ईरान का  'टू-ट्रैक' डील प्रस्ताव ट्रंप ने ठुकराया,  अमेरिका न्यूक्लियर डील में देरी नहीं चाहता,  दोनों देशों में फिर बढ़ा तनाव

ईरान और अमेरिका के बीच तनातनी कम होती नहीं दिख रही है। अमेरिका ने ईरान के उस प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया है, जिसमें परमाणु संवर्धन पर चर्चा से पहले स्थायी तौर पर युद्ध खत्म करने की बात कही गई है।

May 23, 2026 - 19:51
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ईरान का  'टू-ट्रैक' डील प्रस्ताव ट्रंप ने ठुकराया,  अमेरिका न्यूक्लियर डील में देरी नहीं चाहता,  दोनों देशों में फिर बढ़ा तनाव


वॉशिंगटन। अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान के उस नए प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें स्थायी तौर पर युद्ध खत्म होने के बाद परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा की बात कही गई है। ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम उनकी प्राथमिकता है। अमेरिका ने जोर दिया है कि स्थायी युद्धविराम और परमाणु समझौता एक साथ होने चाहिए। ईरान की परमाणु कार्यक्रम पर बाद में वार्ता की बात नहीं मानी जाएगी। ये सब ऐसे समय हुआ है, जब पाकिस्तानी आर्मी चीफ असीम मुनीर ने ईरान का दौरा किया है। इससे ईरान-अमेरिका के बीच समझौते की उम्मीद फिर कम होती दिख रही है।

ड्रॉप साइट ने शनिवार को बताया है कि ईरान ने समझौते के लिए बातचीत का जो 'टू-ट्रैक' क्रम बनाया है, उसे अमेरिका ने मानने से इनकार कर दिया है। अमेरिका ने ईरान की जब्त की गई संपत्ति को भी तभी छोड़ने की बात कही है, जब परमाणु कार्यक्रम पर कोई नतीजा निकले। ईरान ने मध्यस्थ पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक अपनी बात पहुंचाई थी।


एक सीनियर ईरानी अधिकारी ने बताया है कि तेहरान ने अमेरिका को युद्ध खत्म करने के लिए प्रपोजल दिया है। इस प्रपोजल में बातचीत को टू ट्रैक में बांटता है। इसमें ट्रैक-वन में युद्ध खत्म करने की बात कही गई है। ईरान चाहता है कि युद्ध खत्म करने का फॉर्मल ऐलान हो, ईरानी पोर्ट से अमेरिकी नाकेबंदी खत्म हो और ईरानी एसेट को रिलीज किया जाए।

अमेरिका ऐसा करता है तो इसके बदले में ईरान होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलेगा, कुछ समय के लिए ट्रांजिट फीस माफ करेगा और होर्मुज के लिए नया गवर्नेंस रिजीम फाइनल होने तक समुद्री ट्रैफिक चलने देगा। ईरान यह भी मांग कर रहा है कि उस पर हमलों में हुए नुकसान की भरपाई की जाए। साथ ही लेबनान में इजरायली हमलों को खत्म किया जाए।

ईरान ने ट्रैक 2 में युद्ध खत्म होने के बाद न्यूक्लियर बातचीत का ऑफर दिया है। ईरान का कहना है कि वह 10 साल के लिए 3.6 फीसदी से ज्यादा एनरिचमेंट रोक देगा। ईरान के अंदर सुपरविजन में 20% से ज्यादा एनरिच किए गए यूरेनियम को डाइल्यूट करेगा और न्यूक्लियर हथियार ना बनाने का वादा करेगा।

ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम रोकने के बदले में चाहता है कि उसके यूरेनियम एनरिच करने के अधिकार को मान्यता मिले। इसके साथ ही भविष्य के एग्रीमेंट के तहत एनरिचमेंट के सीमित अधिकार सुरक्षित रहें और उसे उन तमाम बैन से पूरी तरह राहत मिले, जो उस पर अमेरिका और पश्चिमी देशों ने लगाए हैं।

ईरान का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप खुद समझौते को हासिल करने में एक बड़ी अनिश्चितता हैं। वह बार-बार ईरान को तबाह करने की बेतुकी धमकियां दे रहे हैं। अमेरिका की अत्यधिक मांगें समझौते की राह में मुख्य बाधा हैं।

डोनाल्ड ट्रंप इससे सहमत नहीं हैं। ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन चाहता है कि युद्ध खत्म करने वाली डील और न्यूक्लियर एग्रीमेंट एक साथ फाइनल हों। वह इस बात पर जोर दे रहा है कि ईरान एनरिच किया हुआ यूरेनियम नहीं रख सकता है। ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान आधिकारिक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जबकि चीन, कतर, सऊदी अरब और मिस्र सहायक भूमिकाओं में हैं।