आईसीएमआर-एसटीएस में एसएन के 8 छात्रों का चयन, शोध के क्षेत्र में बढ़ाया संस्थान का मान
सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज, आगरा के एमबीबीएस 2024 बैच के आठ विद्यार्थियों का प्रतिष्ठित आईसीएमआर-एसटीएस 2026 के लिए चयन हुआ है। अलग-अलग विभागों के चयनित विद्यार्थियों को फैकल्टी मेंटर्स का मार्गदर्शन मिलेगा। प्रधानाचार्य एवं डीन प्रो. (डॉ.) प्रशांत गुप्ता ने इसे संस्थान में बढ़ती शोध संस्कृति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का परिणाम बताते हुए विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि एसएनएमसी में रिसर्च के अवसर बढ़ाने, फैकल्टी मेंटरशिप मजबूत करने और अनुसंधान आधारित चिकित्सा शिक्षा को निरंतर प्रोत्साहित किया जाएगा।
एमबीबीएस 2024 बैच के विद्यार्थियों ने हासिल की बड़ी उपलब्धि, वैज्ञानिक सोच और रिसर्च कल्चर को मिलेगा बढ़ावा
आगरा। सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी), आगरा के एमबीबीएस 2024 बैच के आठ विद्यार्थियों ने प्रतिष्ठित आईसीएमआर-एसटीएस 2026 के लिए चयनित होकर कॉलेज का गौरव बढ़ाया है। एक साथ आठ विद्यार्थियों का चयन मेडिकल शिक्षा के साथ-साथ स्नातक स्तर पर शोध और वैज्ञानिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
आईसीएमआर-एसटीएस कार्यक्रम का उद्देश्य मेडिकल छात्रों को पढ़ाई के साथ अनुसंधान कार्य से जोड़ना और उन्हें वैज्ञानिक शोध की बुनियादी प्रक्रिया से परिचित कराना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थी अनुभवी फैकल्टी मेंटर्स के मार्गदर्शन में शोध परियोजनाओं पर काम करते हैं। एसएनएमसी के विद्यार्थियों का चयन इस बात का संकेत है कि संस्थान में अब चिकित्सा शिक्षा के साथ रिसर्च और एविडेंस-बेस्ड मेडिकल प्रैक्टिस पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
आठ विद्यार्थियों ने हासिल किया चयन
आईसीएमआर-एसटीएस 2026 के लिए चयनित विद्यार्थियों में विभिन्न विभागों के छात्र शामिल हैं। इनमें तुलिका पाल ने प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की डॉ. दिव्या यादव के मार्गदर्शन में चयन हासिल किया है। इसी विभाग से क्षितिज त्यागी का चयन हुआ है, जिनके फैकल्टी मेंटर डॉ. संगीता साहू हैं। फिजियोलॉजी विभाग से भाव्या झा चयनित हुई हैं। उन्हें डॉ. दिव्या श्रीवास्तव का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। वहीं सामुदायिक चिकित्सा विभाग से चार विद्यार्थियों का चयन हुआ है। इनमें वैभव पचौरी को डॉ. मनीषा नागोरजे, तरुण तोमर को डॉ. हिमालया, रिंकी बौध को डॉ. रेनू अग्रवाल और नंदिका कर को डॉ. सर्वेश का फैकल्टी मेंटर बनाया गया है। इसके अलावा माइक्रोबायोलॉजी विभाग से पीयूष राज शर्मा का चयन हुआ है। उनके फैकल्टी मेंटर डॉ. प्रज्ञा शाक्य हैं।
शोध के प्रति बढ़ेगा विद्यार्थियों का रुझान
एसएनएमसी में एक साथ आठ विद्यार्थियों का आईसीएमआर-एसटीएस के लिए चयन संस्थान में विकसित हो रही शोध संस्कृति की ओर भी संकेत करता है। मेडिकल शिक्षा के दौरान विद्यार्थियों को यदि शोध प्रक्रिया से जोड़ा जाए तो उनमें समस्या की वैज्ञानिक पहचान, आंकड़ों के विश्लेषण और प्रमाणों के आधार पर निष्कर्ष निकालने की क्षमता विकसित होती है। आईसीएमआर-एसटीएस जैसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें यह समझने का अवसर देते हैं कि किसी चिकित्सकीय समस्या पर वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन कैसे किया जाता है और शोध के निष्कर्षों का मरीजों के इलाज में किस प्रकार उपयोग किया जा सकता है।
प्राचार्य ने दी चयनित छात्रों को बधाई
इस उपलब्धि पर एसएनएमसी के प्रधानाचार्य एवं डीन प्रो. (डॉ.) प्रशांत गुप्ता ने चयनित सभी विद्यार्थियों और उनके फैकल्टी मेंटर्स को बधाई दी। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के साथ विद्यार्थियों में शोध की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है। चिकित्सा के क्षेत्र में लगातार नए शोध सामने आ रहे हैं और ऐसे में भावी चिकित्सकों के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा प्रमाण-आधारित चिकित्सा पद्धति की समझ बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के शोध कार्यक्रम विद्यार्थियों को एविडेंस बेस्ड मेडिकल प्रेक्टिस की दिशा में आगे बढ़ने के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं। शोध के दौरान विद्यार्थियों को अपने विषय को गहराई से समझने, वैज्ञानिक पद्धति अपनाने और तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचने का अनुभव मिलता है।
फैकल्टी मेंटरशिप को किया जाएगा और मजबूत
डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि एसएनएमसी आगरा में विद्यार्थियों को शोध के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास लगातार जारी हैं। संस्थान का उद्देश्य ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है, जिसमें विद्यार्थी चिकित्सा शिक्षा के साथ-साथ अनुसंधान के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने कहा कि फैकल्टी मेंटरशिप को मजबूत करने, रिसर्च के अवसर बढ़ाने और अनुसंधान आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विद्यार्थियों को अनुभवी शिक्षकों के मार्गदर्शन में शोध परियोजनाओं पर काम करने के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
एसएनएमसी में रिसर्च कल्चर को मिलेगा नया प्रोत्साहन
आठ विद्यार्थियों के आईसीएमआर-एसटीएस 2026 के लिए चयन से न केवल चयनित छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि अन्य एमबीबीएस विद्यार्थियों में भी शोध के प्रति रुचि पैदा होने की उम्मीद है। मेडिकल कॉलेज में शोध संस्कृति को मजबूत करने से भविष्य में संस्थान से अधिक संख्या में शोध परियोजनाएं और वैज्ञानिक उपलब्धियां सामने आ सकती हैं। यह उपलब्धि एसएनएमसी के विद्यार्थियों के लिए चिकित्सा शिक्षा के साथ अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। चयनित विद्यार्थी अपने-अपने फैकल्टी मेंटर्स के निर्देशन में शोध कार्य को आगे बढ़ाएंगे।