जब पूरे शहर के सभी मंदिरों के कपाट बंद थे, तब खुले रहे श्री मथुरेश जी मंदिर के द्वार: चंद्रग्रहण के दौरान होता रहा भजन-कीर्तन

मंगलवार को साल के पहले चंद्रग्रहण के समय आगरा में जहां एक ओर सन्नाटा और मंदिरों के बंद कपाट का दृश्य था, वहीं यमुना किनारे स्थित श्री मथुरेश जी मंदिर के न केवल कपाट खुले रहे बल्कि यहां भक्ति की धारा निर्बाध बहती रही।

Mar 3, 2026 - 22:58
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जब पूरे शहर के सभी मंदिरों के कपाट बंद थे, तब खुले रहे श्री मथुरेश जी मंदिर के द्वार: चंद्रग्रहण के दौरान होता रहा भजन-कीर्तन
यमुना किनारा स्थित श्री मथुरेश जी मंदिर के चंद्र ग्रहण के दौरान खुले कपाट।

आगरा। तीन मार्च (मंगलवार) को वर्ष 2026 का पहला चंद्रग्रहण पड़ा। ग्रहण का सूतक लगते ही शहर के अधिकांश मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए और पूजा-पाठ व दर्शन की गतिविधियां स्थगित कर दी गईं। लेकिन इसी बीच यमुना किनारा स्थित पुष्टिमार्गीय श्री मथुरेश जी मंदिर में परंपरा के अनुरूप कपाट पूरे ग्रहण काल में खुले रहे। भजन-कीर्तन की मधुर ध्वनि के बीच भक्तजन ठाकुर लाला के सानिध्य में विराजमान रहे।

ग्रहण में भी जारी रही सेवा और संकीर्तन

सूतक लगने के साथ ही जहां शहर के समस्त देवालयों में कपाट बंद हो गए, वहीं श्री मथुरेश जी मंदिर में न तो पूजा रुकी और न ही भक्ति। पूरे ग्रहण काल के दौरान मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन चलता रहा। श्रद्धालु मंदिर में बैठकर ठाकुर जी का गुणगान करते रहे।

बाल स्वरूप की परंपरा, इसलिए नहीं होते बंद कपाट

मंदिर के महंत नंदन श्रोत्रिय और जुगल श्रोत्रिय ने बताया कि यहां ठाकुर जी के बाल रूप की पूजा होती है। पुष्टिमार्गीय की मान्यता के अनुसार बालक को कभी अकेला नहीं छोड़ा जाता। यही कारण है कि सूर्यग्रहण हो या चंद्रग्रहण, मंदिर के कपाट बंद नहीं किए जाते।

उन्होंने बताया कि ग्रहण के दौरान ठाकुर जी को काली पोशाक धारण कराई जाती है ताकि उन्हें किसी प्रकार की नजर न लगे। सेवा, आराधना और संकीर्तन निरंतर चलते रहते हैं।

नाथद्वारा की परंपरा से जुड़ा अनुकरण

राजस्थान के श्रीनाथजी मंदिर में भी ग्रहण के दौरान कपाट बंद नहीं होते। श्री मथुरेश जी मंदिर में उसी परंपरा का पालन किया जाता है। यह शहर का इकलौता मंदिर है, जहां ग्रहण काल में भी भक्तों के लिए द्वार खुले रहते हैं।

SP_Singh AURGURU Editor