एसएन में प्लास्टर गिरने के 17 घंटे बाद 10 साल के उमैर की मौत, गंभीर बीमारी से जूझ रहा था मासूम
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के बच्चा वार्ड में शुक्रवार को छत का करीब एक फीट चौड़ा और मोटा प्लास्टर 10 वर्षीय उमैर के ऊपर गिर गया था। हादसे के बाद उसकी जांच में कोई अंदरूनी चोट नहीं मिली और उसे ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। शनिवार सुबह करीब छह बजे उमैर की मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, बच्चा गंभीर निमोनिया, वेस्ट सिंड्रोम और लंबे समय से दौरे की बीमारी से पीड़ित था और उसकी मौत गंभीर बीमारी के कारण हुई। हादसे को लेकर अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप भी लगे हैं। 1980 में बनी इमरजेंसी बिल्डिंग में पहले भी प्लास्टर और टाइल्स गिरने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
इमरजेंसी के बच्चा वार्ड में हादसे के कुछ घंटे बाद बदली बच्चे की हालत, सुबह छह बजे तोड़ा दम, अस्पताल प्रशासन ने गंभीर बीमारी को बताया मौत की वजह
आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के बच्चा वार्ड में शुक्रवार दोपहर छत का मोटा प्लास्टर गिरने से घायल हुए 10 वर्षीय उमैर की शनिवार सुबह मौत हो गई। हादसे के बाद उमैर को इमरजेंसी के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बच्चे की हालत पहले से ही बेहद गंभीर थी और उसकी मौत गंभीर निमोनिया तथा पुरानी बीमारी के कारण हुई है। वहीं, हादसे के अगले ही दिन बच्चे की मौत होने से अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल फिर खड़े हो गए हैं।
उमैर गंभीर निमोनिया से पीड़ित था। परिवार के मुताबिक, बचपन से ही उसे दौरे पड़ते थे। वह इलाज के लिए एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती था। शुक्रवार दोपहर जिस समय छत का करीब एक फीट चौड़ा और मोटा प्लास्टर टूटकर उसके ऊपर गिरा, उस समय वह बच्चा वार्ड में भर्ती था।
चार घंटे पहले ही बेड पर शिफ्ट हुआ था उमैर
परिजनों के मुताबिक, हादसे से करीब चार घंटे पहले ही उमैर को उस बेड पर शिफ्ट किया गया था, जहां बाद में छत का प्लास्टर गिरा। उसकी मां भी बच्चे के पास ही लेटी हुई थीं। शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे अचानक छत से मोटा प्लास्टर टूटकर नीचे गिरा। तेज आवाज के साथ प्लास्टर गिरने से वार्ड में अफरा-तफरी मच गई। उमैर प्लास्टर की चपेट में आ गया। परिजनों के मुताबिक, बच्चे को खरोंच आई, लेकिन उस समय कोई गंभीर बाहरी चोट नजर नहीं आई। मां ने बताया कि प्लास्टर काफी मोटा था और सीधे बच्चे के ऊपर गिरा था। हालांकि उस समय बच्चे को बड़ी चोट नहीं लगी। हादसे के बाद अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों ने तत्काल स्थिति संभाली।
15 बच्चों को दूसरे वार्ड में किया गया शिफ्ट
प्लास्टर गिरने की घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बच्चा वार्ड में भर्ती सभी 15 बच्चों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया। उमैर की भी सीटी स्कैन समेत कई जांच कराई गईं। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, जांच में बच्चे के शरीर में किसी तरह की अंदरूनी चोट नहीं मिली। डॉक्टरों ने भी उस समय प्लास्टर गिरने की घटना से बच्चे को गंभीर नुकसान होने की बात नहीं कही थी। क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का काम भी शुरू कराया गया। प्रशासन की ओर से सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ खबरों को भ्रामक बताते हुए कहा गया कि हादसे के तत्काल बाद किसी की जनहानि नहीं हुई थी।
हादसे के करीब 17 घंटे बाद मौत
हादसे के बाद उमैर का इलाज ट्रॉमा सेंटर में चल रहा था। शनिवार सुबह करीब छह बजे उसकी मौत हो गई। हादसे और मौत के बीच करीब एक दिन का अंतर होने के कारण परिजनों और अस्पताल प्रशासन के बीच घटना को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता के मुताबिक, उमैर की हालत पहले से ही गंभीर थी। उन्हें बताया गया कि बच्चे को करीब पांच महीने की उम्र से दौरे पड़ते थे और वह वेस्ट सिंड्रोम से पीड़ित था। इसके अलावा उसे गंभीर निमोनिया था, जिसके इलाज के लिए उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्राचार्य के अनुसार, प्लास्टर गिरने से बच्चे को केवल मामूली खरोंच आई थी और जांच में कोई अंदरूनी चोट नहीं मिली थी। उनका कहना है कि बच्चे की मौत गंभीर बीमारी के कारण हुई और प्लास्टर गिरने की घटना महज संयोग थी।
प्रदर्शन और अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
उमैर की मौत से पहले ही प्लास्टर गिरने की घटना को लेकर अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे थे। घटना की जानकारी मिलने पर सामाजिक कार्यकर्ता बाल योगी अस्पताल पहुंचे और अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए। घटना के बाद इमरजेंसी वार्ड के बाहर प्रदर्शन और हंगामा भी हुआ। वार्ड में मौजूद एत्माद्दौला निवासी राजा खान ने बताया कि उनका बेटा भी बच्चा वार्ड में भर्ती था। वह प्लास्टर वाले बेड के पास ही बैठे थे। अचानक तेज आवाज के साथ प्लास्टर गिरा तो वह घबरा गए और तत्काल अपने बच्चे को गोद में उठा लिया। इसके बाद बच्चों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
1980 में बनी इमारत, जर्जर हिस्से बने चिंता का कारण
एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी इमारत वर्ष 1980 में बनी थी। करीब चार दशक से अधिक पुरानी इस इमारत के कई हिस्सों की हालत अब चिंता का विषय बनी हुई है। यहां वर्ष 2004, 2014 और 2018 में मरम्मत कार्य कराया जा चुका है। इसके बावजूद इमारत में कई जगह टाइल्स उखड़ने और प्लास्टर गिरने जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं। बाल रोग विभाग में भी पहले प्लास्टर गिरने की घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
बीमारी से जूझ रहे बच्चे की मौत ने बढ़ाई चिंता
उमैर का परिवार उसे गंभीर बीमारी के बीच बेहतर इलाज और जिंदगी की उम्मीद लेकर एसएन मेडिकल कॉलेज आया था। शुक्रवार को वार्ड की छत का प्लास्टर उसके ऊपर गिरा और अगले ही दिन उसकी मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन हादसे को उसकी मौत की वजह नहीं मान रहा है और गंभीर बीमारी को कारण बता रहा है। हालांकि, इस घटना ने पुराने अस्पताल भवनों की सुरक्षा, नियमित निरीक्षण और मरीजों के लिए सुरक्षित इलाज के माहौल को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब जरूरत इस बात की है कि अस्पताल की जर्जर हो चुकी संरचनाओं की व्यापक जांच कराकर ऐसे हिस्सों की पहचान की जाए, जहां भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।