ईरान हमले पर चीन की पैनी नजर, सैटेलाइट से अमेरिकी सेना की पल-पल की लोकेशन ट्रैक कर रहा ड्रैगन, भारत के लिए खतरे की घंटी
चीन सैटेलाइटों के जरिए मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अड्डों की जासूसी कर रहा है। वह अमेरिकी सैन्य उपकरणों की पल-पल की लोकेशन को भी ट्रैक कर रहा है। इससे अमेरिका की टेंशन बढ़ गई है। ये तस्वीरें इतनी साफ है कि अमेरिकी सैन्य अड्डों पर खड़े विमान और मिसाइलें भी साफ नजर आ रही हैं।
बीजिंग। ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमले शुरू होने के बाद से चीनी मिलिट्री सैटेलाइट की तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। इन तस्वीरों में अमेरिकी सैन्य अड्डों की खुफिया जानकारियां भरी पड़ी थीं। इससे चीन की जासूसी करने की क्षमता का अंदाजा लगाया जा रहा है, जो भारत के लिए भी चिंता की बात हो सकती है। ऐसा अंदेशा है कि चीन अमेरिकी सैन्य अड्डे की खुफिया जानकारियों को ईरान के साथ साझा कर रहा है। इन सैटेलाइट तस्वीरों में अमेरिकी सैन्य अड्डों के रियल टाइम हालात को काफी डिटेल के साथ बताया गया है। हालांकि, चीन ने इन सैटेलाइट तस्वीरों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
चीनी सैटेलाइट तस्वीरों में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर रनवे पर खड़े विमान, एयरफील्ड में मौजूद ट्रांसपोर्ट प्लेन और भूमध्य सागर में कहीं लड़ाकू विमानों से भरे एयरक्राफ्ट कैरियर के डेक दिखाई दिए थे। हर सैटेलाइट तस्वीर में बहुत ज्यादा डिटेल थी। अंतरिक्ष से अमेरिकी एयरबेस पर मौजूद विमानों के टाइप को भई पहचाना गया था। मिसाइल डिफेंस सिस्टम को उनके नाम के साथ लोकेट किया गया है। इन सैटेलाइट तस्वीरों में जियोलोकेशन के साथ इतनी जानकारी मौजूद है कि अगर सटीक हमला करने वाली मिसाइल हो तो अमेरिकी सैन्य अड्डा पल भर में नष्ट हो सकता है।
ऐसी ही सैटेलाइट तस्वीरों के एक सेट में अमेरिकी एफ-22 स्टील्थ फाइटर जेट को इजरायल के ओवडा एयरबेस के रैंप पर खड़े दिखाया गया था। दूसरी तस्वीर में सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर एयरक्राफ्ट और सपोर्ट सिस्टम की तैनाती को दिखाया गया था। कई अन्य सैटेलाइट तस्वीरों में कतर, जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे की जासूसी की गई थी। इन तस्वीरों को 200 से भी कम कर्मचारियों वाली एक चीनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी मिजारविजन ने ऑनलाइन शेयर किया था। जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस कंपनी मिजारविजन का ऑफिस चीन के शंघाई में स्थित है।
चीनी कंपनी मिजारविजन को सैटेलाइट इमेजरी मुख्य रूपसे दो स्रोत से मिल रही है। इसमें पहला चीन का जिलिन-1 सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन है। इसे चांग गुआंग सैटेलइट टेक्नोलॉजी ऑपरेट करती है। इस कॉन्स्टेलेशन में 100 से ज़्यादा अर्थ-ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट शामिल हैं। इनमे से कई सैटेलाइट पृथ्वी पर मौजूद एक मीटर से भी कम लंबाई के वस्तु की हाई रिजॉल्यूशन तस्वीरें लेने में सक्षम हैं। ऐसे में इतनी हाई रिजॉल्यूशन की तस्वीरों से एनालिस्ट रनवे पर एयरक्राफ्ट की पहचान कर सकते हैं और अलग-अलग मिसाइल डिफेंस सिस्टम के बीच अंतर बता सकते हैं। इसका दूसरा स्रोत पश्चिमी सैटेलाइट इमेजरी कंपनियां हो सकती हैं, जिनमें वैंटोर, प्लैनेट लैब्स और एयरबस डिफेंस एंड स्पेस शामिल हैं, हालांकि इनकी पुष्टि नहीं है।