उर्स-ए-रजवी में उठा मुसलमानों की सुरक्षा का मुद्दा, उलमा बोले- कठिन दौर में सब्र से काम लें, नफरत फैलाने वालों से रहें दूर, योगी की बुलडोजर कार्रवाई पर उठे सवाल तो अखिलेश यादव भी रहे निशाने पर
-आरके सिंह- बरेली। तीन दिवसीय उर्स-ए-रजवी में देश-विदेश से पहुंचे उलमा, सज्जादगान और लाखों जायरीनों के बीच मुस्लिम समाज से जुड़े सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई। गुजरात के मुफ्ती सैयद सलाम बाबू ने कहा कि मुसलमानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है और मस्जिदों, मदरसों व मजारों पर हमले तथा भीड़ हिंसा की घटनाएं चिंता का विषय हैं। वहीं मौलाना इंतजार अहमद ने मुसलमानों से मौजूदा कठिन दौर में सब्र से काम लेने और बिना जरूरत प्रदर्शन से बचने की अपील की। उन्होंने उलमा से हिंदू-मुस्लिम के बीच की खाई पाटने तथा मस्जिदों से सौहार्द का संदेश देने का आह्वान किया।
मस्जिदों से सौहार्द का संदेश देने की अपील
उर्स-ए-रजवी के मौके पर देश-विदेश से आए उलमा और सज्जादगान ने मुफ्ती-ए-आजम हिंद और ताजुश्शरिया के जीवन और शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर हमले, युवाओं का भीड़ हिंसा का शिकार होना और समाज में बढ़ती नफरत गंभीर चिंता के विषय हैं।
गुजरात से आए मुफ्ती सैयद सलाम बाबू ने कहा कि देश की आजादी में मुसलमानों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
मौलाना इंतजार अहमद ने कहा कि ऐसे लोगों से बचने की जरूरत है जो हिंदू और मुस्लिम के बीच खाई पैदा कर देश को बांटने की कोशिश करते हैं। उन्होंने उलमा से दोनों समुदायों के बीच सौहार्द बढ़ाने और मस्जिदों से भाईचारे का संदेश देने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुसलमान कठिन दौर से गुजर रहे हैं, इसलिए सब्र से काम लेना चाहिए और अनावश्यक प्रदर्शन से बचना चाहिए।
आला हजरत की शिक्षा में नफरत की जगह नहीं
रामपुर के शहर काजी मुफ्ती फैजान मियां ने कहा कि जिस दिल में आला हजरत हैं, उसमें नफरत और दहशतगर्दी नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि आला हजरत की शिक्षाएं हर धर्म के सम्मान, कमजोर की मदद और देश से प्रेम का संदेश देती हैं।
मौलाना जाहिद ने कहा कि मजहब और मसलक से दूरी का फायदा उठाया जा रहा है। उन्होंने धार्मिक और सामाजिक स्तर पर एकजुटता तथा अपनी धार्मिक शिक्षाओं से जुड़े रहने पर जोर दिया।
सखावत मुरादाबादी ने मुफ्ती-ए-आजम हिंद के देशप्रेम का उल्लेख करते हुए कहा कि आजादी के बाद देश के विभाजन के समय उन्होंने पाकिस्तान जाने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कुरान, हदीस और सुन्नी उलमा से दीन की शिक्षा हासिल करने पर भी जोर दिया।
जायरीनों ने योगी सरकार पर लगाए आरोप
उर्स में पहुंचे विभिन्न जिलों के जायरीनों ने प्रदेश की मौजूदा और पूर्व सरकारों को लेकर अपने विचार भी रखे। सुल्तानपुर के मोहम्मद अल्ताफ ने योगी आदित्यनाथ सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक समझा जाने लगा है। उन्होंने तहसीलों में रिश्वत और स्कूलों में बच्चों के दाखिले में परेशानी का आरोप लगाया।
वाराणसी के सुल्तान अहमद ने आरोप लगाया कि बनारस में सबसे अधिक बुलडोजर कार्रवाई मुसलमानों के आवासों और प्रतिष्ठानों पर हुई। झांसी के मुस्तकीन आलम ने कहा कि प्रशासन को मुस्लिम क्षेत्रों में अतिक्रमण दिखाई देता है और वहां बुलडोजर की कार्रवाई होती रहती है, जबकि मुस्लिम बस्तियों की गलियों और नालियों की स्थिति लंबे समय से खराब है।
अखिलेश सरकार को लेकर भी उठे सवाल
जालौन के कबीरउद्दीन ने न कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी अपनी सरकार के दौरान आम मुसलमानों के हित में अपेक्षित काम नहीं किए। उन्होंने कहा कि उस सरकार में मुसलमानों के नाम पर बातें अधिक हुईं, जबकि लाभ सीमित लोगों को मिला।
वहीं बिजनौर के हसीन सिद्दीकी ने इसके विपरीत योगी सरकार की भर्तियों को पिछली सरकार से बेहतर बताते हुए कहा कि उनके अनुसार वर्तमान सरकार में भर्तियां अधिक पारदर्शिता से हो रही हैं। हरदोई के रफीक आलम ने कहा कि अखिलेश सरकार ने कब्रिस्तानों की बाउंड्री बनवाकर मुसलमानों को गुमराह किया। उन्होंने योगी सरकार की कांवड़ यात्रा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की।
रफीक आलम ने कहा कि यदि उर्स-ए-रजवी के कुल के मौके पर बरेली में आला हजरत दरगाह और लाखों जायरीनों पर भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पुष्पवर्षा करते तो इससे मुस्लिम समाज में उनके प्रति सम्मान और बढ़ सकता था।
राशन मिलने के बावजूद बुलडोजर का डर : फरहत
कन्नौज के फरहत ने कहा कि योगी सरकार में मुफ्त राशन की सुविधा मिल रही है, लेकिन लोगों में यह डर बना रहता है कि किसी की झूठी शिकायत पर उनके घर पर बुलडोजर कार्रवाई न हो जाए।
उर्स-ए-रजवी में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर भी इन चर्चाओं ने ध्यान खींचा। हालांकि अलग-अलग जायरीनों और वक्ताओं ने सरकारों को लेकर अपने-अपने अनुभव और राय रखी।
लाखों जायरीन पहुंचे
तीन दिवसीय उर्स-ए-रजवी में देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में जायरीन और उलमा पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान मुफ्ती-ए-आजम हिंद और ताजुश्शरिया की शिक्षाओं को याद करते हुए धार्मिक और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का संदेश दिया गया।