एसीई 2026 में आधुनिक प्रजनन तकनीकों पर महामंथनः फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन में आधुनिक तकनीकों का बड़ा असर, अंडे-शुक्राणु और भ्रूण फ्रीजिंग की सफलता दर 10-15 से बढ़कर 30-35 प्रतिशत तक पहुंची
आगरा। बदलती जीवनशैली, करियर प्राथमिकताओं, बढ़ती उम्र में मातृत्व-पितृत्व की योजना और प्रजनन क्षमता पर पड़ रहे पर्यावरणीय प्रभावों के बीच फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। इसी दिशा में आगरा के मुगल शेरेटन में आयोजित 14वीं एसीई 2026 कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश से आए विशेषज्ञों ने आधुनिक प्रजनन चिकित्सा तकनीकों पर गहन मंथन किया। एकेडमी ऑफ क्लीनिकल एम्ब्रियोलॉजिस्ट (एसीई) की ओर से आयोजित सम्मेलन के वैज्ञानिक सत्रों में अंडे, शुक्राणु और भ्रूण को सुरक्षित रखने की तकनीकों के साथ ब्लास्टोसिस्ट डेवलपमेंट, माइक्रोमैनिपुलेशन, अल्ट्रा-फास्ट विट्रिफिकेशन, स्पर्म चयन, बायोप्सी वैलिडेशन और एम्ब्रियो विजुअलाइजेशन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने लाइव डेमो के माध्यम से आधुनिक आईवीएफ लैब तकनीकों की बारीकियां भी समझाईं।
कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने बताया कि बदलती जीवनशैली और देर से परिवार शुरू करने की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन आज प्रजनन चिकित्सा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अंडे, शुक्राणु और भ्रूण को भविष्य के लिए संरक्षित किया जा सकता है। विशेष रूप से भ्रूण संरक्षण को बेहतर प्रेग्नेंसी अवसर उपलब्ध कराने वाली प्रभावी तकनीक के रूप में रेखांकित किया गया।
लैब तकनीक में सुधार से बढ़ी फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन की सफलता
कंसल्टिंग डायरेक्टर एम्ब्रियोलॉजी डॉ. राजीव शर्मा ने फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन के क्षेत्र में हो रही तकनीकी प्रगति की जानकारी साझा करते हुए बताया कि आधुनिक तकनीकों और नए उपकरणों के इस्तेमाल से अंडे, शुक्राणु और भ्रूण को फ्रीज यानी संरक्षित करने की सफलता दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उनके अनुसार पहले जहां सफलता दर लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक सीमित थी, वहीं आधुनिक तकनीकों के चलते अब यह बढ़कर 30 से 35 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए भारत में आईवीएफ लैब्स को और अधिक उन्नत करने की जरूरत है। विशेष रूप से भारतीय परिस्थितियों में लैब के वातावरण को नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण है। भारत में अधिक तापमान और आर्द्रता आईवीएफ लैब्स के लिए बड़ी चुनौती है। अंडे, शुक्राणु और भ्रूण के संरक्षण के दौरान तापमान और नमी का संतुलन बनाए रखना उनकी गुणवत्ता को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
डॉ. राजीव शर्मा ने कहा कि पश्चिमी देशों की जलवायु परिस्थितियां भारत से अलग हैं। इसलिए भारतीय आईवीएफ लैब्स में स्थानीय मौसम और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए विशेष तकनीकी व्यवस्थाएं विकसित करने की आवश्यकता है। लैब के तापमान, आर्द्रता और अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों पर बेहतर नियंत्रण से संरक्षित जैविक सामग्री की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ उपचार के परिणामों को भी बेहतर किया जा सकता है।
प्रदूषण और तनाव भी प्रजनन क्षमता के लिए चुनौती
वैज्ञानिक सत्रों में विशेषज्ञों ने बदलती जीवनशैली के प्रजनन स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभावों पर भी चर्चा की। विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण, तनाव, अनियमित जीवनशैली और बढ़ती उम्र में परिवार शुरू करने की प्रवृत्ति पुरुषों और महिलाओं दोनों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में समय रहते फर्टिलिटी संबंधी जांच और आवश्यक चिकित्सा सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
सम्मेलन में अंडे, शुक्राणु और भ्रूण फ्रीजिंग के साथ ब्लास्टोसिस्ट डेवलपमेंट पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। माइक्रोमैनिपुलेशन तकनीक और अल्ट्रा-फास्ट विट्रिफिकेशन के माध्यम से जैविक सामग्री के संरक्षण की आधुनिक प्रक्रिया पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि अत्याधुनिक तकनीकों के कारण प्रजनन चिकित्सा के क्षेत्र में उपचार की संभावनाएं लगातार बेहतर हो रही हैं।
लाइव डेमो में समझीं आधुनिक आईवीएफ लैब तकनीकें
कॉन्फ्रेंस के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को लाइव डेमो के माध्यम से आधुनिक लैब तकनीकों की कार्यप्रणाली समझाई। स्पर्म चयन, बायोप्सी वैलिडेशन और एम्ब्रियो विजुअलाइजेशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी वैज्ञानिक व्याख्यान हुए। इन सत्रों में चिकित्सकों, एम्ब्रियोलॉजिस्ट और मेडिकल छात्रों को नई तकनीकों के व्यावहारिक पहलुओं से रूबरू कराया गया।
आयोजन सचिव डॉ. केशव मल्होत्रा ने बताया कि एसीई 2026 कॉन्फ्रेंस में देशभर से एक हजार से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में 14 फैकल्टी सदस्य भी शामिल रहे। जापान, ऑस्ट्रेलिया और ग्रीस सहित विभिन्न देशों से आए डॉक्टरों, एम्ब्रियोलॉजिस्ट और मेडिकल छात्रों ने वैज्ञानिक सत्रों में भाग लिया और विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद कर आधुनिक प्रजनन तकनीकों की जानकारी हासिल की।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य प्रजनन चिकित्सा और एम्ब्रियोलॉजी के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम तकनीकी विकास को विशेषज्ञों, चिकित्सकों और विद्यार्थियों तक पहुंचाना तथा अत्याधुनिक लैब तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग को बढ़ावा देना है।
एसीई 2026 के वैज्ञानिक सत्रों में विशेषज्ञों की चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि आने वाले समय में फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन और आधुनिक एम्ब्रियोलॉजी तकनीकें प्रजनन चिकित्सा के क्षेत्र में और महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। बेहतर लैब प्रबंधन, अत्याधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित विशेषज्ञों के समन्वय से उपचार के परिणामों को और बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा सकता है।