दिल्ली में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (आईएफएफडी) का भव्य आगाज, दिग्गज सितारों का सम्मान, 125 फिल्मों की होगी स्क्रीनिंग
दिल्ली में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2026 की शानदार शुरुआत हो चुकी है, जहां देश-विदेश की 125 फिल्मों की स्क्रीनिंग होगी। बड़े सितारों की मौजूदगी और सम्मान समारोह के साथ यह बहुत खास बन गया है।
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली एक बार फिर सिनेमा के रंग में रंग गई है, जहां सात दिनों तक चलने वाले इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल दिल्ली 2026 का शानदार शुभारंभ हो चुका है। पहले ही दिन बड़े सितारों की मौजूदगी और सम्मान समारोह ने माहौल को खास बना दिया।
फेस्टिवल के उद्घाटन दिन में फिल्म इंडस्ट्री के कई नामी चेहरे एक ही मंच पर नजर आए। धर्मेंद्र और शर्मिला टैगोर को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड देकर उनके लंबे और शानदार करियर को सलाम किया गया। धर्मेंद्र के सम्मान को हेमा मालिनी ने स्वीकार किया, जिससे समारोह भावुक भी हो उठा। वहीं कृति सेनन, विकी कौशल, रकुल प्रीत सिंह, भूमि पेडनेकर और राणा डुग्गुबाती समेत कई सितारों ने अपनी मौजूदगी से कार्यक्रम को और खास बना दिया।
इस बार फेस्टिवल में लगभग 125 फिल्मों की स्क्रीनिंग तय की गई है, जो अलग-अलग सिनेमाघरों के साथ-साथ खुले मंचों पर भी दिखाई जाएंगी। दर्शकों को फिक्शन, नॉन-फिक्शन, डॉक्यूमेंट्री और एनिमेशन जैसी विविध शैलियों का अनुभव एक ही मंच पर मिलेगा। इसके साथ ही फिल्म मार्केट और एक्सपो जैसे नए प्रयोग इस आयोजन को और आधुनिक बना रहे हैं।
फेस्टिवल के दौरान हर दिन कुछ नया देखने को मिलेगा। क्लासिक फिल्मों की विशेष स्क्रीनिंग के साथ-साथ फिल्म निर्माण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक विषयों पर चर्चा भी होगी। शोले के रिस्टोर्ड वर्जन की स्क्रीनिंग दर्शकों के लिए खास आकर्षण बनी हुई है। साथ ही मनोज वाजपेयी, अनुपम खेर और पीयूष मिश्रा जैसे कलाकारों के साथ संवाद सत्र भी आयोजित किए जाएंगे।
इस फिल्म महोत्सव में 100 से अधिक देशों से करीब 2000 प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं, जो इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान को दर्शाती हैं। राजधानी के प्रमुख स्थलों पर आयोजित हो रहे इस आयोजन में आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। गाला प्रीमियर, विशेष स्क्रीनिंग और नई तकनीकों की प्रस्तुतियां इस फेस्टिवल को एक अलग ही स्तर पर ले जा रही हैं।
26 से 31 मार्च तक चलने वाला यह आयोजन न केवल फिल्म प्रेमियों के लिए उत्सव है, बल्कि नए विचारों, तकनीक और कहानियों को समझने का भी मौका है। दिल्ली इस दौरान सचमुच ग्लोबल सिनेमा की राजधानी बन चुकी है।