जीएसटी सुधारों को लेकर चैम्बर ने उठाई व्यापारियों की आवाज, स्क्रैप पर आरसीएम और पंपसेट पर 5% कर की मांग
आगरा। राज्य कर विभाग और व्यापारियों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से आयोजित व्यापारी संवाद कार्यक्रम में नेशनल चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स ने जीएसटी से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाते हुए सरकार से व्यावहारिक सुधारों की मांग की। चैम्बर ने स्क्रैप कारोबार को रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (आरसीएम) के अंतर्गत लाने, आपूर्तिकर्ता फर्म का रिस्क स्कोर व्यापारियों के पोर्टल पर प्रदर्शित करने तथा पंपसेट पर जीएसटी दर घटाकर 5 प्रतिशत करने का सुझाव दिया।
राज्य कर विभाग आगरा द्वारा 6 अगस्त 2026 को नेशनल चैम्बर के सभागार में आयोजित व्यापारी संवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल ने की। कार्यक्रम में संयुक्त आयुक्त राज्य कर ए.के. सिंह सहित विभागीय अधिकारियों ने व्यापारियों और उद्यमियों की समस्याओं को सुना। कार्यक्रम का संचालन पूर्व अध्यक्ष एवं जीएसटी प्रकोष्ठ के चेयरमैन अमर मित्तल ने किया।
कार्यक्रम में आगरा आयरन फाउंड्री उद्योग एसोसिएशन, इंजीनियरिंग कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन तथा यूपी डीजल इंजन मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन से जुड़े उद्यमियों ने फाउंड्री उद्योग, मशीनरी निर्माण और जीएसटी से संबंधित समस्याएं रखीं।
स्क्रैप कारोबार में फर्जी व्यापारियों पर रोक की मांग
चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल और जीएसटी प्रकोष्ठ के चेयरमैन अमर मित्तल ने बताया कि स्क्रैप चेन में फर्जी व्यापारियों द्वारा कारोबार कर गायब हो जाने के कारण वास्तविक उद्यमियों को विभागीय कार्रवाई और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इससे ईमानदार व्यापारियों का उत्पीड़न होता है। इस समस्या के समाधान के लिए चैम्बर ने स्क्रैप को आरसीएम के अंतर्गत लाने का सुझाव दिया।
चैम्बर ने यह भी मांग की कि आपूर्तिकर्ता फर्म का रिस्क स्कोर व्यापारी के जीएसटी पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाए, जिससे व्यापारी भी अपने व्यापारिक लेन-देन में सतर्क रह सकें और विभाग के साथ बेहतर समन्वय बना रहे।
पंपसेट पर जीएसटी दर घटाने की मांग
चैम्बर पदाधिकारियों ने बताया कि इंजन पर जीएसटी दर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है, लेकिन सेंट्रीफ्यूगल डीजल वाटर पंपसेट और इसके स्पेयर पार्ट्स पर अभी भी 18 प्रतिशत जीएसटी लागू है। उन्होंने मांग की कि पंपसेट पर भी कर की दर 5 प्रतिशत की जाए।
उन्होंने कहा कि डीजल पंपसेट में इंजन और पंप पर अलग-अलग कर दर होने के कारण संयुक्त उत्पाद बेचने में उद्योगों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा ताज संरक्षित क्षेत्र (टीटीजेड) की प्रतिबंधात्मक व्यवस्थाओं से फाउंड्री उद्योग पर पड़ रहे प्रभाव और लोहे के पंजीयन में आवश्यक नियंत्रण लागू करने का सुझाव भी दिया गया।
उद्यमियों ने रखीं उद्योग की समस्याएं
फाउंड्री एसोसिएशन की ओर से अशोक सिंघल, सुनील सिंघल और शैलेश गुप्ता ने उद्योग से जुड़ी समस्याओं को रखा। इंजीनियरिंग कंपोनेंट उद्योग की ओर से अतुल गोयल और मुकेश जैन ने अपनी समस्याएं और सुझाव प्रस्तुत किए।
राज्य कर विभाग की ओर से संयुक्त आयुक्त ए.के. सिंह, उपायुक्त जितेंद्र कुमार, सत्येंद्र कुमार सिंह, अशोक सिंह और अखंड प्रताप सिंह ने व्यापारियों के सवालों का समाधान करते हुए खुला संवाद किया।
संयुक्त आयुक्त ए.के. सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार व्यापारी हितों को ध्यान में रखते हुए लगातार कार्य कर रही है। ऐसे संवाद कार्यक्रमों से विभाग और व्यापारियों के बीच सीधा संपर्क स्थापित हो रहा है, जिससे भ्रांतियां दूर हो रही हैं और व्यापारियों से मिलने वाले सुझावों के आधार पर जीएसटी नीतियों को बेहतर बनाने में सहायता मिल रही है।
चैम्बर पदाधिकारियों और उद्यमियों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल, उपाध्यक्ष नितेश अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष एवं जीएसटी प्रकोष्ठ चेयरमैन अमर मित्तल, पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र सिंह सहित सुनील सिंघल, संजय कुमार गोयल, अमित जैन, अंशुल अग्रवाल, अतुल गोयाल, उमेश बंसल, मनोज अग्रवाल, मुकेश जैन, अमित, संजय, नवनीत बंसल, दीपक अग्रवाल, आशीष बंसल, शैलेश अग्रवाल, जितेंद्र कुमार गुप्ता, दीपेंद्र बंसल, दिलीप अग्रवाल, अनुराग, विष्णु शर्मा, श्रीकिशन अग्रवाल, शलभ गुप्ता, नितिन गोयल, योगेश सिंघल सहित बड़ी संख्या में उद्यमी उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने किया।