आगरा के पशुपालन विभाग में 25 लाख की कथित वित्तीय अनियमितता पर जांच पूरी, दीवा ने उठाई अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

आगरा। पशुपालन विभाग में कथित 25 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) की अध्यक्षता में गठित जांच समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए संगठन 'दीवा' के अध्यक्ष डॉ. सतीश चन्द्र शर्मा ने उत्तर प्रदेश शासन से संबंधित अधिकारियों के खिलाफ निलंबन, विभागीय कार्रवाई और आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जांच के दौरान महत्वपूर्ण अभिलेख और क्रय प्रक्रिया से संबंधित मूल पत्रावलियां प्रस्तुत नहीं की गईं, जिससे वित्तीय अनियमितता के गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

Jul 2, 2026 - 21:01
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आगरा के पशुपालन विभाग में 25 लाख की कथित वित्तीय अनियमितता पर जांच पूरी, दीवा ने उठाई अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई की मांग को लेकर जिलाधिकारी से मुलाकात करते डीवा के अध्यक्ष डॊ. सतीश शर्मा एवं अन्य पदाधिकारी।

जांच समिति की रिपोर्ट के बाद शासन को भेजा गया प्रत्यावेदन

डॉ. सतीश चन्द्र शर्मा ने अपर मुख्य सचिव (पशुधन एवं मत्स्य एवं दुग्ध विकास), निदेशक (प्रशासन एवं विकास) तथा वित्त नियंत्रक, पशुपालन विभाग को भेजे गए विस्तृत प्रत्यावेदन में कहा है कि मंडलायुक्त आगरा के आदेश और जिलाधिकारी आगरा के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी द्वारा जांच समिति का गठन किया गया था। समिति की अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) ने की, जबकि उपायुक्त (स्वरोजगार) और सहायक लेखाधिकारी सदस्य बनाए गए थे।

शिकायत के अनुसार जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को सौंपने के साथ ही निदेशक (प्रशासन एवं विकास), पशुपालन विभाग और जिलाधिकारी आगरा को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी। डॉ. शर्मा का कहना है कि 30 जून 2026 को उन्होंने जिलाधिकारी से मुलाकात कर जांच रिपोर्ट से शासन को अवगत कराने का अनुरोध किया, जिस पर जिलाधिकारी ने बताया कि रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है।

25 लाख की वित्तीय अनियमितता का आरोप

प्रत्यावेदन में दावा किया गया है कि जांच समिति ने तत्कालीन मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. जयन्त यादव तथा तत्कालीन सहायक लेखाकार स्वर्गीय ज्ञानेन्द्र भारद्वाज को कथित वित्तीय अनियमितता के लिए उत्तरदायी माना है। साथ ही वर्तमान मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. डी.के. पाण्डे के संबंध में भी गंभीर टिप्पणियां दर्ज किए जाने का उल्लेख किया गया है।

शिकायत में कहा गया है कि जांच के दौरान उपलब्ध कैशबुक के परीक्षण से यह सामने आया कि लगभग 25 लाख रुपये के भुगतान कार्यभार ग्रहण करने के बाद किए गए थे, जिससे तत्कालीन भुगतान प्रक्रिया की जानकारी डॉ. डी.के. पाण्डे को होने की बात कही गई है।

क्रय प्रक्रिया के अभिलेख छिपाने का आरोप

डॉ. सतीश चन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया है कि डॉ. डी.के. पाण्डे तथा वर्तमान सहायक लेखाकार राजेश कुमार ने जांच समिति के समक्ष क्रय प्रक्रिया से संबंधित मूल पत्रावली, अभिलेख और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए। इससे जांच प्रभावित हुई तथा महत्वपूर्ण साक्ष्य छिपाने की आशंका उत्पन्न हुई।

शिकायत में इसे सरकारी आदेशों की अवहेलना, वित्तीय अनियमितता तथा उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली का उल्लंघन बताते हुए कठोर विभागीय कार्रवाई की मांग की गई है।

जिला क्रय समिति नहीं बनने का भी आरोप

प्रत्यावेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25, 2025-26 तथा वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 के जून माह तक जिला क्रय समिति का गठन नहीं किया गया, जबकि खरीद प्रक्रिया जारी रही। शिकायतकर्ता ने इसे वित्तीय नियमों के उल्लंघन का मामला बताते हुए इसकी भी विस्तृत जांच कराने की मांग की है।

निलंबन और आपराधिक कार्रवाई की मांग

डॉ. शर्मा ने शासन से मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 तथा संबंधित सेवा नियमों के तहत डॉ. डी.के. पाण्डे, डॉ. जयन्त यादव और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध चरणबद्ध विभागीय कार्रवाई की जाए। साथ ही भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि भ्रष्टाचार के ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो पशुपालन विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही स्थापित करना कठिन होगा।

सरकार से निष्पक्ष जांच की अपील

संगठन के अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश सरकार गौवंश संरक्षण और पशुपालन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। ऐसे में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि विभाग में पारदर्शिता और जनविश्वास कायम रह सके।

SP_Singh AURGURU Editor