जनसुनवाई खत्म होते ही स्कूलों पर डीएम का धावा, छात्राओं से सीधे लिया पढ़ाई-खाने और सुरक्षा का हिसाब

कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई के बाद जिलाधिकारी मनीष बंसल ने खंदौली के उजरई स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत परखी। डीएम ने छात्राओं से पढ़ाई, भोजन, स्वास्थ्य, सुरक्षा, स्वच्छता और दैनिक सुविधाओं पर सीधे सवाल किए, खुद खाना चखकर गुणवत्ता जांची और किताब लेकर छात्राओं को पढ़ाया। उन्होंने 13 कस्तूरबा विद्यालयों में CSR फंड से डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, शौचालय, पेयजल, चारदीवारी, खेल सामग्री और भवन मरम्मत सहित सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कार्ययोजना व एस्टीमेट तैयार करने के निर्देश दिए।

Aug 18, 2026 - 21:04
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जनसुनवाई खत्म होते ही स्कूलों पर डीएम का धावा, छात्राओं से सीधे लिया पढ़ाई-खाने और सुरक्षा का हिसाब
डीएम मनीष बंसल निरीक्षण के दौरान क्लासरूम मे जाकर बच्चों से सवाल-जवाब करते हुए।

कस्तूरबा विद्यालयों में व्यवस्थाओं की पड़ताल, डीएम मनीष बंसल ने खुद चखा खाना, छात्राओं से पूछे तीखे सवाल, सीएसआर  फंड से सुविधाएं दुरुस्त करने की बनी बड़ी कार्ययोजना

आगरा। कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के बाद जिलाधिकारी मनीष बंसल का अगला पड़ाव कोई कार्यालय नहीं, बल्कि खंदौली ब्लॉक का कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, उजरई रहा। बिना किसी पूर्व सूचना के औचक निरीक्षण करने पहुंचे डीएम ने स्कूल की व्यवस्थाओं को कागजी दावों से नहीं, बल्कि छात्राओं से सीधे संवाद कर परखा। उन्होंने कक्षा में बैठकर छात्राओं से पढ़ाई, भोजन, स्वास्थ्य, सुरक्षा, स्वच्छता और दैनिक दिनचर्या तक के बारे में एक-एक सवाल किया। डीएम को अचानक अपने बीच देखकर छात्राओं में उत्साह नजर आया। कुछ ही देर में माहौल सहज हो गया और छात्राओं ने बेझिझक अपने सवालों के जवाब दिए। जिलाधिकारी ने भी अधिकारियों की रिपोर्ट पर निर्भर रहने के बजाय बच्चों से सीधे जमीनी स्थिति जानने पर जोर दिया।

‘खाने में आज क्या मिला?’ से शुरू हुई पड़ताल

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने छात्राओं से पूछा कि उन्हें खाने में क्या मिला, भोजन की गुणवत्ता कैसी है और भोजन समय पर मिलता है या नहीं। उन्होंने सुबह स्नान करने, गीजर की स्थिति, कपड़े कौन धोता है, कितनी ड्रेस मिली है, किताबें उपलब्ध हैं या नहीं जैसे सवाल भी किए। उन्होंने यह भी जाना कि कक्षाओं में लगी टीवी चलती है या नहीं और अंग्रेजी व गणित के शिक्षक बच्चों को क्या पढ़ा रहे हैं। इस दौरान डीएम ने छात्राओं की शैक्षिक समझ को भी परखा।

डीएम ने खुद संभाली किताब, छात्राओं को पढ़ाया 

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने किताब उठाकर छात्राओं से सवाल-जवाब किए। उन्होंने कोशिका के ज्ञान से लेकर अंग्रेजी के शब्दों के मीनिंग तक छात्राओं को पढ़ाया और उनकी समझ का परीक्षण किया। छात्राओं का शिक्षा स्तर उचित मिलने पर उन्होंने शिक्षकों और छात्राओं का उत्साह बढ़ाया। डीएम ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे छोटे लक्ष्य तक सीमित न रहें, बल्कि बड़े सपने देखें, लक्ष्य तय करें और उसे हासिल करने के लिए लगातार मेहनत करें। उन्होंने कठिन परिश्रम को सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बताते हुए छात्राओं में आत्मविश्वास पैदा किया।

लैब से लेकर हॉस्टल तक गहन निरीक्षण

इसके बाद जिलाधिकारी उच्चीकृत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय पहुंचे, जहां कक्षा 9 और 10 की छात्राएं अध्ययनरत हैं। यहां उन्होंने सिर्फ क्लासरूम ही नहीं, बल्कि भौतिक विज्ञान और जीव विज्ञान की प्रयोगशालाओं, लाइब्रेरी, रसोई, छात्रावास, खेलकूद उपकरण, शौचालय, पेयजल व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने पूरे परिसर में उच्च स्तर की स्वच्छता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। साथ ही छात्राओं को केवल किताबों तक सीमित न रखते हुए प्रायोगिक ज्ञान और प्रतिदिन खेलकूद की गतिविधियां कराने के निर्देश दिए।

डीएम ने खुद चखा खाना, गुणवत्ता की मौके पर जांच

विद्यालय में भोजन की गुणवत्ता को लेकर जिलाधिकारी ने खुद खाना चखकर उसकी गुणवत्ता परखी। इससे स्पष्ट किया कि बच्चों के भोजन के मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उच्चीकृत विद्यालय की छात्राओं से संवाद के दौरान जिलाधिकारी ने HPV वैक्सीन के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने छात्राओं से कहा कि वे अपने अभिभावकों को इसके बारे में बताएं और वैक्सीनेशन के संबंध में जागरूकता बढ़ाएं।

बच्चों से ड्रेस, जूते और मिड-डे मील का लिया फीडबैक

इसके बाद जिलाधिकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय उजरई (कंपोजिट) पहुंचे। यहां उन्होंने बच्चों से ड्रेस, जूते-मोजे और पाठ्य पुस्तकों की उपलब्धता के बारे में जानकारी ली। उन्होंने मिड-डे मील में मिलने वाले भोजन के संबंध में भी बच्चों से सीधे फीडबैक लिया। डीएम ने बच्चों को सवाल दिए और उन्हें ब्लैक बोर्ड पर हल करने के लिए कहा। इस दौरान बच्चों की शैक्षिक क्षमता और विषय की समझ को भी परखा गया।

13 कस्तूरबा विद्यालयों में सीएसआर से बदलेगा बुनियादी ढांचा

निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी ने जनपद के सभी 13 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व यानी सीएसआर फंड से सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यालयों की जरूरत के अनुसार विस्तृत कार्ययोजना और एस्टीमेट तैयार करने को कहा। इसमें विद्यालय भवन की टूट-फूट की मरम्मत और रंगाई-पुताई, शौचालय एवं वॉशरूम की मरम्मत, स्कूल की चारदीवारी को दुरुस्त करना, पेयजल सुविधाओं में सुधार, स्मार्ट क्लासरूम विकसित करना, उच्चीकृत कंप्यूटर लैब की व्यवस्था, खिड़कियों और जालियों की मरम्मत, हाथ धोने की बेहतर व्यवस्था, छात्राओं के लिए कुर्सी-मेज की उपलब्धता, खेलकूद सामग्री की व्यवस्था, डिजिटल शिक्षा को मजबूत करना, पोषण कार्यक्रमों को बेहतर बनाना जैसे कार्य शामिल किए जाएंगे। डीएम ने सीएसआर फंड के उपयोग में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नोडल अधिकारी नामित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वीकृत कार्य सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर गुणवत्तापूर्ण तरीके से दिखाई देने चाहिए।

डिजिटल सुविधाओं पर डीएम का जोर

जिलाधिकारी ने कहा कि वर्तमान दौर तकनीकी और आधुनिक शिक्षा का है। ऐसे में बालिकाओं को डिजिटल शिक्षा से जोड़ना और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। उन्होंने आवासीय विद्यालयों में मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता, बेहतर पठन-पाठन का वातावरण और मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान विद्यालय में चल रहे बाउंड्रीवाल निर्माण कार्य की गुणवत्ता भी परखी गई। इसके साथ ही जिलाधिकारी ने खंड शिक्षा अधिकारी के कार्यालय का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी सुमित कुमार, डीसी बालिका कुलदीप तिवारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।