28 साल बाद बरेली के मोहनलाल हत्याकांड में कोर्ट का फैसला, तीन दोषियों को उम्रकैद; दो हुए बरी

-आरके सिंह- बरेली। बरेली के चर्चित मोहनलाल हत्याकांड में करीब 28 साल बाद अदालत ने फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया है। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट अभय कुमार श्रीवास्तव ने बुधवार को रामगोपाल, जयपाल और नन्हें को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने तीनों दोषियों पर 55-55 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामले में दो अन्य आरोपियों को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया।

Aug 13, 2026 - 13:03
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28 साल बाद बरेली के मोहनलाल हत्याकांड में कोर्ट का फैसला, तीन दोषियों को उम्रकैद; दो हुए बरी

अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी अधिवक्ता स्वतंत्र पाठक ने बताया कि यह मामला बहेड़ी थाना क्षेत्र में 25 अक्टूबर 1998 को हुई मोहनलाल की हत्या से जुड़ा है। आरोप था कि मोहनलाल की हत्या करने के बाद उसके शव को छिपा दिया गया था।

अभियोजन के अनुसार, मोहनलाल बोरिंग का काम करता था। 25 अक्टूबर 1998 को काम के सिलसिले में रामगोपाल, जयपाल और नन्हें उसे घर से अपने साथ बुलाकर ले गए थे। इसके बाद उसकी हत्या कर दी गई और शव को छिपा दिया गया। घटना के बाद मामले की रिपोर्ट थाना बहेड़ी में दर्ज कराई गई।

पुलिस ने मामले में मुकदमा अपराध संख्या 717/1998 दर्ज किया था। आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 364, 302 और 34 के साथ एससी/एसटी अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया गया।

मामला लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया में रहने के बाद बुधवार को विशेष न्यायालय में सुनवाई के दौरान फैसला आया। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट अभय कुमार श्रीवास्तव ने उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद रामगोपाल, जयपाल और नन्हें को हत्या का दोषी माना।

अदालत ने रामगोपाल (65) निवासी राजनगर, जयपाल (60) निवासी राजनगर और नन्हें (62) निवासी जामरंजन, थाना क्योलड़िया को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही तीनों दोषियों पर 55-55 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया।

वहीं, मामले में आरोपी बनाए गए दो अन्य लोगों को अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।

28 साल पुराने इस हत्याकांड में अदालत के फैसले के बाद मामले की लंबी न्यायिक प्रक्रिया का अंत हो गया। अभियोजन पक्ष ने अदालत के फैसले को महत्वपूर्ण बताया।

SP_Singh AURGURU Editor