झारखंड में छात्रों के विधानसभा घेराव के दौरान बैरिकेडिंग टूटी, पुलिस ने की पानी की बौछार और लाठीचार्ज

रांची। सरकारी भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर झारखंड में छात्रों का आंदोलन सोमवार को और तेज हो गया। आंदोलन के 17वें दिन बड़ी संख्या में JPSC और JSSC अभ्यर्थियों ने विधानसभा घेराव के लिए मार्च निकाला। पुरानी विधानसभा से नई विधानसभा की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कई स्तरों पर बैरिकेडिंग और कंटीले तार लगाए थे। छात्रों ने कई बैरिकेड पार कर आगे बढ़ने का प्रयास किया। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और लाठीचार्ज किया। पथराव की घटना में एक पुलिसकर्मी के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।

Aug 10, 2026 - 13:54
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झारखंड में छात्रों के विधानसभा घेराव के दौरान बैरिकेडिंग टूटी, पुलिस ने की पानी की बौछार और लाठीचार्ज
झारखंड की राजधानी रांची में विधान सभा की ओर बढ़ते छात्रों को रोकती पुलिस।

छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार ने अभी तक ऐसा कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है, जिससे आंदोलन समाप्त किया जा सके। वहीं सरकार का कहना है कि छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगों को स्वीकार किया जा चुका है। रविवार को सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच करीब पांच घंटे तक चली वार्ता के बावजूद सीबीआई जांच और JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की मांग पर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद छात्रों ने सोमवार को विधानसभा मार्च का निर्णय जारी रखा।

सुबह से जुटने लगे अभ्यर्थी, विधानसभा की ओर बढ़ा काफिला

सोमवार सुबह से ही रांची में विभिन्न स्थानों से छात्र और अभ्यर्थी जुटने लगे। प्रदर्शनकारियों ने पुरानी विधानसभा के पास एकत्र होकर नई विधानसभा की ओर मार्च शुरू किया। प्रशासन ने पहले से ही विधानसभा के आसपास सुरक्षा का घेरा तैयार कर रखा था। मार्ग में कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए गए थे और कुछ स्थानों पर बैरिकेड के ऊपर कंटीले तार भी लगाए गए थे।

मार्च के दौरान छात्रों ने कई बैरिकेड पार कर लिए। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच स्थिति तनावपूर्ण होने के बाद वाटर कैनन से पानी की बौछार की गई। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया। अंतिम बैरिकेड के आसपास कथित पथराव में एक पुलिसकर्मी के सिर पर चोट लगने की भी सूचना है।

पांच घंटे की वार्ता के बाद भी नहीं निकला रास्ता

विधानसभा घेराव से एक दिन पहले रविवार को सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच लंबी बातचीत हुई। करीब पांच घंटे तक चली बैठक में छात्र नेताओं ने भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दे सरकार के सामने रखे। सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू सहित मंत्रियों की टीम ने छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत की।

सरकार की ओर से दावा किया गया कि छात्रों की लगभग 98 प्रतिशत मांगों को स्वीकार कर लिया गया है। सरकार ने 14वीं JPSC परीक्षा तथा 2023 और 2025 की बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति जताई। इसके साथ ही परीक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित अनियमितताओं की जांच के लिए कई कदम उठाने की बात कही गई।

सरकार ने JPSC से जुड़े मामलों की जांच राज्य की सीआईडी व्यवस्था के माध्यम से समयबद्ध तरीके से कराने का प्रस्ताव रखा है। वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए ईडी से जांच कराने का प्रस्ताव भी सामने आया है। इसके अलावा भर्ती और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए विशेषज्ञों की समिति गठित करने की बात कही गई है।

दो मांगों पर कायम है गतिरोध

सरकार और छात्रों के बीच सबसे बड़ा मतभेद सीबीआई जांच को लेकर है। आंदोलनकारी अभ्यर्थी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराने की मांग पर अड़े हुए हैं।

दूसरा बड़ा मुद्दा JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का है। छात्र इस परीक्षा को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया है। सरकार का कहना है कि CGL भर्ती प्रक्रिया न्यायालय की निगरानी में हुई थी और इसके माध्यम से चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां भी हो चुकी हैं। सरकार ने मामले की जांच के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है।

इन दोनों मांगों पर सहमति नहीं बनने के कारण आंदोलन समाप्त नहीं हो सका और छात्रों ने विधानसभा घेराव का रास्ता अपनाया।

JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफे से बढ़ी हलचल

छात्र आंदोलन के बीच JPSC के तीन सदस्यों अनीमा हांसदा, जमाल अहमद और अजिता भट्टाचार्य के इस्तीफे की खबर ने भी मामले को और गरमा दिया है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों की वास्तविकता सामने लाने के लिए स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराना जरूरी है।

छात्र नेताओं का तर्क है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के विश्वास को बहाल करने के लिए जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए।

विधानसभा के आसपास सुरक्षा का कड़ा घेरा

छात्रों के विधानसभा मार्च को देखते हुए रांची प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। विधानसभा परिसर और उसके आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। प्रदर्शनकारियों को विधानसभा तक पहुंचने से रोकने के लिए कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई थी। कंटीले तारों का भी इस्तेमाल किया गया।

प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। रांची के अलावा दूसरे इलाकों से भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के आंदोलन में शामिल होने की सूचना है।

नौ दिन के अनशन के बाद मार्च में पहुंचे देवेंद्रनाथ महतो

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा से जुड़े देवेंद्रनाथ महतो भी छात्रों के विधानसभा मार्च में शामिल हुए। बताया गया कि नौ दिन के अनशन के बाद वह एंबुलेंस से मार्च स्थल पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील की और छात्रों की मांगों के समर्थन में अपनी बात रखी।

सरकार के दावे और छात्रों के रुख में अंतर

आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सरकार और छात्रों के दावों में अंतर है। सरकार लगातार कह रही है कि उसने आंदोलनकारी छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगें मान ली हैं और कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए हैं। दूसरी ओर छात्र नेताओं का कहना है कि जब तक सीबीआई जांच और JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने जैसी प्रमुख मांगों पर फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा।

SP_Singh AURGURU Editor