एडीए के प्रवर्तन अनुभाग में बड़ा फेरबदल: अफसरों की बदली जिम्मेदारियां
आगरा विकास प्राधिकरण के प्रवर्तन अनुभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। एडीए सचिव संजय कुमार को ताजगंज प्रथम-द्वितीय और छत्ता प्रथम-द्वितीय वार्ड की जिम्मेदारी दी गई है। संयुक्त सचिव सुरेंद्र बहादुर सिंह को कोतवाली, शाहगंज, रकाबगंज-कैंट और फतेहपुर सीकरी का प्रभार मिला है। अधिशासी अभियंता नरेंद्र कुमार को लोहामंडी और हरीपर्वत के तीनों वार्ड सौंपे गए हैं। वहीं जेई भानुप्रताप सिंह को हरीपर्वत से हटाकर ताजगंज प्रथम और शाहगंज, जबकि जेई राजीव कोहली को हरीपर्वत तृतीय से हटाकर हरीपर्वत प्रथम-द्वितीय की जिम्मेदारी दी गई है। जेई मो. आमीन को प्रवर्तन अनुभाग से हटा दिया गया है।
सचिव संजय कुमार को ताजगंज और छत्ता के चार वार्डों की कमान, संयुक्त सचिव सुरेंद्र बहादुर सिंह को चार क्षेत्रों का प्रभार
आगरा। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) के प्रवर्तन अनुभाग में बड़े स्तर पर फेरबदल किया गया है। अवैध निर्माण, अनधिकृत विकास, नक्शा उल्लंघन और निर्माण संबंधी शिकायतों पर कार्रवाई करने वाले प्रवर्तन अनुभाग में अधिकारियों और अवर अभियंताओं की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। नई व्यवस्था के तहत कई वार्डों का प्रभार अधिकारियों को सौंपा गया है, जबकि कुछ अभियंताओं को उनके मौजूदा क्षेत्र से हटाकर दूसरे वार्डों में तैनाती दी गई है।
एडीए की इस प्रशासनिक कवायद को प्रवर्तन कार्यों को और प्रभावी बनाने तथा अलग-अलग क्षेत्रों में निगरानी एवं कार्रवाई की जिम्मेदारी स्पष्ट करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फेरबदल के बाद अब संबंधित अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध निर्माण और विकास कार्यों की निगरानी के साथ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
सचिव को ताजगंज और छत्ता के चार वार्डों की जिम्मेदारी
नई व्यवस्था में एडीए सचिव संजय कुमार को प्रवर्तन से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्रों का प्रभार दिया गया है। उन्हें ताजगंज प्रथम, ताजगंज द्वितीय, छत्ता प्रथम और छत्ता द्वितीय वार्ड की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ताजगंज क्षेत्र आगरा के सबसे महत्वपूर्ण इलाकों में शामिल है। यहां पर्यटन गतिविधियों के साथ बड़ी संख्या में व्यावसायिक और आवासीय निर्माण भी होते हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में अवैध निर्माण और भवन मानचित्र के उल्लंघन पर निगरानी प्रवर्तन विभाग के लिए अहम मानी जाती है। वहीं छत्ता क्षेत्र भी पुराने शहर और घनी आबादी वाले इलाकों से जुड़ा होने के कारण प्रवर्तन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
संयुक्त सचिव को चार क्षेत्रों का प्रभार
एडीए संयुक्त सचिव सुरेंद्र बहादुर सिंह को भी प्रवर्तन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें कोतवाली, शाहगंज, रकाबगंज-कैंट और फतेहपुर सीकरी क्षेत्रों का प्रभार सौंपा गया है। इन क्षेत्रों में पुराने शहर के साथ-साथ आवासीय, व्यावसायिक और मिश्रित उपयोग वाले क्षेत्र शामिल हैं। अलग-अलग प्रकृति के निर्माण और विकास कार्यों के चलते इन क्षेत्रों में प्रवर्तन टीम के सामने लगातार निगरानी की चुनौती रहती है।
अधिशासी अभियंता को लोहामंडी और हरीपर्वत के तीनों वार्ड
फेरबदल के तहत अधिशासी अभियंता नरेंद्र कुमार को लोहामंडी और हरीपर्वत के तीनों वार्डों की जिम्मेदारी दी गई है। इस बदलाव के बाद इन क्षेत्रों में प्रवर्तन संबंधी कार्रवाई और निरीक्षण की निगरानी उनके स्तर से की जाएगी। हरीपर्वत क्षेत्र में भीड़भाड़ वाले बाजारों और तेजी से विकसित हो रहे आवासीय एवं व्यावसायिक क्षेत्रों के कारण निर्माण गतिविधियों पर नजर रखना महत्वपूर्ण है। वहीं लोहामंडी क्षेत्र में भी पुराने और नए निर्माण के साथ व्यावसायिक गतिविधियां लगातार चलती रहती हैं। प्रवर्तन अनुभाग के अवर अभियंता भानुप्रताप सिंह को हरीपर्वत क्षेत्र से हटाकर नई जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें अब ताजगंज प्रथम और शाहगंज वार्ड में तैनात किया गया है। नई तैनाती के साथ भानुप्रताप सिंह को इन दोनों महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों की निगरानी, शिकायतों के निस्तारण और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में आवश्यक कार्रवाई की जिम्मेदारी संभालनी होगी।
जेई की भी बदली जिम्मेदारी
जेई राजीव कोहली को हरीपर्वत तृतीय वार्ड से हटाया गया है। अब उन्हें हरीपर्वत प्रथम और द्वितीय वार्ड की जिम्मेदारी दी गई है। इस बदलाव के बाद हरीपर्वत क्षेत्र में प्रवर्तन की जिम्मेदारियों का नए सिरे से वितरण किया गया है। अधिकारियों के स्तर पर क्षेत्रवार जिम्मेदारी तय होने से विभाग को निगरानी और कार्रवाई में बेहतर समन्वय की उम्मीद है। फेरबदल में जेई मो. आमीन को प्रवर्तन अनुभाग से हटा दिया गया है। उनकी नई तैनाती अथवा जिम्मेदारी के संबंध में अलग आदेश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रवर्तन अनुभाग में यह बदलाव ऐसे समय किया गया है, जब एडीए के सामने शहर में अवैध निर्माण और बिना स्वीकृति विकास कार्यों पर प्रभावी कार्रवाई करने की चुनौती बनी हुई है।
अवैध निर्माण पर कार्रवाई की होगी बड़ी जिम्मेदारी
एडीए के प्रवर्तन अनुभाग की जिम्मेदारी केवल निर्माण रोकने तक सीमित नहीं है। अधिकारियों और अभियंताओं को क्षेत्र में भवन मानचित्र के अनुरूप निर्माण, स्वीकृत भू-उपयोग, अनधिकृत कॉलोनियों और बिना अनुमति किए जा रहे निर्माण कार्यों पर भी नजर रखनी होती है। नई तैनाती के बाद संबंधित अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लंबित शिकायतों और पुराने मामलों की समीक्षा कर प्रभावी कार्रवाई करें। इसके साथ ही नए अवैध निर्माणों पर शुरुआती स्तर पर ही रोक लगाने की जिम्मेदारी भी अहम होगी।
नई तैनाती से कार्रवाई में तेजी की उम्मीद
एडीए के प्रवर्तन अनुभाग में हुए इस फेरबदल से वार्डवार निगरानी व्यवस्था को और स्पष्ट करने का प्रयास दिखाई देता है। वरिष्ठ अधिकारियों को सीधे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की जिम्मेदारी दिए जाने के साथ जेई स्तर पर भी क्षेत्रों का पुनर्वितरण किया गया है। अब देखना होगा कि नई व्यवस्था के बाद शहर में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई कितनी तेज होती है और शिकायतों के निस्तारण में कितना सुधार आता है। खासकर ताजगंज, छत्ता, शाहगंज, हरीपर्वत और लोहामंडी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नई टीम की कार्यप्रणाली पर नजर रहेगी।