बदलती लाइफस्टाइल से खतरे में पुरुष प्रजनन क्षमता, स्पर्म एसीई की कार्यशाला में डीएनए डैमेज बढ़ने पर विशेषज्ञों की गंभीर चेतावनी

आगरा। देश में तेजी से बढ़ रही बांझपन (इन्फर्टिलिटी) की समस्या अब केवल स्पर्म काउंट तक सीमित नहीं रह गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान, प्रदूषित वातावरण और बढ़ते तनाव के कारण पुरुषों के शुक्राणुओं (स्पर्म) की गुणवत्ता और उनके डीएनए पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। इसका असर केवल गर्भधारण की संभावना पर ही नहीं, बल्कि भविष्य में जन्म लेने वाले शिशु के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। यह जानकारी आईटीसी मुगल में इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ एकेडमी ऑफ क्लीनिकल एम्ब्रियोलॉजिस्ट इंडिया द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने साझा की। उन्होंने आधुनिक एआई आधारित तकनीकों के उपयोग के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर विशेष जोर दिया।

Aug 7, 2026 - 16:44
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बदलती लाइफस्टाइल से खतरे में पुरुष प्रजनन क्षमता, स्पर्म एसीई की कार्यशाला में डीएनए डैमेज बढ़ने पर विशेषज्ञों की गंभीर चेतावनी
आईटीसी मुगल में इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ एकेडमी ऑफ क्लीनिकल एम्ब्रियोलॉजिस्ट, इंडिया द्वारा आयोजित कार्यशाला में स्पर्म टेस्टिंग करते डॊ. केशव मल्होत्रा।

आयोजन समिति के सचिव डॉ. केशव मल्होत्रा ने बताया कि वर्तमान समय में युवाओं में स्पर्म काउंट घटने के साथ-साथ स्पर्म डीएनए डैमेज के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि शुक्राणुओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है तो इससे सफल गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है और भ्रूण के विकास पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

उन्होंने बताया कि आज आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) तकनीक के माध्यम से संतान प्राप्ति की संभावनाएं बढ़ी हैं, लेकिन केवल गर्भधारण कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि जन्म लेने वाला शिशु पूरी तरह स्वस्थ हो। इसी उद्देश्य से अब चिकित्सा विज्ञान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित अत्याधुनिक मशीनें और उपकरण विकसित किए गए हैं, जो उच्च गुणवत्ता वाले शुक्राणुओं की पहचान और चयन में एम्ब्रियोलॉजिस्ट की मदद करते हैं। इससे बेहतर गुणवत्ता वाले भ्रूण के निर्माण और स्वस्थ शिशु के जन्म की संभावना बढ़ जाती है।

आयोजन समिति की अध्यक्ष डॉ. सुजाता रामाकृष्णनन तथा विशेषज्ञ डॉ. गौरव मजूमदार ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण, जंक फूड का बढ़ता चलन, शारीरिक गतिविधियों की कमी, लगातार मानसिक तनाव और अनियमित जीवनशैली पुरुष प्रजनन क्षमता को तेजी से प्रभावित कर रहे हैं। देर रात तक जागना, पर्याप्त नींद न लेना और लगातार तनाव में रहना भी बांझपन के प्रमुख कारणों में शामिल होता जा रहा है।

वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेन्द्र मल्होत्रा ने युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि समय पर सोना और जागना, नियमित व्यायाम करना, संतुलित एवं पौष्टिक भोजन लेना तथा किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहना प्रजनन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भोजन का चयन स्वाद के बजाय स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि अत्यधिक धूम्रपान, किसी भी प्रकार का नशा तथा अत्यधिक चॉकलेट जैसे प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन भी पुरुषों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है। यदि युवा समय रहते अपनी जीवनशैली में सुधार कर लें तो बढ़ती बांझपन की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।

8 अगस्त को होगा ACE 2026 का औपचारिक उद्घाटन

ACE 2026 अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन 8 अगस्त को केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल करेंगे। उद्घाटन समारोह में देश-विदेश से आए एक हजार से अधिक विशेषज्ञ, चिकित्सक, एम्ब्रियोलॉजिस्ट और शोधकर्ता भाग लेंगे।

उद्घाटन के बाद पूरे दिन विभिन्न वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें प्रजनन चिकित्सा, आईवीएफ तकनीक, एम्ब्रियोलॉजी, भ्रूण विकास, स्पर्म चयन तथा अत्याधुनिक प्रयोगशाला तकनीकों पर विस्तार से चर्चा होगी। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ नवीनतम शोध, आधुनिक उपचार पद्धतियों और भविष्य की तकनीकों पर अपने अनुभव साझा करेंगे। आयोजन का उद्देश्य प्रजनन चिकित्सा के क्षेत्र में नवीनतम वैज्ञानिक जानकारियों का आदान-प्रदान कर बेहतर उपचार व्यवस्था को बढ़ावा देना है।

SP_Singh AURGURU Editor