आगरा के पुरानी चुंगी मैदान को 'क्रांति स्थल' घोषित करने की मांग पर मुख्यमंत्री कार्यालय सक्रिय, डीएम से मांगी रिपोर्ट
आगरा। शहर के मोतीगंज-दरेसी नंबर-दो स्थित ऐतिहासिक पुरानी चुंगी मैदान को 'क्रांति स्थल' घोषित करने तथा वहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस और शहीद परशुराम की प्रतिमा स्थापित किए जाने की मांग अब शासन स्तर तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी आगरा से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। प्रशासन ने भी कार्रवाई शुरू करते हुए संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं और प्रार्थनापत्र देने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा के बयान दर्ज किए गए हैं।
प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और महापौर को भेजा था प्रार्थनापत्र
राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमाशंकर शर्मा ने 11 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा आगरा की महापौर हेमलता दिवाकर को प्रार्थनापत्र भेजकर पुरानी चुंगी मैदान को ऐतिहासिक महत्व के आधार पर 'क्रांति स्थल' घोषित करने की मांग की थी।
नेताजी की ऐतिहासिक सभा का किया उल्लेख
प्रार्थनापत्र में दावा किया गया कि मोतीगंज स्थित पुरानी चुंगी का मैदान स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इसमें उल्लेख किया गया कि वर्ष 1940 में आगरा के क्रांतिकारियों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को खून से पत्र लिखकर इसी मैदान में आमंत्रित किया था। इसके बाद नेताजी ने यहां विशाल जनसभा को संबोधित किया और "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" का ऐतिहासिक आह्वान किया, जिससे आगरा में सशस्त्र क्रांति की चेतना को नई दिशा मिली।
1942 में 'करो या मरो' की शपथ का भी दावा
प्रार्थनापत्र में यह भी कहा गया कि 10 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के "करो या मरो" के आह्वान के बाद आगरा के स्वतंत्रता सेनानियों ने इसी मैदान में देश की आजादी के लिए संघर्ष का संकल्प लिया था। इसी दौरान अंग्रेजी हुकूमत द्वारा कथित रूप से गोलीबारी की गई, जिसमें 17 वर्षीय क्रांतिकारी परशुराम शहीद हो गए थे।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने मांगी विस्तृत जांच रिपोर्ट
प्रार्थनापत्र पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने 12 जून 2026 को जिलाधिकारी आगरा को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की जांच कर विस्तृत आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। शासन की ओर से 3 जुलाई 2026 तक रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया है।
प्रशासन ने शुरू की जांच, बयान भी हुए दर्ज
जिलाधिकारी के निर्देश पर उप जिलाधिकारी (राजस्व एवं आपदा) के माध्यम से तहसील प्रशासन ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी क्रम में तहसील कार्यालय के कर्मचारी अंशुल कुमार ने दीवानी परिसर पहुंचकर वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा के बयान दर्ज किए और मामले से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई।
रिपोर्ट पर टिकी आगे की कार्रवाई
अब पूरे मामले में जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। इसके बाद यह तय होगा कि पुरानी चुंगी मैदान के ऐतिहासिक महत्व को लेकर शासन स्तर पर क्या निर्णय लिया जाता है और इसे 'क्रांति स्थल' घोषित करने तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस एवं शहीद परशुराम की प्रतिमाएं स्थापित करने की मांग पर आगे क्या कार्रवाई होती है।