आगरा में 76वां गुरुजन सम्मान समारोहः कला, साहित्य, शिक्षा और समाजसेवा की विभूतियों का सम्मान, गुरु-शिष्य परंपरा के सुरों से सजा समारोह

आगरा। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर रविवार को पं. रघुनाथ तलेगाँवकर फाउंडेशन ट्रस्ट एवं संगीत कला केन्द्र, आगरा के संयुक्त तत्वावधान में 76वें गुरुजन सम्मान समारोह का आयोजन ग्रांड होटल आगरा के मुख्य सभागार में किया गया। समारोह में संगीत, साहित्य, शिक्षा, समाजसेवा, जनसंचार और वाद्य कला सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली शहर की प्रतिष्ठित हस्तियों को मानद सम्मान प्रदान किया गया। समारोह में गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित संगीत और नृत्य प्रस्तुतियों ने वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।

Aug 9, 2026 - 21:13
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आगरा में 76वां गुरुजन सम्मान समारोहः कला, साहित्य, शिक्षा और समाजसेवा की विभूतियों का सम्मान, गुरु-शिष्य परंपरा के सुरों से सजा समारोह
होटल ग्रांड में आयोजित 76वें गुरुजन सम्मान समारोह में गुरु-शिष्य परम्परा को समर्पित संगीत और नृत्य प्रस्तुतियों की एक झलक।

गणपति और मां सरस्वती की आराधना से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रथम पूज्य श्री गणपति एवं मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इसके बाद पं. विष्णु दिगम्बर पलुस्कर, पं. विष्णु नारायण भातखण्डे, पं. रघुनाथ तलेगाँवकर, श्रीमती सुलभा जी, रानी सरोज गौरीहार, उस्ताद लल्लू सिंह एवं संगीत नक्षत्र पं. केशव जी के चित्रों पर अरुण डंग, अरविंद कपूर, आर.के. तिवारी, विनोद माहेश्वरी एवं संस्था सदस्यों ने माल्यार्पण किया।

नन्हे साधकों ने दी गुरु वंदना

संगीत कला केन्द्र के नन्हे साधकों निहि सिंह, वर्तिका, निष्ठा एवं हिमांशु देव सिंह ने गुरु वंदना ‘गुरु तेरी महिमा अपरम्पार’ और ‘गुरु तोरे चरण शरण में आए’ की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को आनंदित किया।

इसके बाद सावन के रंग में राग देस पर आधारित ‘सावन आयो घिर घिर’ और कजरी ‘रिमझिम रिमझिम सावन बरसे’ की प्रस्तुति दी गई। केन्द्र की छात्राओं आन्या जादौन, महक जादौन, शुभांगी वर्मा, आर्या भाटी, दृष्टि उपाध्याय, अभिलाषा शुक्ला, ईशा सेठ, सीमा सिंह एवं हेमा शर्मा ने अपनी प्रस्तुति से समां बांध दिया।

इन प्रस्तुतियों का निर्देशन गुरु मां श्रीमती प्रतिभा जी ने किया। तबले पर डॉ. लोकेन्द्र तलेगाँवकर, संवादिनी पर पं. रविन्द्र तलेगाँवकर और ढोलक पर वरिष्ठ कलाकार उस्ताद सलीम खान ने संगत की।

कृष्ण वंदना ने मोहा मन

इसके बाद आमद एकेडमी, आगरा की नृत्य साधिकाओं ओजश्वी बघेल, विश्विका जैन, छवि यादव, बानी चौधरी, समृद्धि माहेश्वरी, नायशा जिंदल एवं सौम्या शर्मा ने पं. बिरजू महाराज द्वारा रचित कृष्ण वंदना ‘कस्तूरी तिलकम’ और गुरु वंदनाओं की प्रस्तुति दी। नृत्य प्रस्तुति का निर्देशन संस्था की निदेशिका तरूछाया सक्सेना ने किया।

प्रस्तुतियों के बाद छात्रों को प्रमाणपत्र और मेडल प्रदान किए गए। संस्था सदस्य अरविंद कपूर, अरुण डंग, डॉ. मंगला मठकर एवं अध्यक्ष विजयपाल सिंह चौहान ने विद्यार्थियों को सम्मानित किया।

सरोद के सुरों ने बांधा समां

समारोह की विशिष्ट प्रस्तुति बनस्थली विद्यापीठ से आए मैहर घराने के सिद्धहस्त कलाकार प्रसेनजित सेनगुप्ता का सरोद वादन रही। उन्होंने राग बिलासखानी तोड़ी में विलंबित गत तीनताल में मैहर घराने की परंपरा के अनुरूप क्रमबद्ध वादन प्रस्तुत किया। पारंपरिक रचनाओं की प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

तबले पर युवा प्रतिभा स्वप्निल रावल ने सूझबूझ और तैयारी के साथ प्रभावी संगत की।

विभिन्न क्षेत्रों की नौ हस्तियों को मानद सम्मान

समारोह के मुख्य चरण में शहर की नौ विशिष्ट हस्तियों को अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य के लिए मानद सम्मान प्रदान किए गए।

आर.के. तिवारी को ‘समाज शिल्पी’, अनिल कुमार शर्मा को ‘जनसंचार शिल्पी’, मनीष प्रभाकर को ‘संगीत शिल्पी’, प्रो. (डॉ.) मनीषा को ‘शिक्षा शिल्पी’, निशिराज जैन को ‘साहित्य शिल्पी’, रघुवीर प्रसाद शर्मा ‘रग्घो’ को ‘वाद्य शिल्पी’, प्रो. सुजीत देवघोरिया को ‘आदर्श गुरु’, प्रसेनजित सेनगुप्ता को ‘नाद तन्त्री विलास’ और स्वप्निल रावल को ‘संगीत सहोदर’ के मानद सम्मान से सम्मानित किया गया।

संस्था संरक्षक अरुण डंग, डॉ. लोकेन्द्र तलेगाँवकर, नीरज जैन, विनोद माहेश्वरी, अध्यक्ष विजय पाल सिंह चौहान, उपाध्यक्ष अनिल वर्मा, सदस्य डॉ. मंगला मठकर, रविन्द्र तलेगाँवकर एवं श्रीमती प्रतिभा तलेगाँवकर ने उपवस्त्र एवं सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

सभी सम्मानित अतिथियों का जीवन परिचय डॉ. महेश चंद्र धाकड़ एवं श्री कृष्ण जी ने प्रस्तुत किया।

शहर के विद्वतजन रहे मौजूद

समारोह में अनिल डंग, डॉ. अरुण चतुर्वेदी, सुधीर नारायण, डॉ. मधु भारद्वाज, सन्दीप अरोड़ा, आचार्य उमाशंकर पाराशर, सन्तोष कुलश्रेष्ठ, नीरज जैन, डॉ. राजीव शर्मा, विलास पालखे, आनंद हरिदास, विक्रम शुक्ला, डॉ. वंदना अग्रवाल, डॉ. मनीषा, डॉ. महेश चंद्र धाकड़, अजय बहादुर, सलोनी पांडेय, उस्ताद सलीम खान, पार्थो सेन, मीनू गिरी सहित नगर के अनेक विद्वतजन और कलाप्रेमी मौजूद रहे।

कार्यक्रम का संचालन श्री कृष्ण जी ने किया। उन्होंने संस्था के इतिहास, गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व और समारोह की भावभूमि को प्रभावी शब्दों में प्रस्तुत किया। संस्था अध्यक्ष विजयपाल सिंह चौहान ने सभी सहयोगियों, श्रोताओं और छात्रों का आभार व्यक्त किया।

SP_Singh AURGURU Editor