व्हाट्सऐप के जरिए 30 लाख की साइबर ठगी, फर्जी आईडी बनाकर रची गई साजिश

आगरा में व्हाट्सऐप के जरिए 30 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित रजत शर्मा की शिकायत के अनुसार फर्जी आईडी बनाकर मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करते हुए ठगी की गई और रकम RTGS के जरिए जय दुर्गा एंटरप्राइजेज के खाते में पहुंची। साइबर क्राइम थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस बैंक ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर, व्हाट्सऐप आईडी और अन्य डिजिटल सुरागों की जांच कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

Aug 22, 2026 - 19:44
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व्हाट्सऐप के जरिए 30 लाख की साइबर ठगी, फर्जी आईडी बनाकर रची गई साजिश

जय दुर्गा एंटरप्राइजेज के खाते में पहुंची 30 लाख रुपये की रकम, पीड़ित की तहरीर पर साइबर क्राइम थाने में मुकदमा, अज्ञात आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस

आगरा। साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। आगरा में व्हाट्सऐप के जरिए कथित तौर पर 30 लाख रुपये की साइबर ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि जालसाजों ने फर्जी आईडी तैयार कर मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया और पीड़ित को अपने जाल में फंसाकर बड़ी रकम आरटीजीएस के जरिए एक खाते में ट्रांसफर करा ली। मामले में पीड़ित रजत शर्मा की तहरीर पर साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। एफआईआर में आरोपी अज्ञात बताए गए हैं। मुकदमा दर्ज होने के बाद साइबर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

व्हाट्सऐप के जरिए बनाया गया संपर्क

पुलिस के मुताबिक, शिकायत में व्हाट्सऐप के माध्यम से साइबर ठगी किए जाने का आरोप लगाया गया है। जालसाजों ने कथित तौर पर फर्जी आईडी बनाकर मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया। इसके बाद पीड़ित से संपर्क कर उसे ऐसी स्थिति में पहुंचाया गया, जहां से 30 लाख रुपये की रकम आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर हो गई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि व्हाट्सऐप पर इस्तेमाल की गई आईडी किसकी थी और जिस मोबाइल नंबर से संपर्क किया गया, उसका वास्तविक इस्तेमाल कौन कर रहा था।

आरटीजीएस से जय दुर्गा एंटरप्राइजेज के खाते में पहुंची रकम

शिकायत में सबसे अहम सुराग बैंक ट्रांजेक्शन को माना जा रहा है। आरोप है कि ठगी की 30 लाख रुपये की रकम आरटीजीएस के जरिए जय दुर्गा एंटरप्राइजेज के खाते में पहुंची। अब साइबर पुलिस बैंक खाते की पूरी ट्रांजेक्शन हिस्ट्री खंगाल रही है। रकम खाते में पहुंचने के बाद उसे निकाला गया या किसी दूसरे खाते में ट्रांसफर किया गया, इसकी भी जांच की जा रही है। पुलिस इस बात का पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बैंक खाते के वास्तविक संचालक और साइबर ठगी करने वाले लोगों के बीच क्या संबंध है।

30 लाख की ठगी के पीछे कौन?

मामले की जांच में पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि 30 लाख रुपये की ठगी के पीछे आखिर कौन है? पुलिस व्हाट्सऐप अकाउंट, मोबाइल नंबर, बैंक खाते और आरटीजीएस ट्रांजेक्शन को आपस में जोड़कर पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। साइबर पुलिस डिजिटल सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। मोबाइल नंबर की जानकारी, बैंक खाते की केवाईसी, ट्रांजेक्शन के बाद की गतिविधियां और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

फर्जी आईडी और मोबाइल नंबर की भी जांच

शिकायत में फर्जी आईडी बनाकर मोबाइल नंबर के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया गया है। ऐसे में पुलिस यह पता लगाएगी कि नंबर किस दस्तावेज के आधार पर जारी हुआ था और उसका इस्तेमाल वास्तविक रूप से किस व्यक्ति ने किया। साइबर पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं आरोपी ने किसी दूसरे व्यक्ति के दस्तावेज या पहचान का इस्तेमाल कर मोबाइल नंबर और बैंकिंग व्यवस्था को तो नहीं चलाया।

बैंक ट्रांजेक्शन से खुल सकता है पूरा राज

साइबर अपराध के मामलों में बैंक ट्रांजेक्शन महत्वपूर्ण सुराग साबित होते हैं। पुलिस अब 30 लाख रुपये की रकम के ट्रांसफर से लेकर उसके आगे के लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। यदि रकम आगे किसी अन्य खाते में भेजी गई है तो उस खाते की भी जांच की जाएगी। पुलिस को उम्मीद है कि बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों के जरिए आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा

पीड़ित रजत शर्मा की तहरीर के आधार पर साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। एफआईआर में फिलहाल आरोपियों की पहचान नहीं हो सकी है, इसलिए उन्हें अज्ञात बताया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।