‘वोट चोर’ विवाद में कांग्रेसियों की जेल से रिहाई, स्वागत जुलूस में पुलिस से तकरार

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विजय नगर स्थित पैतृक आवास पर 28 सितंबर को कालिख पोतने के मामले में जेल भेजे गए छह कांग्रेसियों को सीजेएम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद रविवार को रिहा कर दिया गया। अदालत ने धारा 307 के आरोप को निराधार मानते हुए हटाने का आदेश दिया था। जेल से बाहर आते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत कर जुलूस निकाला, जिसमें नारेबाजी के दौरान पुलिस से तकरार और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। बाद में कार्यकर्ता जुलूस के साथ शहीद स्मारक पहुंचे।

Oct 4, 2026 - 11:45
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‘वोट चोर’ विवाद में कांग्रेसियों की जेल से रिहाई, स्वागत जुलूस में पुलिस से तकरार
जेल से बाहर आए कांग्रेसी।

आगरा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विजय नगर स्थित पैतृक आवास पर कालिख पोतने के मामले में जेल भेजे गए छह कांग्रेसियों की रविवार को रिहाई हो गई। जिला जेल से बाहर आते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया और जुलूस निकालकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। जुलूस के दौरान नारेबाजी को लेकर पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच कई बार तकरार की स्थिति बनी। कुछ देर के लिए बहस और धक्का-मुक्की जैसे हालात भी नजर आए।

रविवार सुबह कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या जिला जेल के बाहर जुटी थी। जैसे ही छह अभियुक्त जेल से बाहर आए, कार्यकर्ताओं ने उन्हें फूल-मालाएं पहनाकर स्वागत किया। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ता जुलूस के रूप में आगे बढ़े। जुलूस में लगातार नारेबाजी होती रही और पुलिस बल भी मौके पर तैनात रहा।

पुलिस ने जुलूस को नियंत्रित रखने और किसी तरह की अप्रिय स्थिति रोकने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को समझाने का प्रयास किया। इसी दौरान नारेबाजी को लेकर पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते माहौल गर्म हो गया और कुछ समय के लिए पुलिस तथा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तकरार और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। पुलिस अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को संभाला और कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने दिया।

28 सितंबर को हुआ था प्रदर्शन

मामला 28 सितंबर का है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विजय नगर स्थित पैतृक आवास के बाहर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान उनके आवास की दीवार और मुख्य गेट पर कालिख पोत दी गई थी। इसके अलावा स्प्रे से दीवार पर ‘वोट चोर’ और ‘गद्दार’ जैसे शब्द लिखे गए थे। घटना के बाद पुलिस ने हरीपर्वत थाने में कांग्रेस नेता एवं प्रदेश महासचिव (संगठन) आजमगढ़ अनिल यादव, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मथुरा मुकेश धनगर समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। एफआईआर में दंगा, रास्ता रोकने, गृह अतिचार समेत कई धाराएं लगाई गई थीं। इसके साथ ही गंभीर धारा 307 में भी मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले में छह लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इसके बाद सभी अभियुक्त जिला जेल में बंद थे।

सीजेएम कोर्ट में सुनवाई के बाद मिली जमानत

शनिवार को मामले की सुनवाई सीजेएम अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने धारा 307 के आरोप को निराधार मानते हुए उसे हटाने का आदेश दिया। इसके बाद सभी छह अभियुक्तों की जमानत मंजूर कर दी गई। अदालत से जमानत मिलने के बाद रविवार को छहों कांग्रेसियों की जिला जेल से रिहाई हुई। जेल से बाहर आते ही समर्थकों ने उनका स्वागत किया और जुलूस निकालकर शहीद स्मारक तक पहुंचे।

रिहाई के बाद भी गरमाया रहा सियासी माहौल

कांग्रेस नेताओं की रिहाई के बाद समर्थकों में उत्साह नजर आया। कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए जुलूस के साथ आगे बढ़े। वहीं, पुलिस ने पूरे रास्ते सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी और स्थिति पर नजर रखी। नारेबाजी के बीच पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुई तकरार ने कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने कार्यकर्ताओं को समझाकर स्थिति को सामान्य कराया। इसके बाद जुलूस शहीद स्मारक की ओर बढ़ गया। पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस बल तैनात रहा। यह मामला मुख्य चुनाव आयुक्त के पैतृक आवास पर हुए प्रदर्शन और कालिख पोतने की घटना से जुड़ा है। अदालत द्वारा धारा 307 हटाए जाने और छह कांग्रेसियों को जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई ने मामले को एक बार फिर राजनीतिक रूप से चर्चा में ला दिया है।