भारत बनेगा ग्लोबल एआई पावरहाउस, स्वदेशी तकनीक से डिजिटल संप्रभुता की ओर बढ़ रहा देश

भारत एआई के वैश्विक क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है। इंडिया AI मिशन के निदेशक मोहम्मद वाई. सफिरुल्ला ने एआई फ्यूचर रेडी कान्क्लैव 2026 में बताया कि मिशन के तहत 20 स्वदेशी और संप्रभु एआई मॉडल विकसित किए जा रहे हैं। साथ ही हाई-लेवल सुपरकंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, भारतीय डेटासेट, एआई कोष और भारतीय भाषाओं में एआई की पहुंच पर जोर दिया जा रहा है। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और उद्योग में एआई आधारित समाधान विकसित करने के साथ Safe and Trusted AI Framework के जरिए तकनीक को सुरक्षित और जिम्मेदार बनाने पर भी काम हो रहा है।

Aug 9, 2026 - 20:56
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भारत बनेगा ग्लोबल एआई पावरहाउस, स्वदेशी तकनीक से डिजिटल संप्रभुता की ओर बढ़ रहा देश
इंडिया एआई मिशन के निदेशक मोहम्मद वाई. सफिरुल्ला ने आगरा में आयोजित एआई फ्यूचर रेडी कान्क्लैव 2026 में भारत सरकार के इंडिया एआई मिशन पर व्याख्यान देते हुए।

इंडिया एआई मिशन के निदेशक मोहम्मद वाई. सफिरुल्ला बोले- 20 स्वदेशी एआई मॉडल पर काम जारी, भारतीय भाषाओं और जमीनी जरूरतों के अनुरूप विकसित होगी तकनीक

आगरा। भारत अपनी विशाल युवा शक्ति, तकनीकी प्रतिभा, मजबूत डिजिटल आधार और तेजी से बढ़ती नवाचार क्षमता के दम पर वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बड़ी ताकत बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत सरकार का इंडिया एआई मिशन देश की वास्तविक जरूरतों, भाषाई विविधता और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप स्वदेशी, सुरक्षित, विश्वसनीय और समावेशी एआई इकोसिस्टम तैयार करने पर जोर दे रहा है।

यह बात इंडिया एआई मिशन के निदेशक मोहम्मद वाई. सफिरुल्ला ने आगरा में आयोजित एआई फ्यूचर रेडी कान्क्लैव 2026 में भारत सरकार के इंडिया एआई मिशन पर व्याख्यान के दौरान कही। उन्होंने कहा कि भारत की कोशिश केवल विदेशों में विकसित एआई तकनीकों का उपभोक्ता बनने की नहीं, बल्कि अपनी जरूरतों के अनुरूप एआई तकनीक और मॉडल विकसित कर वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाने की है।

20 स्वदेशी और संप्रभु एआई मॉडल पर काम

सफिरुल्ला ने बताया कि इंडिया एआई मिशन के तहत 20 स्वदेशी एवं संप्रभु एआई मॉडल विकसित किए जा रहे हैं। इन मॉडलों का उद्देश्य भारत की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसी तकनीक तैयार करना है, जो देश की भाषाई, सामाजिक और आर्थिक विविधता के अनुरूप प्रभावी ढंग से काम कर सके। उन्होंने कहा कि स्वदेशी एआई मॉडल विकसित होने से भारत की विदेशी एआई प्रणालियों पर निर्भरता कम होगी और देश की डिजिटल एवं तकनीकी संप्रभुता को मजबूती मिलेगी। इससे भारत न केवल एआई तकनीक का उपयोग करने वाला देश बनेगा, बल्कि इसके विकास और नवाचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा।

एआई के लिए तैयार हो रहा हाई-लेवल कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर

इंडिया एआई मिशन के निदेशक ने कहा कि देश में एआई की तेजी से बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए उच्च-स्तरीय नेशनल सुपरकंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। एआई मॉडल के प्रशिक्षण और संचालन के लिए अत्याधुनिक कंप्यूटिंग क्षमता बेहद जरूरी है। भारत इसी दिशा में अपनी तकनीकी क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप अधिक सटीक और उपयोगी एआई मॉडल तैयार करने में गुणवत्तापूर्ण डेटा की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके लिए गैर-व्यक्तिगत और गुणवत्तापूर्ण भारतीय डेटासेट को बढ़ावा दिया जा रहा है। एआई कोष जैसे प्रयास इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

भारतीय भाषाओं में एआई पहुंचाने पर जोर

सफिरुल्ला ने कहा कि एआई का लाभ केवल तकनीकी विशेषज्ञों, स्टार्टअप्स या बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। देश के सामान्य नागरिक तक एआई की पहुंच उसकी अपनी भाषा में सुनिश्चित करना जरूरी है। भारत जैसे बहुभाषी देश में भारतीय भाषाओं में एआई की उपलब्धता डिजिटल समावेशन को नई गति दे सकती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे शहरों और तकनीकी रूप से कम सुविधा वाले वर्गों को भी एआई आधारित सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।

खेती से स्वास्थ्य तक बदल सकती है एआई की तस्वीर

उन्होंने कहा कि एआई का इस्तेमाल केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग और नागरिक सेवाओं समेत अनेक क्षेत्रों में एआई आधारित समाधान विकसित किए जा रहे हैं। कृषि क्षेत्र में डेटा आधारित तकनीक किसानों को बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकती है। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के इस्तेमाल से बीमारी की पहचान, उपचार संबंधी सहायता और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि एआई के माध्यम से किसानों, मरीजों, विद्यार्थियों, उद्योगों और आम नागरिकों के लिए जरूरत के मुताबिक अधिक प्रभावी और तेज समाधान तैयार किए जा सकते हैं।

Safe और Trusted AI पर भी भारत का फोकस

इंडिया एआई मिशन के निदेशक ने एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी विकास के साथ सुरक्षा, विश्वास, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। भारत Safe and Trusted AI Framework विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य एआई के विकास और इस्तेमाल को ऐसे सिद्धांतों से जोड़ना है, जिनमें नवाचार के साथ नागरिकों की सुरक्षा और तकनीक के जिम्मेदार उपयोग को भी प्राथमिकता मिले।

युवा शक्ति भारत की सबसे बड़ी ताकत

सफिरुल्ला ने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा शक्तियों में से एक, मजबूत तकनीकी प्रतिभा, विशाल डिजिटल आधार और नवाचार की क्षमता मौजूद है। यही ताकत भारत को आने वाले वर्षों में वैश्विक एआई इकोसिस्टम में अग्रणी भूमिका निभाने की मजबूत स्थिति प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि भारत के सामने एआई को केवल नई तकनीक के तौर पर अपनाने के बजाय इसे विकास, समावेशन और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनाने का बड़ा अवसर है। यदि एआई को देश की जमीनी जरूरतों और आम नागरिकों से जोड़ा जाता है, तो यह भारत के आर्थिक और सामाजिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।

एआई फ्यूचर रेडी कान्क्लैव 2026 में इंडिया एआई मिशन को लेकर दिया गया यह संदेश इस बात की ओर संकेत करता है कि भारत एआई के वैश्विक दौर में केवल भागीदार नहीं, बल्कि तकनीक के विकास और उसके जिम्मेदार इस्तेमाल में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है।