रैगिंग का खौफनाक चेहरा: मानसिक प्रताड़ना से टूटे एमडी छात्र ने तीसरी मंजिल से लगाई छलांग, बरेली के मेडिकल कॉलेज में सनसनी, चार सीनियर डॉक्टरों समेत छह पर एफआईआर, पिता बोले- शिकायत के बाद भी प्रशासन रहा मौन
-आरके सिंह- बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित श्री राम मूर्ति स्मारक मेडिकल कॉलेज में रैगिंग और कथित मानसिक उत्पीड़न का गंभीर मामला सामने आया है। एमडी मेडिसिन प्रथम वर्ष के छात्र डॉ. आशु पाराशर ने लगातार मानसिक प्रताड़ना, अमानवीय व्यवहार और रैगिंग से परेशान होकर कॉलेज परिसर की तीसरी मंजिल से कूदकर आत्महत्या का प्रयास किया। गंभीर रूप से घायल छात्र का उपचार होने के बाद जान बच गई है। घटना के बाद छात्र के पिता सुधीर पाराशर की तहरीर पर भोजीपुरा थाना पुलिस ने चार सीनियर डॉक्टरों, कुछ अन्य छात्रों और कॉलेज प्रशासन समेत छह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। यह घटना पुलिस में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद ही सामने आ सकी। मामला सामने आने के बाद मेडिकल शिक्षा व्यवस्था और रैगिंग विरोधी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
एसएसपी के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा
भोजीपुरा थाना प्रभारी कुंवर बहादुर सिंह ने बताया कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य के निर्देश पर छात्र के पिता की शिकायत के आधार पर डॉ. रितेश गोयल (जेआर-3), डॉ. कुशाग्र शर्मा, डॉ. मानस खंडेलवाल, डॉ. लतिका (जेआर-2), कुछ अन्य छात्रों तथा श्री राम मूर्ति स्मारक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल प्रशासन के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 191(2), 127, 296, 352, 351(3) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच के बाद विधिक कार्रवाई की जाएगी।
ज्वाइनिंग के कुछ दिन बाद ही शुरू हो गया था उत्पीड़न
एफआईआर में छात्र के पिता सुधीर पाराशर ने आरोप लगाया है कि एमडी मेडिसिन में प्रवेश लेने के कुछ दिन बाद से ही द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के कुछ सीनियर छात्र उनके पुत्र को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे थे। ड्यूटी के दौरान गाली-गलौज, अभद्र व्यवहार, अपमानजनक टिप्पणियां, भोजन करने से रोकना, ड्यूटी समाप्त होने के बाद भी जबरन रोके रखना, निजी काम कराना, भोजन और अन्य सामान मंगाना, देर रात संदेश भेजकर बुलाना तथा रविवार की छुट्टी के दिन भी ड्यूटी के लिए मजबूर करना रोजमर्रा का हिस्सा बना दिया गया था।
पैरों में घाव होने पर भी नहीं बदलने दिए जूते
शिकायत के अनुसार डॉ. आशु पाराशर को लगातार बिना विश्राम के ड्यूटी कराई जाती थी। पैरों में गंभीर घाव होने के बावजूद उन्हें जूते बदलने की अनुमति नहीं दी गई। कई बार लगातार 40 घंटे तक ड्यूटी कराने के बाद भी उन्हें आराम नहीं दिया गया और दोबारा ड्यूटी पर लगा दिया जाता था। इतना ही नहीं, उन्हें पर्याप्त नींद लेने तक का अवसर नहीं दिया जाता था।
शिकायत की, लेकिन नहीं हुई कोई कार्रवाई
पीड़ित छात्र ने अपनी परेशानी मेडिसिन विभाग की एचओडी डॉ. स्मिता गुप्ता को बताई। आरोप है कि उन्होंने छात्र को डॉ. रोहित शर्मा के पास भेज दिया, लेकिन शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद भी कथित उत्पीड़न लगातार जारी रहा।
2 मई को तीसरी मंजिल से कूदा छात्र
एफआईआर के अनुसार मानसिक प्रताड़ना और रैगिंग से पूरी तरह टूट चुके डॉ. आशु पाराशर ने 2 मई 2026 को आत्महत्या करने के उद्देश्य से मेडिकल कॉलेज की तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी। घटना में उन्हें गंभीर और जानलेवा चोटें आईं तथा लंबे समय तक आईसीयू में भर्ती रहना पड़ा। घटना की सूचना कॉलेज के प्रशासनिक अधिकारी आई.ए. खान ने फोन पर छात्र के पिता को दी थी।
स्वस्थ होने पर बेटे ने बताई पूरी आपबीती
सुधार होने के बाद डॉ. आशु पाराशर ने अपने पिता को बताया कि डॉ. रितेश गोयल (जेआर-3), डॉ. कुशाग्र शर्मा, डॉ. मानस खंडेलवाल (जेआर-2), डॉ. लतिका (जेआर-2) तथा कुछ अन्य वरिष्ठ छात्रों द्वारा लगातार रैगिंग, मानसिक उत्पीड़न, डराने-धमकाने और शत्रुतापूर्ण व्यवहार किया जाता था। इन्हीं परिस्थितियों से तंग आकर उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया।
प्रबंधन को भी भेजी थी शिकायत
एफआईआर में यह भी उल्लेख किया गया है कि छात्र के पिता ने 5 मई 2026 को मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य और प्रबंधन को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से पूरे मामले की शिकायत भेजी थी। आरोप है कि शिकायत मिलने के बावजूद कॉलेज प्रशासन ने किसी भी आरोपी के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद मजबूर होकर पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया गया।
कॉलेज प्रशासन ने साधी चुप्पी
मामले में मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक अधिकारी आई.ए. खान से संपर्क किए जाने पर उन्होंने किसी भी प्रकार की जानकारी देने से इनकार कर दिया। वहीं पुलिस का कहना है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कर साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।