नेशनल पेनमैन चैंपियनशिप में गूंजा गीता के 12वें अध्याय का सामूहिक पाठ, हस्तलेखन के साथ संस्कार-संस्कृति का संदेश
आगरा। नेशनल पेनमैन चैंपियनशिप 2026 में हस्तलेखन की प्रतिभा के साथ भारतीय संस्कार और संस्कृति का संदेश भी गूंजा, जब खंदारी स्थित जेपी सभागार में सैकड़ों प्रतिभागियों और उपस्थित लोगों ने श्रीमद्भगवद्गीता के 12वें अध्याय का संस्कृत में सामूहिक पाठ किया। स्वास्तिक हैंडराइटिंग वेलफेयर ट्रस्ट एवं कन्हैया लाल मानिक लाल मुंशी हिंदी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ, डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय के संयुक्त आयोजन में देशभर के प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। गीता पाठ, दिव्यांग बच्चों के योग-नृत्य और हस्तलेखन प्रतियोगिताओं ने समारोह को भारतीय ज्ञान परंपरा, रचनात्मकता और आध्यात्मिक चेतना का अनूठा संगम बना दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यक्रम अध्यक्ष एवं कुलपति प्रो. आशु रानी, मुख्य अतिथि डॉ. सुशील गुप्ता, विशिष्ट अतिथि डॉ. गिरधर शर्मा, डॉ. प्रांजल शर्मा, अनिमेष दयाल एवं शुभी दयाल, कार्यक्रम संयोजक प्रो. प्रदीप श्रीधर, विद्यापीठ के निदेशक तथा स्वास्तिक हैंडराइटिंग वेलफेयर ट्रस्ट के संस्थापक शिशिर मित्तल और अध्यक्ष विनीता मित्तल ने दीप प्रज्वलित कर किया। गणेश वंदना पर नृत्य की प्रस्तुति ने समारोह को भक्तिमय बना दिया।
2020 में शुरू हुई थी प्रतियोगिता
ट्रस्ट की अध्यक्ष विनीता मित्तल ने बताया कि कोविड काल में वर्ष 2020 में प्रतियोगिता की शुरुआत ऑनलाइन स्तर पर हुई थी। तब से लगातार इसका आयोजन किया जा रहा है। इसमें 6 से 60 वर्ष तक के प्रतिभागी शामिल होते हैं। इस वर्ष असम, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों ने ऑनलाइन सहभागिता की।
उन्होंने बताया कि निर्णायक प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए प्रतिभागियों से उनकी कृतियों की वीडियो भी मंगाई जाती है। निर्णायक मंडल में अशोक बत्रा, श्रुति सिन्हा, डॉ. मनोज कुमार, हर्षदा सलगांवकर, डॉ. मंजू गुप्ता, डॉ. आभा सिंह गुप्ता, डॉ. रुपाली खन्ना, दीप्ति जादौन, आरके कपूर, डॉ. सुनीता शर्मा, रितु गोयल और रीनू त्रिवेदी शामिल रहे।
एक स्वर में गूंजा गीता का 12वां अध्याय
समारोह का विशेष आकर्षण गीता मनीषी डॉ. मंजू गुप्ता के मार्गदर्शन में श्रीमद्भगवद्गीता के 12वें अध्याय का संस्कृत में सामूहिक पाठ रहा। खचाखच भरे सभागार में अतिथियों, बच्चों, प्रतिभागियों और दर्शकों ने एक स्वर में गीता के श्लोकों का उच्चारण किया। भक्ति योग से जुड़े इस अध्याय के सामूहिक पाठ ने हस्तलेखन के साथ संस्कार, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने का संदेश दिया।
इसके बाद नीरज कांत शर्मा के निर्देशन में दिव्यांग बच्चों ने योग-नृत्य प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति की भी सराहना की गई।
विभिन्न विधाओं में विजेताओं का सम्मान
इस वर्ष प्रतियोगिता में मिनिएचर गार्डन प्रतियोगिता भी जोड़ी गई, जिसमें जूनियर वर्ग में वेदांश मित्तल और सीनियर वर्ग में हेमलता सिंह प्रथम रहे।
इंग्लिश कर्सिव लेखन में जियांशु सिंह तोमर, दृष्टि गर्ग, आज्ञा शर्मा, मानवी चौधरी एवं निशा सोनी; इंग्लिश प्रिंट लेखन में भव्य गुप्ता, विवान कंसल, अनिरुद्ध चौधरी, अनुभव तिवारी एवं शिल्पी मित्तल; इंग्लिश स्लोगन लेखन में रितिक शर्मा, वेरोनिका सिंह, जानवी वर्मा एवं सारिका गुप्ता प्रथम रहे।
इंग्लिश आर्टिस्टिक पैराग्राफ राइटिंग में श्रेयांश, सिद्धार्थ, वेरोनिका एवं एकता, इंग्लिश निबंध में निवेशिका गौतम एवं कमल कुमार शर्मा, हिंदी सुलेख में नक्षत्र, मालविका, राघव, कीर्ति एवं तन्मोय, संस्कृत श्लोक लेखन में यशिका, धुन, खुशबू एवं खुपनेजियम हरनखोल विजेता रहे।
हिंदी कलात्मक लेखन में मालविका, अनिरुद्ध एवं सायरा, हिंदी निबंध में अनविका, पीहू एवं तन्मोय, ड्राइंग एंड पेंटिंग में जियांशु, रिद्धि, रिद्धिमा, विप्रांश एवं ऐश्वर्या, लिप्पन आर्ट में डॉ. श्वेता अग्रवाल, मंडला में स्तुति एवं रुचिका, जबकि मधुबनी एवं कोलाज में स्तुति एवं ऐश्वर्या प्रथम रहे। कार्यक्रम का संचालन श्रुति दास, अंशिका मित्तल एवं रिया गौतम ने संयुक्त रूप से किया।