उत्तर कोरिया के चुनाव में किम जोंग उन की पार्टी ने जीती सभी सीटें, मिले 99.93% वोट, कुछ वोट किम जोंग के विरोध में पड़े
उत्तर कोरिया के संसदीय चुनावों में किम जोंग उन की वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया को एकतरफा जीत मिली है। तकरीबन सभी वोट उनकी पार्टी को मिली हैं। महज कुछ हजार वोट ही उनको नहीं मिले हैं।
प्योंगयांग। उत्तर कोरिया के संसदीय चुनाव में एक बार फिर किम जोंग उन को जीत मिली हैं। किम जोंग उन के नेतृत्व वाली सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया और उसके सहयोगी समूहों ने सभी सीटें जीत ली हैं। किम की पार्टी को 99.93 प्रतिशत वोट मिले हैं। यानी लगभग सभी वोट किम के पक्ष में ही पड़े हैं। सिर्फ कुछ हजार वोट ही किम की पार्टी के खिलाफ डाले गए हैं। चुनाव में किम के खिलाफ कोई नहीं था। ऐसे में सवाल है कि बाकी वोट किसे मिले हैं।
उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी ने बताया है कि 15 मार्च को 15वीं सुप्रीम पीपल्स असेंबली के सदस्यों को चुनने के लिए हुए चुनाव हुआ था। इसमें किम समर्थित उम्मीदवारों ने सभी सीटों पर जीत हासिल की। सुप्रीम पीपल्स असेंबली के लिए कुल 687 प्रतिनिधि चुने गए। इनमें किसान से लेकर सेना के जवान और अधिकारी तक शामिल बताए गए हैं।
इस चुनाव में मतदाताओं की भागीदारी (वोटर टर्नआउट) असाधारण रूप से 99.99 प्रतिशत रही। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि 99.93 प्रतिशत लोगों ने किम की पार्टी के पक्ष में अपना मतदान किया। वहीं सरकारी मीडिया ने वोटों का आंकड़ा इससे थोड़ा ज्यादा 99.97 प्रतिशत बताया है।
उत्तर कोरिया के पंजीकृत मतदाताओं में से केवल 0.0037 प्रतिशत लोगों ने अपना वोट नहीं डाला। इनमें से ज्यादातर इसलिए वोटिंग से दूर रहे क्योंकि वे विदेश में थे या समुद्र में काम कर रहे थे। बहुत कम संख्या में सिर्फ 0.00003 प्रतिशत लोगों (बूढ़े और बीमार) ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
इस चुनाव में बैलट पेपर पर विपक्ष का कोई उम्मीदवार नहीं था। हर चुनाव क्षेत्र में वोटरों को पहले से मंजूर एक उम्मीदवार दिया गया था। इस उम्मीदवार को उन्हें स्वीकार करना था या अस्वीकार। ऐसे में जाहिर है कि बाकी 0.07 प्रतिशत वोट किसी विरोधी पार्टी या नेता को नहीं मिले।
उत्तर कोरिया के लोगों में 0.07 प्रतिशत ने किम जोंग उनके उम्मीदवारों के खिलाफ वोट किया है। बैलेट पेपर पर उम्मीदवार के खिलाफ उन्होंने वोट दिया। उत्तर कोरिया में लंबे समय बाद किसी संसदीय चुनाव में 'नहीं' में पड़े वोटों की जानकारी दी है। इससे पहले 1957 में ऐसे वोटों को सार्वजनिक किया गया था।