सीएपीएफ बिल राज्यसभा से पारित,   अफसरों ने इसे बताया 'ब्लैक बिल',  नौ अप्रैल को राजघाट पर प्रदर्शन

द सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन)' बिल, 2026 बुधवार को राज्यसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। AAPWA ने इसे काला बिल बताया है। संगठन ने कहा कि इसके विरोध में नौ अप्रैल को राजघाट पर शांतिपूर्वक धरना दिया जाएगा।

Apr 1, 2026 - 22:06
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सीएपीएफ बिल राज्यसभा से पारित,   अफसरों ने इसे बताया 'ब्लैक बिल',  नौ अप्रैल को राजघाट पर प्रदर्शन


नई दिल्ली। सीएपीएफ में शामिल सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी से संबंधित 'द सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन)' बिल, 2026 बुधवार को राज्यसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस विधेयक के बारे में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने चर्चा का जवाब देते हुए इसे बलों का बेहतर मैनेजमेंट, प्रमोशन में फायदा और कार्यकुशलता को बढ़ाने वाला बताया। हालांकि अर्धसैनिकों बलों के अधिकारियों के संगठन 'अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन' ने इसे काला बिल बताया है। संगठन ने कहा कि इसके विरोध में नौ अप्रैल को राजघाट पर शांतिपूर्वक धरना दिया जाएगा।

राज्यसभा में बिल पर आठ घंटे तक चर्चा की गई। इस दौरान पक्ष और विपक्ष की तरफ से 36 सदस्यों ने इसमें भाग लिया। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अधिकारियों की सेवा, शर्तों और प्रमोशन से जुड़े इस विधेयक के बारे में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय राज्यसभा में जवाब देते हुए कहा कि यह बलों के हित में लाया गया है। उन्होंने कहा कि बलों के ढांचे की जो परिकल्पना देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने की थी, उसी के अनुरूप ही सीएपीएफ में सेना और आईपीएस अधिकारियों को तैनात किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह अनुभव किया गया है कि भर्ती, पदोन्नति, वरिष्ठता और अन्य सेवा शर्तों के प्रबंधन के लिए एक स्पष्ट व्यापक ढांचा उपलब्ध कराया जाए। जिसके उद्देश्य की पूर्ति के लिए यह विधेयक लाया गया। इससे पुलिस बलों में और बेहतर कैडर मैनेजमेंट और कार्यकुशलता बढ़ सकेगी।

गृह राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस विधेयक से कहीं से भी वित्तीय लाभ बाधित नहीं होंगे। केंद्र सरकार सीएपीएफ अधिकारियों के प्रमोशन, वरिष्ठता आदि के लिए नियम बना सकेगी।

विधेयक पर चर्चा के दौरान कई विपक्षी सदस्यों ने आईपीएस की तुलना में सीएपीएफ अधिकारियों के देर से प्रमोशन मिलने के मसले पर कहा कि इससे उनके प्रमोशन पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
सीएपीएफ में ग्रुप 'ए' में सामान्य तौर पर चार प्रमोशन मिलते हैं जिसमें उम्र के हिसाब से कुछ को पांचवां प्रमोशन भी मिल जाता है।

समय पर प्रमोशन ना मिलने के मामले में उन्होंने कहा कि कुछ मामलों के कोर्ट में विचाराधीन होने, वरिष्ठता को लेकर विवाद और अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसे कारणों से कई बार कुछ अफसरों के प्रमोशन देरी से हो पाते हैं।

मंत्री ने यह भी बताया कि पहले बलों में भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में डेढ़ से दो साल का वक्त लग जाता था, जो की अब घटकर 11 महीने का रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की सीमाओं तथा अंदरूनी सुरक्षा करने वाले सशस्त्र बलों के कर्मियों के हाथों को पहले की कांग्रेस सरकारों ने बांध रखा था। लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने देश की सुरक्षा, अखंडता और संप्रभुता के लिए खतरा पैदा करने वालों पर सख्त से सख्त कार्रवाई के लिए मजबूत अधिकार दिए हैं। उन्होंने कहा कि सीएपीएफ का दायरा निरंतर बढ़ता जा रहा है। ऐसे में जरूरी था कि बलों का सुव्यवस्थित विकास सुनिश्चित किया जाए।

एएपीडब्ल्यूए के अध्यक्ष और सीआरपीएफ से रिटायर्ड एडीजी एचआर सिंह ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि सबसे पहले तो बिल के बारे में सदन में गृह राज्य मंत्री की जगह खुद गृह मंत्री अमित शाह को जवाब देना चाहिए था। उनसे बातें और स्पष्ट होती। सरकार देश से नक्सलवाद खत्म होने का गुणगान कर रही है। लेकिन इसे खत्म करने वालों के वेलफेयर के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए। बिल का हम विरोध करेंगे और राजघाट पर नौ अप्रैल को धरना दिया जाएगा। इसमें स्टेक होल्डर से तो बात ही नहीं की गई। यहीं एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी रणवीर सिंह ने हमारा काम तो संघर्ष करना है। कृषि कानून बिल भी तो वापस हुआ था, देखना यह बिल भी वापस होगा। उन्होंने कहा कि इसका असर पांच राज्यों की विधानसभा चुनावों पर भी पड़ेगा।