सट्टेबाजी के चर्चित मामले में पांच आरोपियों को बड़ी राहत, कोर्ट ने किया बरी
आगरा के थाना सिकंदरा क्षेत्र से जुड़े चर्चित सट्टेबाजी मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शारिब अली की अदालत ने पांच आरोपियों को बरी कर दिया। संजय जैन उर्फ संजय कालिया, टोनी सिंघी उर्फ हरीश कुमार, मनीष मयानी उर्फ पंकज चावला, राजीव चौपड़ा और संदीप गुलाटी को आरोपों से राहत मिली। बचाव पक्ष ने पुलिस के साक्ष्यों और विवेचना पर सवाल उठाए थे।
पुलिस की विवेचना और साक्ष्यों पर अदालत में उठे सवाल
आगरा। थाना सिकंदरा क्षेत्र से जुड़े चर्चित सट्टेबाजी के मामले में पांच आरोपियों को अदालत से बड़ी राहत मिली है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शारिब अली ने मामले की सुनवाई के बाद आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत के फैसले के बाद संजय जैन उर्फ संजय कालिया, टोनी सिंघी उर्फ हरीश कुमार, मनीष मयानी उर्फ पंकज चावला, राजीव चौपड़ा और संदीप गुलाटी को आरोपों से राहत मिल गई।
यह मामला थाना सिकंदरा क्षेत्र में सामने आए कथित सट्टेबाजी प्रकरण से जुड़ा था और उस समय इसे लेकर काफी चर्चा हुई थी। पुलिस की कार्रवाई के बाद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना की गई थी। इसके बाद मामला न्यायालय में पहुंचा, जहां अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपों को साबित करने के लिए पुलिस की विवेचना और उपलब्ध साक्ष्यों पर भरोसा किया गया।
वहीं, बचाव पक्ष ने पुलिस की कहानी और विवेचना पर गंभीर सवाल उठाए। अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों की विश्वसनीयता और विवेचना की प्रक्रिया को चुनौती दी। बचाव पक्ष का तर्क था कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पर्याप्त रूप से सफल नहीं रहा।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष के तर्कों तथा उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। सुनवाई पूरी होने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शारिब अली ने पांचों आरोपियों को बरी कर दिया। फैसले के साथ ही लंबे समय से चले आ रहे इस चर्चित मामले में आरोपियों को कानूनी राहत मिल गई।
अदालत से बरी होने वालों में संजय जैन उर्फ संजय कालिया, टोनी सिंघी उर्फ हरीश कुमार, मनीष मयानी उर्फ पंकज चावला, राजीव चौपड़ा और संदीप गुलाटी शामिल हैं।
कोर्ट के फैसले से स्पष्ट है कि आपराधिक मामले में केवल आरोप लगाए जाना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि अभियोजन को अदालत के समक्ष उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को विधि सम्मत तरीके से साबित करना होता है। इस मामले में बचाव पक्ष की ओर से पुलिस साक्ष्यों और विवेचना को लेकर उठाए गए सवाल सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण रहे।