मोबाइल के लॉक से लेकर मन के तनाव तक, मुनिश्री समत्व सागर ने युवाओं को दिखाई खुशहाल जीवन की राह

आगरा। छीपीटोला स्थित निर्मल सेवा सदन में जैन दर्शन, आध्यात्मिकता और आत्म-विकास पर आधारित ‘वंडरफुल जैनिज्म-4’ का विशेष सत्र ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता के बीच आयोजित हुआ। मुनिश्री 108 समत्व सागर जी महाराज के ओजस्वी प्रवचनों से सजे इस सत्र में आगरा के बड़ी संख्या में युवा, युवतियां, महिलाएं और पुरुष शामिल हुए। सभागार युवाओं से खचाखच भरा रहा और पूरे उत्साह के साथ युवाओं ने एक स्वर में “प्राउड टू बी ए जैन!” का उद्घोष किया। मुनिश्री ने युवाओं में बढ़ते तनाव, चिंता, बेचैनी और अवसाद से लेकर मोबाइल की बढ़ती लत और अभिभावकों से चीजें छिपाने की प्रवृत्ति तक पर बेहद सरल और व्यावहारिक तरीके से बात की।

Aug 10, 2026 - 13:38
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मोबाइल के लॉक से लेकर मन के तनाव तक, मुनिश्री समत्व सागर ने युवाओं को दिखाई खुशहाल जीवन की राह
निर्मल सेवा सदन, छीपीटोला में वंडरफुल जैनिज्म-4 के विशेष सत्र में श्रद्धालुओं को संबोधित करते जैन मुनिश्री 108 समत्व सागर जी महाराज।

कार्यक्रम की शुरुआत में चंद्रदीप जैन और अभय कुमार जैन (हवोवा परिवार) ने पूज्य मुनि श्री का पाद प्रक्षालन किया। संयुक्त धर्मसभा में मुनि श्री 108 समत्व सागर जी महाराज ने युवाओं को जीवन की वास्तविक खुशी और मानसिक शांति का रास्ता समझाया। उन्होंने कहा कि अनावश्यक मानसिक बोझ से स्वयं को मुक्त रखकर ही वास्तविक प्रसन्नता प्राप्त की जा सकती है।

मुनिश्री ने जैन दर्शन के छह आवश्यक जीवन-सूत्रों—देव दर्शन, दान, पूजा, गुरु उपासना, संयम और तप—को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि ये केवल धार्मिक क्रियाएं नहीं, बल्कि व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, संतुलन, आत्मनियंत्रण और मानसिक शांति लाने वाले प्रभावी माध्यम हैं।

मोबाइल से रोज एक घंटा दूरी बनाने का संदेश

युवाओं को संबोधित करते हुए मुनिश्री ने डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल मोबाइल और इंटरनेट के अत्यधिक इस्तेमाल पर विशेष रूप से बात की। उन्होंने युवाओं से प्रतिदिन कम से कम एक घंटा मोबाइल से दूरी बनाने तथा सोने से पहले इंटरनेट और मोबाइल का प्रयोग पूरी तरह बंद करने का आग्रह किया।

उन्होंने मोबाइल में लगाए जाने वाले लॉक का उदाहरण देते हुए युवाओं से पूछा कि कितने लोगों के मोबाइल में लॉक है और कितने ऐसे हैं जिनके माता-पिता भी वह लॉक नहीं खोल सकते। इस सवाल पर सभागार में युवाओं की प्रतिक्रिया के बाद मुनिश्री ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने मोबाइल को लेकर इतना चिंतित रहता है कि माता-पिता के हाथ में पहुंचने पर परेशानी महसूस करे, तो यह सोचने का विषय है कि आखिर फोन में ऐसा क्या छिपाया जा रहा है।

उन्होंने युवाओं को समझाया कि माता-पिता से छिपाकर की जाने वाली अनेक गतिविधियां आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकती हैं। उनके संदेश का केंद्र यह था कि जीवन में पारदर्शिता, संयम और सही संगति मानसिक शांति के लिए बेहद जरूरी है।

आप खुश होना चाहते हैं तो संगति पर भी ध्यान दें’

मुनिश्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में खुशी केवल बाहरी साधनों से नहीं मिलती। इसके लिए व्यक्ति को अपनी सोच, आदतों और संगति पर भी ध्यान देना पड़ता है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को केवल इसलिए नकारना जरूरी नहीं कि वह जीवन में परेशानी पैदा कर रहा है, बल्कि जरूरत यह समझने की है कि किस परिस्थिति में किसका साथ दिया जाए और किन चीजों से स्वयं को बचाया जाए।

उन्होंने युवाओं को यह भी समझाया कि जो चीजें माता-पिता से छिपाकर की जाती हैं और जिनके सामने हमेशा पकड़े जाने का डर बना रहता है, वे मन पर लगातार बोझ डालती हैं। यही मानसिक दबाव आगे चलकर तनाव और बेचैनी का कारण बन सकता है।

कहने वाले नहीं, करके दिखाने वाले मुनिराज

‘वंडरफुल जैनिज्म-4’ का यह सत्र इसलिए भी खास रहा कि युवाओं को प्रेरणा देने वाले मुनि श्री समत्व सागर जी महाराज स्वयं कॉरपोरेट जीवन की चकाचौंध और आधुनिक सुख-सुविधाओं को करीब से देख चुके हैं। मुनिश्री ने मोटोरोला और गूगल जैसी कंपनियों में कार्य किया, अमेरिका में सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन जिया और बेंगलुरु तथा पुणे जैसे महानगरों में कॉरपोरेट जीवन का अनुभव लिया। इसके बाद उन्होंने सांसारिक सुख-सुविधाओं का त्याग कर संयम का मार्ग अपनाया। यही कारण रहा कि उनके प्रवचनों में युवाओं को केवल सैद्धांतिक बातें नहीं, बल्कि जीवन के वास्तविक अनुभवों से निकला संदेश सुनने को मिला।

कार्यक्रम में यह बात भी विशेष रूप से सामने आई कि सामान्यतः युवाओं को प्रेरित करने के लिए प्रोफेशनल मोटिवेटर मंच पर आते हैं, लेकिन यहां प्रेरणा देने वाले स्वयं एक ऐसे युवा दिगंबर मुनिराज हैं, जिन्होंने आधुनिक जीवन की सुविधाओं को छोड़कर संयम और अध्यात्म का मार्ग चुना है। इस अर्थ में उनका जीवन स्वयं युवाओं के लिए उदाहरण है।

सतेंद्र जैन शास्त्री ने किया मंच संचालन

कार्यक्रम का मंच संचालन सतेंद्र जैन शास्त्री ने किया। आयोजन में श्रुत मंथन वर्षायोग समिति से जुड़े मनोज जैन, रमेश जैन, प्रवीन जैन (पद्मावती), आनंद जैन, शैलेश जैन (लाला जी), मुकेश जैन, रमेश जैन, आशीष जैन, विवेक जैन, चक्रेश जैन, सतेंद्र जैन (साहुल), आशीष जैन (बाबा), सचिन जैन (तार), आशु (वी.के.), रोहित जैन, नितिन, सनी, अनिकेत और दीपक जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।

मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित समस्त मंडल एवं सकल जैन समाज के लोगों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।

SP_Singh AURGURU Editor