पुरानी पेंशन से यूजीसी वेतन आयोग तक: विभिन्न मांगों को लेकर आगरा कॉलेज में शिक्षकों की हुंकार- प्रदर्शन में बोले—मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन होगा और तेज
आगरा। अखिल भारतीय विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (एआईफुक्टो) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर शुक्रवार को आगरा कॉलेज में शिक्षकों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। पंडित गंगाधर शास्त्री की प्रतिमा के समक्ष आयोजित शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शिक्षकों ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली, आठवें यूजीसी/एआईसीटीई वेतन आयोग के गठन सहित उच्च शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान ने की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 के बाद नियुक्त विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक आज भी पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) से वंचित हैं, जिससे उनके भविष्य की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा प्रभावित हो रही है। अन्य वक्ताओं ने कहा कि उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए शिक्षकों के हितों की रक्षा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं का समाधान किए बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती।
शिक्षकों की ये हैं प्रमुख मांगें
धरने के दौरान शिक्षकों ने केंद्र एवं राज्य सरकारों से मांग की कि पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) तत्काल बहाल की जाए, आठवें यूजीसी/एआईसीटीई वेतन आयोग का शीघ्र गठन किया जाए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक पर पुनर्विचार किया जाए, एम.फिल. कार्यक्रम को पुनः संचालित किया जाए तथा पीएच.डी./एम.फिल. से संबंधित वेतनवृद्धि एवं अन्य लाभ समाप्त न किए जाएं।
इसके साथ ही यह भी मांग उठाई गई है कि एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रोफेसर पदोन्नति के लिए पीएच.डी. की अनिवार्यता समाप्त की जाए, सरकारी एवं अनुदानित महाविद्यालयों के पात्र शिक्षकों को कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के अंतर्गत प्रोफेसर पद पर पदोन्नति प्रदान की जाए, यूजीसी द्वारा रिफ्रेशर कोर्स एवं ओरिएंटेशन कोर्स (आरसी/ओसी) की अवधि बढ़ाने संबंधी निर्देश सभी राज्य सरकारें लागू करें, उच्च शिक्षण संस्थानों के क्लस्टरीकरण, विलय एवं एकल संकाय वाले महाविद्यालयों को समाप्त करने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए तथा उच्च शिक्षा में राज्यों की भूमिका को प्रभावित करने वाली केंद्रीकृत प्रवेश एवं परीक्षा प्रणालियों पर पुनर्विचार किया जाए।
धरने के दौरान शिक्षकों ने अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की और सरकार से शिक्षक हितों एवं उच्च शिक्षा की मजबूती के लिए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
जंतर-मंतर में भी बुलंद होगी आवाज
धरने के दौरान घोषणा की गई कि 8 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर आयोजित अखिल भारतीय विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (एआईफुक्टो) के राष्ट्रीय धरना-प्रदर्शन में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा से संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षक फुपुक्टा तथा औटा (आगरा यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन) के नेतृत्व में बड़ी संख्या में भाग लेंगे और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मांगों को प्रभावी ढंग से उठाएंगे।
धरना-प्रदर्शन में प्रमुख रूप से प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान (अध्यक्ष), डॉ. भूपेंद्र कुमार चिकारा, प्रो. विजय कुमार सिंह (सचिव, स्टाफ क्लब), प्रो. विक्रम सिंह, प्रो. गौरव कौशिक, प्रो. शिवकुमार सिंह, डॉ. दिग्विजय पाल सिंह, डॉ. आनंद प्रताप सिंह, डॉ. रंजीत सिंह, डॉ. धर्मवीर सिंह यादव, डॉ. एस. खरवार, डॉ. राहुल खरवार, डॉ. दिनेश कुमार सिंह, डॉ. धर्मेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. रोहित पटवा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।
अंत में शिक्षकों ने एक स्वर में कहा कि यदि उनकी न्यायोचित मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो अखिल भारतीय विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (एआईफुक्टो) तथा फेडरेशन ऑफ उत्तर प्रदेश यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स एसोसिएशंस (फुपुक्टा) के नेतृत्व में आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं तेज किया जाएगा।