परचमकुशाई के साथ शुरू हुआ 108वां उर्स-ए-रज़वी, देश-विदेश से बड़ी संख्या में बरेली पहुंचे जायरीन

-आरके सिंह- बरेली। आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खान फाज़िले बरेलवी के 108वें उर्स-ए-रज़वी का गुरुवार को परचमकुशाई की रस्म के साथ विधिवत शुभारंभ हो गया। दरगाह परिसर और इस्लामिया मैदान में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में देश-विदेश से आए बड़ी संख्या में जायरीन और उलेमा शामिल हुए। तीन दिवसीय उर्स के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सामाजिक संदेश भी दिए जा रहे हैं।

Aug 6, 2026 - 20:34
 0
परचमकुशाई के साथ शुरू हुआ 108वां उर्स-ए-रज़वी, देश-विदेश से बड़ी संख्या में बरेली पहुंचे जायरीन
बरेली में आला हजरत दरगाह के बाहर मौजूद जायरीन।

दरगाह मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि इस्लामिया मैदान स्थित रज़ा गेट पर रज़वी परचम फहराने के साथ उर्स की शुरुआत हुई। परचमकुशाई की रस्म दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियां) ने सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा कादरी (अहसन मियां), सैयद आसिफ मियां और देश-विदेश से आए उलेमा की मौजूदगी में अदा की।

इससे पहले आजमनगर स्थित हाजी अल्लाह बख्श के निवास से मुख्य परचमी जुलूस निकाला गया। जुलूस की अगुवाई मुफ्ती अहसन मियां ने की। ठिरिया निजावत खान और रहपुरा चौधरी से भी परचम व चादरों के जुलूस दरगाह पहुंचे। रास्ते में श्रद्धालुओं ने स्वागत किया और फातिहाख्वानी व लंगर का आयोजन हुआ।

उर्स के दौरान अजमेर शरीफ स्थित ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह से आया संदल, केवड़ा और फूल आला हज़रत की मजार पर पेश किया गया। यह रस्म मौलाना सुब्हान रज़ा खान, मुफ्ती अहसन रज़ा कादरी, अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन सैयद सुल्तान उल हसन चिश्ती और सैयद आसिफ मियां की मौजूदगी में अदा की गई। इस दौरान देश में अमन, खुशहाली और तरक्की के लिए दुआ की गई।

दरगाह प्रमुख और सज्जादानशीन ने जायरीनों के नाम संदेश जारी कर देश की तरक्की, सामाजिक सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने, सामाजिक बुराइयों से दूर रहने और समाज सेवा में योगदान देने की अपील की।

रात में नातिया मुशायरा और हुज्जतुल इस्लाम मुफ्ती हामिद रज़ा खान के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इस अवसर पर मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने कहा कि हुज्जतुल इस्लाम ने शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर दिया तथा सुन्नी विचारधारा के प्रचार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उर्स में देश-विदेश से जायरीनों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। दरगाह प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की हैं।

उर्स के दूसरे दिन फज्र की नमाज के बाद कुरानख्वानी, रेहाने मिल्लत और मुफस्सिर-ए-आज़म के कुल शरीफ की रस्में होंगी। इसके बाद मजहब-ओ-मसालिक कॉन्फ्रेंस में उलेमा नामूस-ए-रिसालत, समाज सुधार, आपसी सौहार्द और सामाजिक बुराइयों जैसे विषयों पर विचार रखेंगे। देर रात मुफ्ती-ए-आज़म-ए-हिंद के कुल शरीफ की रस्म अदा की जाएगी।

SP_Singh AURGURU Editor