यूपी में नकली दवाओं के नेटवर्क पर शिकंजा, आगरा में 3.63 करोड़ की अवैध दवाएं जब्त

यूपी में नकली और अवैध दवाओं के खिलाफ एफएसडीए की कार्रवाई तेज हो गई है। आगरा में 3.63 करोड़ रुपये से अधिक की दवाएं जब्त की गई हैं, जबकि लखनऊ में करोड़ों रुपये की संदिग्ध खरीद और फर्जी बिलिंग का मामला सामने आया है। 39.20 लाख Zoryl M1 टैबलेट का हिसाब नहीं मिलने और 8.87 करोड़ रुपये की दवाओं की कागजी खरीद के आरोपों ने जांच को गंभीर बना दिया है। अमीनाबाद थाने में चार आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

Aug 13, 2026 - 16:15
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यूपी में नकली दवाओं के नेटवर्क पर शिकंजा, आगरा में 3.63 करोड़ की अवैध दवाएं जब्त

आगरा/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नकली और अवैध दवाओं के कारोबार के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। आगरा समेत प्रदेश के कई जिलों में दवाओं की संदिग्ध खरीद-बिक्री और कागजी लेनदेन की जांच तेज कर दी गई है। आगरा में अब तक 3.63 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की अवैध और नकली दवाएं जब्त की जा चुकी हैं। वहीं लखनऊ में जांच के दौरान नकली दवाओं के एक संगठित नेटवर्क से जुड़े गंभीर वित्तीय और दस्तावेजी फर्जीवाड़े के आरोप सामने आए हैं।

करोड़ों की दवाओं की कागजों में खरीद

एफएसडीए की जांच में आरोप है कि कुछ दवा फर्मों ने वास्तविक रूप से दवाओं की आपूर्ति किए बिना ही करोड़ों रुपये की खरीद-बिक्री और क्रॉस-बिलिंग कागजों पर दिखाई। जांच के घेरे में लखनऊ की हेल्थ प्लस, एमके फार्मा, राम फार्मा और पैशन्ट केयर सर्जिकल हाउस जैसी फर्में हैं। इन पर जांच में करीब 8.87 करोड़ रुपये की दवाओं की खरीद कागजों में दिखाए जाने का आरोप है। इनमें से बड़ी मात्रा में दवाओं की वास्तविक आपूर्ति और उपलब्धता का हिसाब नहीं मिलने से संदेह और गहरा गया है।

39.20 लाख Zoryl M1 टैबलेट का हिसाब नहीं

जांच के दौरान Zoryl M1 टैबलेट की करीब 39.20 लाख गोलियों का हिसाब नहीं मिलने का दावा किया गया है। इसके अलावा Augmentin और Dexorange Syrup की संदिग्ध खरीद भी सामने आई है। एफएसडीए की पड़ताल में संबंधित दवा निर्माताओं से भी जानकारी ली गई। आरोप है कि निर्माताओं ने इन दवाओं की संबंधित फर्मों को बिक्री किए जाने से इनकार किया। ऐसे में जांच एजेंसियों को आशंका है कि दवाओं की खरीद-बिक्री का बड़ा हिस्सा केवल दस्तावेजों में दिखाकर फर्जी बिलिंग और कागजी लेनदेन किया गया।

बंद फर्म से भी हुआ कागजी कारोबार

जांच में एक बंद फर्म के जरिए कथित तौर पर फर्जी खरीद और कागजी लेनदेन किए जाने की बात सामने आई है। इससे आशंका है कि दवाओं के वास्तविक स्रोत को छिपाने और फर्जी बिलों के जरिए कारोबार को वैध दिखाने का प्रयास किया गया। एफएसडीए अब यह पता लगाने में जुटा है कि कागजों में दिखाई गई दवाएं वास्तव में कहां से आईं, किसे बेची गईं और उनका इस्तेमाल कहां किया गया। नकली अथवा काउंटरफिट दवाओं को बाजार में खपाए जाने की आशंका को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है।

अमीनाबाद थाने में चार आरोपियों पर मुकदमा

लखनऊ के अमीनाबाद थाने में चार आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। पुलिस और औषधि प्रशासन की जांच में फर्जी बिलिंग, क्रॉस-बिलिंग और संदिग्ध दवा कारोबार से जुड़े दस्तावेजों को अहम साक्ष्य माना जा रहा है। अब आरोपियों से जुड़े कारोबारी नेटवर्क, दवा सप्लाई चैन और बैंकिंग लेनदेन की भी पड़ताल की जा सकती है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि यह पूरा नेटवर्क केवल कागजी फर्जीवाड़े तक सीमित था या इसके जरिए नकली और काउंटरफिट दवाओं को वास्तविक बाजार में पहुंचाया गया।

आगरा में भी लगातार कार्रवाई

आगरा में एफएसडीए की कार्रवाई के दौरान अब तक 3.63 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की अवैध और नकली दवाएं जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। विभाग की कार्रवाई से दवा कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है। संदिग्ध दवाओं के नमूने लेकर उनकी जांच कराई जा रही है और संबंधित फर्मों के दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है।

अंतरराज्यीय नेटवर्क पर नजर

एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय नकली दवा नेटवर्क पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को दवा की खरीद, सप्लाई, बिलिंग और स्टॉक का मिलान करने के साथ संदिग्ध फर्मों की गतिविधियों पर नजर रखने को कहा गया है। विभाग की ओर से यह भी निर्देश दिए गए हैं कि जांच में दोषी पाए जाने वाले कारोबारियों के दवा लाइसेंस निरस्त करने के साथ आपराधिक कार्रवाई की जाए। इससे साफ है कि प्रदेश में नकली और अवैध दवाओं के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई अब केवल जब्ती तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे सप्लाई नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन की जांच की जाएगी।