आगरा में 13.90 लाख बच्चों ने खाई कृमिनाशक दवा, स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में चला अभियान
आगरा में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के तहत सोमवार को जिलेभर में 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों और किशोर-किशोरियों को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई। बरौली अहीर स्थित सेन्ट एन्ड्रियूज पब्लिक स्कूल में अभियान का शुभारंभ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बच्चों को दवा खिलाकर किया। जिले के 5022 सरकारी व निजी स्कूलों तथा 3004 आंगनबाड़ी केंद्रों में करीब 13.90 लाख बच्चों को कृमिनाशक दवा दी गई। अभियान से छूटे बच्चों को 14 अगस्त को मॉप-अप राउंड में दवा खिलाई जाएगी।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर बरौली अहीर के सेन्ट एन्ड्रियूज पब्लिक स्कूल से अभियान का शुभारंभ, 14 अगस्त को छूटे बच्चों के लिए होगा मॉप-अप राउंड
आगरा। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर सोमवार को आगरा जिले में बच्चों और किशोर-किशोरियों को कृमिनाशक दवा खिलाने का व्यापक अभियान चलाया गया। बरौली अहीर स्थित सेन्ट एन्ड्रियूज पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरौली अहीर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमित पांडे ने छात्र अभिनव, जीशान खान और छात्रा जाह्नवी उपाध्याय को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाकर अभियान का शुभारंभ किया। स्कूल में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के दौरान 825 छात्र-छात्राओं ने एल्बेंडाजोल की दवा खाई। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बच्चों को कृमि संक्रमण से बचाव और दवा के महत्व के बारे में भी जानकारी दी।
13.90 लाख बच्चों तक पहुंची दवा
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति ने बताया कि अभियान के तहत जिले के 5022 सरकारी एवं निजी स्कूलों और 3004 आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को कृमिनाशक दवा खिलाई गई। अभियान के दौरान कुल 13.90 लाख बच्चों को एल्बेंडाजोल की खुराक दी गई। उन्होंने बताया कि किसी कारण से जो बच्चे सोमवार को दवा खाने से रह गए हैं, उन्हें 14 अगस्त को मॉप-अप राउंड के दौरान दवा खिलाई जाएगी, ताकि कोई भी पात्र बच्चा अभियान से वंचित न रह जाए।
पेट के कीड़ों से बच्चों में हो सकती है एनीमिया की समस्या
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत एक वर्ष से 19 वर्ष तक के बच्चों और किशोर-किशोरियों को वर्ष में दो बार कृमिनाशक दवा खिलाई जाती है। पेट में कृमि होने से बच्चों के शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित होता है। इससे खून की कमी यानी एनीमिया और कुपोषण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि कृमि संक्रमण का असर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी पड़ सकता है। समय-समय पर कृमिनाशक दवा खिलाने से बच्चों को संक्रमण से बचाने और उनके स्वास्थ्य एवं पोषण की स्थिति बेहतर करने में मदद मिलती है।
बच्चों ने बताया- दवा खाने में नहीं हुई कोई परेशानी
दवा खाने के बाद 12 वर्षीय छात्र पीयूष यादव ने बताया कि स्कूल की प्रधानाचार्या ने प्रार्थना सभा और पेरेंट्स मीटिंग के दौरान बच्चों और अभिभावकों को एल्बेंडाजोल के बारे में जानकारी दी थी। क्लास टीचर ने भी कृमि संक्रमण से बचाव के उपाय बताए थे। पीयूष ने कहा कि उसने एल्बेंडाजोल की दवा खाई और उसे किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। वहीं 12 वर्षीय छात्र कृष गुप्ता ने बताया कि उसने भी एल्बेंडाजोल की दवा ली है। उसकी कक्षा के अन्य बच्चों ने भी दवा खाई और किसी को कोई परेशानी नहीं हुई।
कृमिनाशक दवा से मिलते हैं ये फायदे
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कृमिनाशक दवा खिलाने से बच्चों और किशोर-किशोरियों के स्वास्थ्य पर कई सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति में सुधार होता है। एनीमिया को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। समुदाय में कृमि संक्रमण की व्यापकता कम होती है। बच्चों की सीखने की क्षमता और स्कूल में उपस्थिति में सुधार होता है। कृमि संक्रमण के कारण होने वाली कमजोरी और पोषण संबंधी समस्याओं से बचाव में मदद मिलती है।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
अभियान के शुभारंभ के अवसर पर सेन्ट एन्ड्रियूज पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल शाहिबा खॉ, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी सतीश यादव, बीईओ जगत सिंह राजपूत, चीफ फार्मासिस्ट संजय शर्मा, एविडेंस एक्शन इंडिया संस्था के जिला समन्वयक शाहिद खान सहित स्कूल के शिक्षक और अन्य स्टाफ मौजूद रहे।