डीईआई में गणित शिक्षण को एआई से नया रूप देने की कवायद, पांच दिवसीय रीडिजाइनिंग क्लासरूम मैथमेटिक्स कार्यशाला में 100 प्रतिभागी, गणित, मनोविज्ञान, आधुनिक शिक्षण पद्धति और एआई पर मंथन

आगरा। दयालबाग शिक्षण संस्थान (डीईआई) में गणित शिक्षण को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप पुनर्परिभाषित करने के उद्देश्य से पांच दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला “रीडिजाइनिंग क्लासरूम मैथमेटिक्स: पेडागॉजी, साइकोलॉजी एंड द पावर ऑफ एआई” का सोमवार को शुभारंभ हुआ। गणित विभाग द्वारा एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज-दयालबाग शिक्षण संस्थान-एकेडमिक एंड एडमिनिस्ट्रेटिव डेवलपमेंट सेंटर (एआईयू-डीईआई-एएडीसी) के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला 5 से 9 अक्टूबर तक हाइब्रिड मोड में चल रही है, जिसमें करीब 100 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।

Oct 5, 2026 - 20:06
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डीईआई में गणित शिक्षण को एआई से नया रूप देने की कवायद, पांच दिवसीय रीडिजाइनिंग क्लासरूम मैथमेटिक्स कार्यशाला में 100 प्रतिभागी, गणित, मनोविज्ञान, आधुनिक शिक्षण पद्धति और एआई पर मंथन
डीईआई में आयोजित रीडिजाइनिंग क्लासरूम मैथमेटिक्स कार्यशाला की एक झलक।

कार्यशाला का उद्देश्य समकालीन शिक्षण पद्धतियों, शिक्षार्थी मनोविज्ञान, अनुभवात्मक एवं गतिविधि आधारित अधिगम, नए कक्षा प्रयोगों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की संभावनाओं को गणित शिक्षण से जोड़ना है। इसमें शिक्षार्थियों की विविध आवश्यकताओं के अनुरूप गणित को अधिक रोचक, अर्थपूर्ण, सुगम और शिक्षार्थी-केंद्रित बनाने वाली शिक्षण पद्धतियों के विकास पर जोर दिया जा रहा है। शिक्षकों को गणित शिक्षा की पारंपरिक पद्धतियों पर नए दृष्टिकोण से विचार करने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।

उद्घाटन सत्र की शुरुआत संस्थान प्रार्थना से हुई। कार्यशाला के संयोजक प्रो. गुर सरन ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसके बाद डॉ. ए. पी. त्यागी ने कार्यशाला के मुख्य अतिथि एवं दयालबाग शिक्षण संस्थान के निदेशक प्रो. सी. पटवर्धन का परिचय कराया।

अपने उद्घाटन संबोधन में प्रो. सी. पटवर्धन ने गणित, प्रौद्योगिकी, विज्ञान और नवाचार के अंतर्संबंध पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि गणित केवल कक्षा तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि आधुनिक प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक विकास और आसपास की दुनिया को समझने की मौलिक भाषा है। प्रकृति, ब्रह्मांड, विज्ञान और क्वांटम जगत के उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने गणित की सुंदरता और उसकी व्यापकता को समझाया।

उन्होंने “क्या ईश्वर एक गणितज्ञ हैं?” (Is God a Mathematician?) जैसे विचारोत्तेजक प्रश्न के माध्यम से प्रतिभागियों को गणित को प्रकृति और वास्तविकता में मौजूद प्रतिरूपों एवं संरचनाओं को समझने के सशक्त माध्यम के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया। उनका व्याख्यान प्रतिभागियों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी रहा।

उद्घाटन सत्र का समापन प्रो. कमल श्रीवास्तव के धन्यवाद ज्ञापन के बाद विश्वविद्यालय गीत के साथ हुआ। इस अवसर पर डीईआई के कुलसचिव प्रो. संजीव स्वामी और कोषाध्यक्ष श्रीमती स्नेह बिजलानी भी उपस्थित रहीं।

उद्घाटन सत्र का समन्वयन कार्यशाला की सह-संयोजक डॉ. सौम्या सिन्हा ने किया। आयोजन में सह-संयोजक डॉ. स्वांति सत्संगी गुप्ता तथा एआईयू-डीईआई-एएडीसी की नोडल ऑफिसर प्रो. ज्योति गोगिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा। पांच दिवसीय कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और शिक्षण-व्यवहार से जुड़े अनुभवी प्रतिभागियों के माध्यम से गणित शिक्षण में नवीन शैक्षणिक दृष्टिकोणों तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एकीकरण पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।

SP_Singh AURGURU Editor