने रेलवे के कामकाज की धीमी प्रगति पर भी नाराजगी जताई।

Mar 12, 2026 - 22:01
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सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी: ऑनलाइन टिकट लेने वालों को बीमा और काउंटर टिकट लेने वालों को नहीं- यात्रियों के बीच ऐसा भेदभाव अस्वीकार्य, रेलवे की धीमी कार्यप्रणाली पर भी जताई कड़ी नाराज़गी

नई दिल्ली। रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रेलवे की नीतियों पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों को बीमा सुविधा देना और काउंटर से टिकट लेने वाले यात्रियों को इस सुविधा से वंचित रखना भेदभावपूर्ण है और यह स्वीकार्य नहीं है।

यह टिप्पणी विविध आवेदन संख्या 741-742/2019 (सिविल अपील संख्या 1265-1266/2019) की सुनवाई के दौरान की गई। यह मामला भारत संघ बनाम राधा यादव से संबंधित है।

दो जजों की पीठ ने की सुनवाई

मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और माननीय न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान भारत संघ की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी उपस्थित हुए, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता शिखिल सूरी एमिकस क्यूरी के रूप में अदालत की सहायता कर रहे थे।

रेलवे सुरक्षा पर सुझाव देने को कहा

मुख्य मुद्दे पर आने से पहले अदालत ने अदालत में मौजूद भारतीय रेल के मुख्य रेल सुरक्षा आयुक्त जनक कुमार गर्ग से पूछा कि आम नागरिकों की सुरक्षित रेल यात्रा सुनिश्चित करने के लिए कौन-कौन से व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं।

इस पर श्री गर्ग ने बताया कि सबसे महत्वपूर्ण कदम रेलवे पटरियों की फेंसिंग (घेराबंदी) है। उन्होंने कहा कि लोग और पशु अक्सर अनजाने में रेलवे पटरियों पर आ जाते हैं, जिससे कई गंभीर दुर्घटनाएं होती हैं। यदि पटरियों की घेराबंदी की जाए तो ऐसी घटनाओं में काफी कमी लाई जा सकती है।

उन्होंने बताया कि अभी तक 15,000 किलोमीटर से अधिक रेलवे ट्रैक की फेंसिंग की जा चुकी है और रेलवे का लक्ष्य अगले 3 से 4 वर्षों में पूरे रेलवे नेटवर्क की फेंसिंग का कार्य पूरा करने का है।

फुट ओवर ब्रिज और लिफ्ट की आवश्यकता

मुख्य रेल सुरक्षा आयुक्त ने अदालत को यह भी बताया कि देश के कई व्यस्त रेलवे स्टेशनों पर यात्री प्लेटफॉर्म बदलने के लिए सीधे पटरियों को पार कर जाते हैं, जो अत्यंत खतरनाक है और अनेक दुर्घटनाओं का कारण बनता है।

इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि व्यस्त स्टेशनों पर फुट ओवर ब्रिज बनाए जाएं। यात्रियों की अधिक आवाजाही वाले स्टेशनों को प्राथमिकता दी जाए। वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा के लिए लिफ्ट की व्यवस्था की जाए। दिव्यांगजनों के लिए रैंप बनाए जाएं। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने अदालत को आश्वासन दिया कि इन सुझावों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।

रेलवे के खर्च और प्राथमिकताओं पर सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने रेलवे के बजट आवंटन और निवेश की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि पिछली सुनवाई में भी यह महसूस हुआ था कि रेलवे द्वारा धन का आवंटन उचित विचार के साथ नहीं किया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि हाल ही में दाखिल किए गए हलफनामे में दिए गए आंकड़े स्पष्ट नहीं हैं और उन्हें समझना काफी कठिन है। अदालत ने टिप्पणी की कि प्रस्तुत किए गए आंकड़ों को समझने के लिए प्रयास करने के बावजूद स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।

रेलवे के रवैये पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी

अदालत ने इस पूरे मामले के संचालन को लेकर रेलवे के रवैये पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। पीठ ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारियों ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को भी उचित जानकारी और सहयोग उपलब्ध नहीं कराया। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रस्तुत किए जा रहे तथ्यों को केवल उसी रूप में दिखाने का प्रयास किया जा रहा है जैसा रेलवे दिखाना चाहता है, जबकि अदालत का उद्देश्य सामान्य जनता के हित को सुनिश्चित करना है।

ऑनलाइन टिकट पर बीमा, काउंटर टिकट पर नहीं- कोर्ट की आपत्ति

सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने अदालत को बताया कि ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों को बहुत कम अतिरिक्त शुल्क पर बीमा योजना का लाभ मिलता है, जबकि काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्रियों को यह सुविधा नहीं मिलती।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा- यात्रियों के बीच यह भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। पीठ ने कहा कि टिकट खरीदने का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन सुविधा देने में भेदभाव नहीं किया जा सकता। एक वर्ग को बीमा देना और दूसरे वर्ग को उससे वंचित रखना संवैधानिक दृष्टि से उचित नहीं है।

तकनीक का उपयोग कर समाधान निकालने का निर्देश

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि रेलवे इस विषय पर विचार कर रहा है कि काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्रियों की पहचान किस प्रकार सुनिश्चित की जाए, ताकि बीमा प्रमाणपत्र जारी करने और दावों के समय किसी प्रकार का दुरुपयोग न हो।

इस पर अदालत ने कहा कि दुरुपयोग की संभावना को देखते हुए समाधान निकालना जरूरी है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि यात्रियों के एक वर्ग को सुविधा से वंचित कर दिया जाए।

कोर्ट ने कहा कि आज के आधुनिक युग में उपलब्ध तकनीक का उपयोग करके टिकट काउंटरों पर भी यात्रियों की पहचान दर्ज की जा सकती है।

प्रगति नहीं होने पर जताई चिंता

अदालत ने कहा कि अब तक की कार्यवाही और रिकॉर्ड से यह प्रतीत होता है कि जमीनी स्तर पर कोई विशेष प्रगति नहीं हुई है। रेलवे केवल सामान्य कार्य कर रहा है और वह भी बहुत धीमी गति से।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया कि यदि अगली सुनवाई पर उचित तथ्य, स्पष्ट आंकड़े और ठोस प्रगति प्रस्तुत नहीं की गई, तो अदालत कड़े आदेश पारित करने के लिए बाध्य हो सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय स्वयं किसी व्यवस्था के माध्यम से जमीनी स्थिति का आकलन करा सकता है।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के अनुरोध पर अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल 2026 को दोपहर 2 बजे निर्धारित की है।

SP_Singh AURGURU Editor