ममता के आंचल से स्नेह की पोटली लेकर विदा हुईं 40 बेटियां, 25 साल से माधवी अग्र महिला मंडल दे रहा मायके का सुख

आगरा। महाराजा अग्रसेन भवन, लोहामंडी में बुधवार को 40 बेटियों की विदाई के भावुक दृश्य ने हर किसी की आंखें नम कर दीं। माधवी अग्र महिला मंडल द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘माधवी बेटियों का मायका’ कार्यक्रम के समापन पर बेटियों को तिलक, आशीर्वाद, शगुन, सावन की मिठाई, चावल, सेवइयां और विभिन्न उपहार देकर विदा किया गया। मायके से विदा होती बेटियों को परिवार जैसा स्नेह देते हुए संस्था की सदस्याओं ने उन्हें भरोसा दिलाया कि विवाह के बाद भी उनका मायका उनके सुख-दुख में हमेशा साथ खड़ा रहेगा।

Aug 19, 2026 - 18:48
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ममता के आंचल से स्नेह की पोटली लेकर विदा हुईं 40 बेटियां, 25 साल से माधवी अग्र महिला मंडल दे रहा मायके का सुख
लोहामंडी स्थित महाराजा अग्रसेन भवन में माधवी अग्र महिला मंडल द्वारा आयोजित ‘माधवी बेटियों का मायका’ कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित नीतेश अग्रवाल, मुरारी प्रसाद अग्रवाल, ऊषा बंसल, आभा जैन, शिल्पी अग्रवाल आदि।

कार्यक्रम में बेटियों के साथ उनके दामादों का भी आत्मीय स्वागत किया गया। उद्घाटनकर्ता नीतेश अग्रवाल ने सभी बेटी-दामादों के माथे पर तिलक लगाकर शुभकामनाएं दीं। माताओं ने बेटियों और दामादों को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखी वैवाहिक जीवन, प्रेम, सौहार्द और जीवन की हर परिस्थिति का धैर्य व समझदारी से सामना करने की कामना की।

25 साल से बेटियों को मिल रहा मायके का स्नेह

माधवी अग्र महिला मंडल की अध्यक्ष पुष्पा अग्रवाल एवं सचिव ऊषा बंसल ने कहा कि इन बेटियों की विदाई उनके लिए किसी अपनी बेटी की विदाई से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि मंडल पिछले 25 वर्षों से श्री मध्यानंद अनाथालय की उन बेटियों के लिए यह आयोजन कर रहा है, जिनका विवाह विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से वर्षों पहले कराया गया था।

उन्होंने कहा कि हर वर्ष बेटियों के आने पर ऐसा लगता है जैसे परिवार पूरा हो गया हो। विदाई के समय आंखें नम होती हैं, लेकिन बेटियों के अपने घर-परिवार में खुश रहने और जीवन में आगे बढ़ने का विश्वास संतोष देता है।

खेल और गीतों से गूंजा मायका

विदाई समारोह से पहले बेटियों और उनके परिवारों के लिए सुबह नाश्ते की व्यवस्था की गई। इसके बाद विभिन्न मनोरंजक खेल, गतिविधियां और फोटो सेशन हुए। बच्चों ने भी कार्यक्रम में खूब उत्साह दिखाया।

बच्चों ने संस्था की सदस्याओं को अपनी नानी मानकर ‘नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए...’ जैसे गीतों की मधुर पंक्तियों से खूब गुदगुदाया। बच्चों की मासूम शरारतों और खिलखिलाहट से पूरे माहौल में अपनापन और खुशी घुल गई।

तिलक के साथ शगुन और उपहार

बेटियों की विदाई के अवसर पर नीतेश अग्रवाल ने सभी बेटी-दामादों का तिलक कर सम्मान किया। मुरारी प्रसाद अग्रवाल ने शगुन का नारियल और विदाई का लिफाफा प्रदान किया। इसके साथ बेटियों को सावन की मिठाई, चावल, सेवइयां सहित विभिन्न उपहार भेंट किए गए।

उपहारों की यह पोटली महज सामान नहीं थी, बल्कि मायके के स्नेह, आशीर्वाद और आत्मीय रिश्ते की निशानी थी। बेटियों को यह एहसास कराया गया कि विवाह के बाद भी उनका मायका उनके साथ है और उनके सुख-दुख में परिवार हमेशा खड़ा रहेगा।

भावुक हुईं बेटियां, गले लगाकर दी विदाई

विदाई के दौरान कई भावुक दृश्य सामने आए। बेटियों के विदा होने का समय आया तो संस्था की सदस्याओं ने उन्हें गले लगाकर स्नेहाशीष दिया। बेटियों ने भी मंडल की सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि यह आयोजन उन्हें बार-बार यह एहसास कराता है कि उनका मायका आज भी उनके साथ है।

महिला शांति सेवा की अध्यक्ष वत्सला प्रभाकर एवं डॉ. पल्लवी प्रभाकर ने भी सभी बेटियों को विशेष आशीर्वाद प्रदान किया।

सदस्यों ने संभाली आयोजन की व्यवस्थाएं

कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने में शशि अग्रवाल, आभा जैन, रजनी गोयल, पायल, अर्चना, श्वेता मित्तल, शिल्पी अग्रवाल और नमिता सहित मंडल की अन्य सदस्यों का सहयोग रहा।

माधवी अग्र महिला मंडल की यह 25 वर्ष पुरानी पहल विवाह के बाद भी बेटियों के साथ मायके के रिश्ते को जीवंत रखने का अनूठा प्रयास है। इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि मायका केवल एक घर नहीं, बल्कि वह भावनात्मक रिश्ता है, जिसकी छांव बेटियों के जीवन में विवाह के बाद भी बनी रह सकती है।

SP_Singh AURGURU Editor