करियर की दौड़ में देर से बच्चे, भविष्य की संतान के लिए भ्रूण-एग-स्पर्म फ्रीजिंग का बढ़ा सहारा; एसीई 2026 में बांझपन के बढ़ते मामलों और आधुनिक प्रजनन तकनीकों पर देश-विदेश के विशेषज्ञों का मंथन
आगरा। करियर और उच्च शिक्षा को प्राथमिकता देने के कारण युवाओं में देर से परिवार शुरू करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। ऐसे में भविष्य में संतान प्राप्ति का अवसर सुरक्षित रखने के लिए एग, स्पर्म और भ्रूण फ्रीजिंग का चलन बढ़ रहा है। एसीई 2026 के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने बांझपन के बढ़ते कारणों और प्रजनन चिकित्सा की आधुनिक तकनीकों पर चर्चा की।
मुगल शेरेटन में एकेडमी ऑफ क्लीनिकल एम्ब्रियोलॉजिस्ट की ओर से आयोजित 14वीं एसीई 2026 इंटरनेशनल कांग्रेस के दूसरे दिन विभिन्न वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए। इनमें फर्टिलिटी के क्षेत्र में हो रहे आधुनिक बदलावों, उपचार की नई तकनीकों और फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन पर विशेषज्ञों ने जानकारी साझा की।
कार्यशाला में पत्रकारों से बातचीत करते हुए वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. जयदीप मल्होत्रा और डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा ने बताया कि बदलती जीवनशैली, करियर और उच्च शिक्षा की प्राथमिकताओं के कारण युवाओं में देर से विवाह और परिवार नियोजन की प्रवृत्ति बढ़ी है। इसका असर प्रजनन स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। ऐसे में एग और स्पर्म फ्रीजिंग की ओर युवाओं का रुझान तेजी से बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि एग और स्पर्म फ्रीजिंग उन महिलाओं और पुरुषों के लिए उपयोगी हो सकती है, जो भविष्य में उपयुक्त समय पर माता-पिता बनने की योजना बना रहे हैं। प्रजनन क्षमता को संरक्षित रखने की यह तकनीक परिवार नियोजन के विकल्पों को बढ़ाने में मदद कर सकती है।
भ्रूण को लंबे समय तक सुरक्षित रखने पर शोध
डॉ. जयदीप मल्होत्रा और डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा ने बताया कि भ्रूण फ्रीजिंग अब नई दिशा में आगे बढ़ रही है। वैज्ञानिक भ्रूण की गुणवत्ता को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के साथ उसे अधिक सक्षम बनाए रखने की संभावनाओं पर भी शोध कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक उन दंपतियों के लिए उपयोगी हो सकती है, जो उम्र बढ़ने के कारण गर्भधारण में कठिनाई का सामना करते हैं। भ्रूण को संरक्षित रखने से भविष्य में परिवार शुरू करने के विकल्प को सुरक्षित रखा जा सकता है।
कैंसर उपचार से पहले भी उपयोगी फ्रीजिंग तकनीक
वैज्ञानिक सत्रों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार से पहले फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि कुछ मरीजों में उपचार शुरू होने से पहले एग या स्पर्म को फ्रीज किया जा सकता है, जिससे भविष्य में संतान प्राप्ति का विकल्प सुरक्षित रह सके।
हार्मोनल समस्याओं, आनुवंशिक बीमारियों और अन्य चिकित्सीय कारणों में भी फ्रीजिंग तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसे मामलों में समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
25 से बढ़कर 35 वर्ष तक पहुंची संतान प्राप्ति की उम्र
एसीई के इनकमिंग प्रेसिडेंट डॉ. गौरव मजूमदार ने बताया कि युवाओं में शादी के बाद बच्चे की योजना बनाने का समय बदल गया है। पहले करीब 25 वर्ष की उम्र में संतान प्राप्ति की योजना बनाई जाती थी, जबकि अब करियर और अन्य प्राथमिकताओं के कारण यह उम्र करीब 35 वर्ष तक पहुंच गई है।
उन्होंने कहा कि बांझपन के बढ़ते मामलों के पीछे कुछ वंशानुगत कारणों के साथ तंबाकू, नशे का सेवन और बिगड़ती जीवनशैली भी प्रमुख कारण हैं। इसलिए केवल बांझपन का इलाज कराने पर ध्यान देने के बजाय जीवनशैली को बेहतर रखना भी जरूरी है।
डॉ. मजूमदार ने कहा कि प्रजनन स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और समय पर चिकित्सकीय सलाह भविष्य में आने वाली परेशानियों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
विशेषज्ञों ने साझा की नई तकनीकों की जानकारी
एसीई 2026 के वैज्ञानिक सत्रों में एग, स्पर्म और भ्रूण फ्रीजिंग के अलावा प्रजनन चिकित्सा की अन्य आधुनिक तकनीकों पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने उपचार के बदलते तौर-तरीकों और एम्ब्रियोलॉजी के क्षेत्र में हो रहे नए शोध की जानकारी दी।
कार्यक्रम में एसीई की अध्यक्ष डॉ. सुजाता रामकृष्णन, सचिव डॉ. परशुराम गोपीनाथ, आयोजन सचिव डॉ. केशव मल्होत्रा और आईसीएमआर मुंबई के डॉ. दीपक मोदी मौजूद रहे।