विश्व हाथी दिवस से पहले वाइल्डलाइफ एसओएस की बड़ी पहल, वैश्विक विशेषज्ञ माइक मैक्लूअर की टीम ने पशु चिकित्सकों और केयरटेकर्स को दिया प्रशिक्षण
मथुरा। विश्व हाथी दिवस से पहले वाइल्डलाइफ एसओएस ने बचाए गए हाथियों की आजीवन देखभाल और कल्याण को बेहतर बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत किया है। अंतरराष्ट्रीय हाथी देखभाल विशेषज्ञ माइक मैक्लूअर के नेतृत्व में मैक्लूअर इंटरनेशनल कंसल्टिंग (एमआईसी) की टीम ने मथुरा स्थित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में एक सप्ताह बिताकर वाइल्डलाइफ एसओएस के पशु चिकित्सकों और हाथियों की देखभाल करने वालों के साथ प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए।
प्रशिक्षण में हाथियों की सेहत, व्यवहार और जीवन की गुणवत्ता सुधारने के व्यावहारिक तरीकों पर ध्यान दिया गया। इसमें पैरों की बेहतर देखभाल, चलने-फिरने की क्षमता, सकारात्मक प्रोत्साहन आधारित प्रशिक्षण, सामाजिक मेलजोल, रहने के वातावरण में सुधार और देखभाल करने वालों के कौशल विकास जैसे विषय शामिल रहे। पुरानी चोटों से जूझ रहे हाथियों के आराम और गतिशीलता के साथ उनके स्वस्थ व्यवहार और सामाजिक संबंधों को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया।
मथुरा के डीएफओ वेंकट श्रीकर पटेल आईएफएस ने कहा कि बचाए गए हाथियों की भलाई के लिए लगातार सीखने, जिम्मेदारी से देखभाल और मजबूत सहयोग की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल से विशेषज्ञों के बीच जानकारी साझा करने और देखभाल के मानकों को बेहतर बनाने का अवसर मिलता है।
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि हाथी का रेस्क्यू उसकी ठीक होने की यात्रा की शुरुआत है। संस्था की जिम्मेदारी है कि बचाए गए प्रत्येक हाथी को जीवनभर बेहतर देखभाल मिले। अंतरराष्ट्रीय सहयोग से देखभाल के तरीकों में लगातार सुधार और नई विशेषज्ञता हासिल करने में मदद मिलती है।
वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने कहा कि प्रत्येक बचाए गए हाथी की अलग जरूरत होती है और उसके लिए धैर्य, विशेषज्ञता तथा निरंतर सुधार जरूरी है। माइक मैक्लूअर ने सहयोग को ज्ञान और विचारों के आदान-प्रदान का प्रभावी माध्यम बताया।
वाइल्डलाइफ एसओएस में कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स के डायरेक्टर बैजू राज एमवी ने कहा कि उत्तर प्रदेश वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस की संयुक्त पहल के तहत संचालित केंद्र को अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ज्ञान-साझाकरण से लाभ मिलेगा। इससे हाथियों के लिए बेहतर वातावरण और देखभाल की आधुनिक पद्धतियां विकसित करने में मदद मिलेगी।