अमेरिका-ईरान की लड़ाई का असर भारत पर, यूएई से आ रहे जहाज को नुकसान
अमेरिका-ईरान युद्ध तेज हो चुका है। दोनों तरफ से लगातार हमले किए जा रहे हैं। इसका असर भारत पर भी पड़ रहा है, क्योंकि भारत का करीब 50 फीसदी तेल टैंकर और 60 फीसदी से ज्यादा गैसों की सप्लाई खाड़ी से होर्मुज के रास्ते से ही होती है।
नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान फारस की खाड़ी में अब हमले बढ़ गए हैं। संयुक्त अरब अमीरात से आ रहे एक मालवाहक जहाज को नुकसान पहुंचने की आशंका है। होर्मुज की खाड़ी से अमेरिका और यूरोपीय देशों के तेल टैंकरों की आवाजाही पर पाबंदी लग चुकी है। यहां तक कि ईरान होर्मुज के पास बारूदी सुरंगे बिछा रहा है, ताकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के जहाजों को ज्यादा से ज्यादा नुकसान हो। भारत के जहाजों को वैसे तो होर्मुज से आने-जाने पर रोक नहीं है, मगर जिन देशों से भारत तेल और गैस आयात करता है, उनके वहां से गुजरने पर पाबंदी हैं।
भारत मुख्य रूप से दो तरह की गैस आयात करता है। ये हैं लिक्विड नेचुरल गैस (एलएनजी) और लिक्विड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी), जो हाइड्रोकार्बन ईंधन हैं। कतर भारत को सबसे ज्यादा एलएनजी की सप्लाई करता है। यह भारत के कुल एलएनजी आयात का तकरीबन 50 फीसदी है।
फर्स्ट पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट ओमान और ईरान के बीच एक संकरा समुद्री रास्ता है। यह खाड़ी से एनर्जी एक्सपोर्ट करने का प्रमुख गेटवे है। यहां से दुनिया के 20 फीसदी तेल और गैस के जहाज गुजरते हैं।
भारत के लिए होर्मुज की अहमियत काफी ज्यादा है। भारत का करीब 50 फीसदी तेल और 60 फीसदी से ज्यादा एलएनजी और एलपीजी जहाज इसी रास्ते से गुजरते रहे हैं।
फर्स्ट पोस्ट के मुताबिक, अमेरिका-ईरान युद्ध के मौजूदा संकट से भारत की सप्लाई लाइन पर असर पड़ने लगा है। भारत का एक-तिहाई नेचुरल गैस का आयात बाधित हो चुका है। वहीं, दूसरे समुद्री रास्ते भी संवेदनशील हो चुके हैं।
भारत के लिए अब लाल सागर और स्वेज नहर का वैकल्पिक रास्ता बचता है। इन रास्तों से भारत को यूरोप और उत्तरी अफ्रीका से तेल-गैस की आपूर्ति होती है। लाल सागर के पास स्थित बॉब अल मांदेब क्षेत्र पर सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं, जिससे जहाजों की बीमा की लागत और शिपिंग रिस्क बढ़ चुका है।
हालांकि, फारस की खाड़ी में तेल का प्रवाह बाधित हो गया। कुछ दिन पहले ही मीसैयद इंडस्ट्रियल सिटी में एक पॉवर प्लांट के वॉटर टैंक पर ईरान के ड्रोन हमले के बाद कतरएनर्जी की रास को नुकसानलफ्फान एनर्जी फैसिलिटी में एलएनजी प्रोडॅक्शन रोक दी गई थी। यह दुनिया का सबसे बड़ी एलएनजी उत्पादक कंपनी है।
कतर के अलावा भारत अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, नाइजीरिया और अंगोला से गैस का आयात करता है। ऑस्ट्रेलिया की गैस सप्लाई भारत के पूर्वी तटों को होर्मुज को बाइपास करके की जाती है।
बड़ी बात यह है कि भारत का एलपीजी आयात बहुत हद तक खाड़ी क्षेत्र से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, यूएई और कतर को मिला लें तो भारत के कुल एलपीजी आयात का 90 फीसदी से ज्यादा ये तीनों देश ही पूरा करते हैं। यही वजह है कि भारत वैकल्पिक रास्ते भी तलाश रहा है।
2026 में सरकारी तेल कंपनियां जैसी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड ने 22 लाख टन का की एलपीजी सप्लाई के लिए यूनाइटेड स्टेट्स गल्फ कोस्ट से करार किया है।
यह इलाका अमेरिका में है, जो टेक्सास, लुईसियाना, मिसीसिपी, अलबामा और फ्लोरिडा को मिलाकर कहा जाता है। इसे गल्फ साउथ भी कहते हैं। ऐसी भी रिपोर्टें हैं कि भारत नॉर्वे और अमेरिका से गैस आयात करने पर भी विचार कर रहा है, ताकि गैस की किल्लत न हो।