आगरा में गजानन स्वरूप में हुए श्रीजगन्नाथ के दिव्य दर्शन, 251 कलशों से महाअभिषेक में उमड़ी आस्था

आगरा। भगवान श्रीजगन्नाथ के प्राकट्योत्सव पर आयोजित महाअभिषेक महोत्सव (देव स्नान पूर्णिमा) में सोमवार को लोहामंडी स्थित महाराजा अग्रसेन भवन भक्तिरस में डूब गया। विभिन्न पवित्र तीर्थों के जल, पंचामृत, दुग्ध और फलों के रस से 251 कलशों द्वारा भगवान श्रीजगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र का महाअभिषेक किया गया। अभिषेक के उपरांत भगवान ने वर्ष में एक बार होने वाले गजानन (हाथी वेश) स्वरूप में भक्तों को दर्शन दिए। भगवान के पट खुलते ही जय जगन्नाथ और हरे कृष्ण, हरे राम के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति के सागर में डूब गए।

Jun 29, 2026 - 19:37
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आगरा में गजानन स्वरूप में हुए श्रीजगन्नाथ के दिव्य दर्शन, 251 कलशों से महाअभिषेक में उमड़ी आस्था
भगवान श्रीजगन्नाथ के प्राकट्योत्सव पर आयोजित महाअभिषेक महोत्सव की एक झलक।

महाभिषेक महोत्सव में भाव विभोर भक्तजन। 

अंतर्राष्ट्रीय श्रीकृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) द्वारा आयोजित महाअभिषेक महोत्सव में सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भगवान श्रीजगन्नाथ को चंद्रमा के समान धवल वस्त्रों से अलंकृत कर गजानन स्वरूप में सजाया गया। मृदंग, मंजीरों और हरिनाम संकीर्तन के बीच श्रद्धालु झूमते रहे। शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर हर भक्त स्वयं को धन्य महसूस कर रहा था।

महाअभिषेक का अनुष्ठान वृंदावन इस्कॉन से पधारे राधेश्याम महाराज, प्रबोधानंद सरस्वती स्वामी, देशावतार प्रभुजी, श्रीभक्ति आश्रय, वैष्णव स्वामी महाराज, पंचतत्व प्रभुजी, केशव मुरारी प्रभुजी, हरविजय प्रभुजी, बैकुण्ठ प्रभुजी तथा आगरा इस्कॉन के अध्यक्ष अरविंद प्रभु के सान्निध्य में संपन्न हुआ। गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा और उड़ीसा की महानदी सहित विभिन्न पवित्र तीर्थों के जल, पंचामृत, दुग्ध एवं फलों के रस के 251 कलशों से भगवान का अभिषेक किया गया। इसके पश्चात भगवान का गजानन स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया तथा 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया।

महाअभिषेक से पूर्व सुबह 11 बजे भगवान श्रीजगन्नाथ को मंदिर से सुसज्जित पालकी में विराजमान कर मृदंग, मंजीरों और हरिनाम संकीर्तन के साथ शोभायात्रा के रूप में महाराजा अग्रसेन भवन लाया गया। यहां मंगलाचरण, गीत गोविंद, तुलसी स्तवन तथा षोडशोपचार पूजन के साथ वैदिक मंत्रोच्चार द्वारा भगवान का आवाहन किया गया।

आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण श्रीहरि के नाम की मेहंदी रही। भक्तों के माथे पर चंदन तिलक लगाकर स्वागत किया गया। बच्चों एवं श्रद्धालुओं के लिए भगवान श्रीजगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र के विग्रहों का प्रतीकात्मक अभिषेक करने की व्यवस्था भी की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु गोपी वेश एवं धोती-कुर्ता धारण कर महोत्सव में शामिल हुए।

इस्कॉन यूथ फोरम से जुड़े विभिन्न विद्यालयों के 50 से अधिक विद्यार्थियों ने मृदंग और मंजीरों की मधुर ध्वनि पर भक्तिमय सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। "हरे कृष्ण, हरे राम" के संकीर्तन पर पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया और श्रद्धालु भी कीर्तन में शामिल होकर झूम उठे।

आयोजकों ने बताया कि देव स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान श्रीजगन्नाथ को अस्वस्थ माना जाता है। इसलिए अब 14 जुलाई तक उन्हें चावल और रोटी का भोग नहीं लगाया जाएगा। इस अवधि में भगवान को खिचड़ी, दलिया, च्यवनप्राश, विभिन्न प्रकार के काढ़े एवं औषधीय प्रसाद अर्पित किए जाएंगे। इस दौरान भगवान के दर्शन भी बंद रहेंगे। 15 जुलाई को नवयौवन वेश (नवयौवन उत्सव) में भगवान पुनः भक्तों को दर्शन देंगे और 16 जुलाई को बल्केश्वर स्थित महादेव मंदिर से भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर जितेन चौहान, डीसीपी अभिषेक अग्रवाल, मानसी अग्रवाल, महापौर हेमलता दिवाकर, नितेश अग्रवाल, आशु मित्तल, कामता प्रसाद अग्रवाल, दिनेश अग्रवाल, शैलेश बंसल, डॉ. विजय किशोर बंसल, छोटेलाल बंसल, सोम मित्तल, अर्पित मित्तल, गौरव बंसल, डॉ. सी. डी. अग्रवाल, मोहनलाल अग्रवाल, सुरेश चंद्र गर्ग, विकास बंसल, महेश अग्रवाल, मनीष बंसल, लड्डू भाई, उमेश गर्ग सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor