कर्मचारी भविष्य निधि के मामले में तीन हफ्ते की मोहलत: अब नहीं संभले तो उद्यमियों पर गिरेगी जुर्माने की गाज

-आरके सिंह- बरेली। निजी क्षेत्र के उद्यमियों के लिए अब आखिरी चेतावनी जारी हो चुकी है। कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) में कर्मचारियों का पंजीकरण कराने के लिए चल रहे एम्पलाई एनरोलमेंट कैंपेन 2025 की समयसीमा समाप्त होने में मात्र तीन सप्ताह शेष हैं। 30 अप्रैल 2026 के बाद नियमों की अनदेखी करने वाले उद्योगों, कारखानों और संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है, जिसमें भारी जुर्माना और ब्याज दोनों शामिल होंगे।

Apr 10, 2026 - 13:30
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कर्मचारी भविष्य निधि के मामले में तीन हफ्ते की मोहलत: अब नहीं संभले तो उद्यमियों पर गिरेगी जुर्माने की गाज

केंद्र सरकार द्वारा संचालित कर्मचारी भविष्य निधि योजना निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के आर्थिक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करती है। इस योजना के तहत कर्मचारी के वेतन का 12 प्रतिशत अंश काटा जाता है और उतना ही योगदान नियोक्ता द्वारा जमा किया जाता है, जिससे भविष्य में आपात स्थिति, नौकरी छूटने या अन्य जरूरतों के समय वित्तीय सहारा मिलता है।

सरकार की इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) करता है। बरेली में बड़ी संख्या में उद्यमी अब भी कर्मचारियों का पंजीकरण नहीं करा रहे हैं, जो सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है।

सरकार का सख्त रुख, फिर भी दिया आखिरी मौका

इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 1 नवंबर 2025 से एम्पलाई एनरोलमेंट कैंपेन 2025 शुरू किया। इस विशेष अभियान के तहत 1 जुलाई 2017 से 31 अक्टूबर 2025 के बीच कार्यरत ऐसे कर्मचारी, जिनका ईपीएफ में पंजीकरण नहीं हुआ, उन्हें बिना किसी दंड के शामिल करने का अवसर दिया गया है।

इस योजना की सबसे बड़ी राहत यह है कि उद्यमी को भारी जुर्माना और ब्याज से छूट मिलेगी। केवल नियोक्ता का अंश जमा करना होगा।  कर्मचारी के हिस्से की राशि जमा करने से भी छूट दी जाएगी।

30 अप्रैल के बाद सख्ती तय

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, बरेली जोन के असिस्टेंट प्रोविडेंट फंड कमिश्नर संजीव सिंह ने साफ कहा कि यह उद्यमियों के लिए “अंतिम अवसर” है, जिसका लाभ केवल एक बार ही लिया जा सकता है। 30 अप्रैल 2026 के बाद किसी भी प्रकार की लापरवाही पर विभागीय कार्रवाई शुरू हो जाएगी।

उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान यदि कोई मामला सामने आता है, तो धारा 7ए के तहत नोटिस जारी कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाती है। इसमें बकाया राशि पर ब्याज, भारी आर्थिक दंड, कर्मचारी के हिस्से का अंश भी नियोक्ता से वसूली जैसे कदम उठाये जाएंगे।

जांच लंबित वालों को भी राहत

संजीव सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन संस्थानों के खिलाफ जांच लंबित है, वे भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। यदि वे समय रहते कर्मचारियों का पंजीकरण करा देते हैं, तो उन्हें दंडात्मक कार्रवाई से राहत मिल सकती है और केवल ब्याज व 100 रुपये का न्यूनतम अर्थदंड देना होगा।

अब भी समय है, वरना पछताना पड़ेगा

ईपीएफओ के अनुसार कई उद्यमियों ने इस योजना का लाभ उठाया है, लेकिन अब भी बड़ी संख्या में लोग इससे दूर हैं। विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि बचे हुए लगभग 20 दिनों में यदि पंजीकरण नहीं कराया गया, तो उसके बाद किसी भी प्रकार की रियायत नहीं मिलेगी।

SP_Singh AURGURU Editor