टीएमसी सांसद डॉ काकोली घोष का पार्टी के जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा, बोलीं- भ्रष्टाचार, दिखावा के खिलाफ यह मेरा विरोध
टीएमसी सांसद डॉ काकोली घोष दस्तीदार ने बारासात संगठनात्मक जिले के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। रविवार को मध्यमग्राम स्थित तृणमूल जिला कार्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए बारासात से तृणमूल सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उनका इस्तीफा पार्टी के दिखावे, संस्थागत भ्रष्टाचार और राजनीतिक सलाहकार फर्मों के दखल के खिलाफ एक विरोध है।
कोलकाता। टीएमसी सांसद डॉ काकोली घोष दस्तीदार ने बारासात संगठनात्मक जिले के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। रविवार को मध्यमग्राम स्थित तृणमूल जिला कार्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए बारासात से तृणमूल सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उनका इस्तीफा पार्टी के दिखावे, संस्थागत भ्रष्टाचार और राजनीतिक सलाहकार फर्मों के दखल के खिलाफ एक विरोध है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को लिखे एक पत्र में काकोली ने कहा कि हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल में अपराध और भ्रष्टाचार की कुछ चिंताजनक घटनाओं ने स्वाभाविक रूप से आम लोगों के मन में सवाल और आशंकाएं पैदा कर दी हैं।
उन्होंने आगे कहा कि मैं हमारी नेता ममता बनर्जी से अपील करती हूं। मेरा मानना है कि अगर आप ईमानदार और समर्पित पुराने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम करेंगी। जैसा कि आपने पहले किया है। तो पार्टी की छवि में काफी सुधार होगा। मुझे नहीं लगता कि मुश्किल काम है।
दरअसल पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों की घोषणा के बाद तृणमूल कांग्रेस के अलग-अलग स्तरों से असंतोष के साफ संकेत उभरने लगे। पार्टी के भीतर आपसी आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया और यह सिलसिला अभी तक जारी है। वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और उसकी चुनावी रणनीति बनाने वाली फर्म की भूमिका पर बार-बार सवाल उठाए हैं और अभी तक उठा रहे हैं। इसी बीच बारासात से सांसद काकोली को लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के व्हिप के पद से हटा दिया गया।
श्रीरामपुर से सांसद कल्याण बनर्जी को इस पद पर नियुक्त किए जाने के तुरंत बाद काकोली ने सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा और निराशा जाहिर की। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि चार दशकों के राजनीतिक संघर्ष और अटूट वफादारी के बदले उन्हें यही इनाम मिला है। अब उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।